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Hindi News NCRसुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में 2006 तक के जमीन अधिग्रहण को बताया सही, हाईकोर्ट का आदेश रद

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में 2006 तक के जमीन अधिग्रहण को बताया सही, हाईकोर्ट का आदेश रद

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी परियोजनाओं के लिए डीडीए, दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम, पूर्वी दिल्ली नगर निगम और दिल्ली मेट्रो रेल निगम की ओर से 2006 तक के भूमि अधिग्रहण को बरकरार रखा है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में 2006 तक के जमीन अधिग्रहण को बताया सही, हाईकोर्ट का आदेश रद
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Krishna Singhभाषा,नई दिल्लीSat, 25 May 2024 09:56 PM
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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए 1957 से 2006 के बीच डीडीए, दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) और दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) की ओर से किए गए जमीन अधिग्रहण को बरकरार रखा है। दिल्ली सरकार ने दिल्ली के नियोजित विकास के लिए भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के तहत भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू की थी। 

ऐसी अधिग्रहण प्रक्रियाओं के लाभार्थी डीडीए, डीएसआईआईडीसी और डीएमआरसी जैसी विभिन्न राज्य संस्थाएं थीं, जिन्हें आवास योजनाओं, औद्योगिक क्षेत्रों, फ्लाईओवर और दिल्ली मेट्रो जैसी परियोजनाओं के लिए जमीन की जरूरत थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 1957 से 2006 के दौरान इन जमीनों को प्राप्त करने के लिए 1894 अधिनियम की धारा चार और छह के तहत विभिन्न अधिसूचनाएं जारी की गईं।

यही नहीं 1894 अधिनियम की धारा-11 के तहत मुआवजा तय करते हुए आदेश पारित किए गए। न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने 17 मई को दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें भूमि अधिग्रहण पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम- 2013 की धारा 24(2) के संदर्भ में अधिग्रहण की कार्यवाही को समाप्त घोषित कर दिया था।

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सैकड़ों अपील दायर की गई थीं। न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने अपने 113 पेज के फैसले में कहा कि ऐसी सभी दीवानी अपीलों को अनुमति दी जाती है। प्रत्येक मामले में हाईकोर्ट के फैसले को रद्द किया जाता है। साल 1894 के संबंधित अधिनियम के तहत प्रतिवादियों की भूमि के अधिग्रहण को बरकरार रखा जाता है। यह आदेश न्यायालय की वेबसाइट पर शुक्रवार को अपलोड किया गया है।