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SC से केजरीवाल को राहत, आचार संहिता मामले में मुकदमे पर रोक बढ़ाई, क्या दिया था बयान?

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को बड़ी राहत देते हुए मंगलवार को चुनाव आचार संहिता उल्लंघन मामले में उनके खिलाफ मुकदमे पर रोक बढ़ा दी। जानें शीर्ष अदालत ने क्या कहा?

SC से केजरीवाल को राहत, आचार संहिता मामले में मुकदमे पर रोक बढ़ाई, क्या दिया था बयान?
Krishna Singhअब्राहम थॉमस,नई दिल्लीTue, 13 Feb 2024 03:36 PM
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दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चुनाव आचार संहिता उल्लंघन मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मुकदमे पर रोक बढ़ा दी। 2014 के आम चुनावों के दौरान दिए गए एक भाषण के आधार पर उनके खिलाफ यूपी में केस दर्ज किया गया था। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश की अध्यक्षता वाली पीठ ने आम आदमी पार्टी की ओर से दाखिल अपील को स्वीकार करते हुए मामले को 'अप्रासंगिक' करार दिया। 

केजरीवाल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 16 जनवरी के आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में केजरीवाल को मुक्त करने से इनकार कर दिया था। सर्वोच्च अदालत की इस पीठ में न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी भी शामिल थे। पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा- हम राहत देंगे। हमारे द्वारा दिया गया अंतरिम आदेश जारी रहेगा। इस मामले को ठंडे बस्ते में रहने दें। वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी केजरीवाल की ओर से पेश हुए। 

उनके साथ वकील विवेक जैन ने मामले से जुड़े मुद्दों को उजागर करने वाले अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने के लिए अदालत से अनुमति मांगी। पीठ ने जवाब दिया कि ये सभी अप्रासंगिक हैं। यूपी पुलिस ने 2 मई 2014 को औरंगाबाद में एक रैली में दिए गए भाषण के सिलसिले में केजरीवाल के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इसमें केजरीवाल ने कथित तौर पर कहा था कि जो लोग कांग्रेस को वोट देंगे, उन्हें 'गद्दार' माना जाएगा, जो लोग भाजपा को वोट देंगे, उन्हें 'खुदा' नहीं बख्शेगा।

पिछले साल फरवरी में, शीर्ष अदालत ने अपील पर जारी नोटिस और मुकदमे पर रोक लगा दी थी। हाई कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद केजरीवाल ने मामले में गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। शिकायत एक पुलिस अधिकारी की ओर की गई थी। केजरीवाल की ओर से दायर याचिका में दावा किया गया था कि भाषण की कोई वीडियो रिकॉर्डिंग या प्रतिलेख नहीं है। याचिका में यह भी कहा गया था कि आम जनता कोई भी आगे नहीं आया था कि बयान से असंतोष पैदा हुआ है।