ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News NCRनोएडा की लोटस 300 परियोजना की ईडी जांच के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक, क्या है मामला?

नोएडा की लोटस 300 परियोजना की ईडी जांच के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक, क्या है मामला?

नोएडा में स्थित लग्जरी आवासीय परियोजना 'लोटस 300' से जुड़े वित्तीय लेनदेन की ईडी जांच संबंधी इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। क्या है पूरा मामला?

नोएडा की लोटस 300 परियोजना की ईडी जांच के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक, क्या है मामला?
new-delhi--jan-10--ani---a-view-of-the-supreme-cou jpg
Krishna Singhभाषा,नोएडाThu, 13 Jun 2024 12:32 AM
ऐप पर पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा में स्थित लग्जरी आवासीय परियोजना 'लोटस 300' से जुड़े वित्तीय लेनदेन की ईडी जांच संबंधी इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की अवकाशकालीन पीठ ने मंगलवार को यह आदेश पारित किया। बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 29 फरवरी को नोएडा के सेक्टर-107 में अधूरी आवासीय परियोजना लोटस 300 से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की ईडी जांच का आदेश दिया था।

यह जमीन हैसिंडा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड (एचपीपीएल) को लोटस 300 परियोजना विकसित करने के लिए आवंटित की गई थी। एचपीपीएल कई कंपनियों का एक गठजोड़ है जिसमें पेबल्स इन्फ्रोटेक की अग्रणी भूमिका है। हाईकोर्ट ने इस मामले में 'घोर लापरवाही' के लिए नोएडा विकास प्राधिकरण को फटकार लगाई थी। उच्च न्यायलय ने नोएडा विकास प्राधिकरण को एक दशक से अधिक समय से अपने बकाये के भुगतान की स्थिति का पता लगाने या कोई कदम उठाने में फटकार लगाई थी। 

नोएडा विकास प्राधिकरण का बकाया बढ़कर 29 फरवरी तक लगभग 166 करोड़ रुपये था। इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि अगले आदेश तक पैराग्राफ 114 में निहित उच्च न्यायालय के निर्देश पर अंतरिम रोक रहेगी। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि सभी पक्षों को यह सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए कि पैराग्राफ 117 में दिए हाईकोर्ट के निर्देश का समय के भीतर विधिवत पालन किया जाए। 

इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश का पैराग्राफ 114 सभी निदेशकों, प्रवर्तकों, नामित प्रवर्तक, कर्ज भुगतान में चूक करने वाले अधिकारी और एचपीपीएल का पैसा जिन कंपनियों या संस्थाओं में भेजा गया, उनके खिलाफ ईडी जांच कराने से संबंधित था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि ईडी उक्त राशि की वसूली और सभी लेनदारों के बकाये का भुगतान करने के लिए ईमानदार प्रयास करेगा। आदेश में नोएडा प्राधिकरण को कब्जा प्रमाणपत्र जारी करने और एक महीने के भीतर फ्लैट खरीदारों के पक्ष में समझौता और पंजीकृत बैनामा करने का निर्देश दिया गया था।