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क्या एलजी ने रिज क्षेत्र में पेड़ों को काटने के लिए कहा? सुप्रीम कोर्ट की डीडीए को कड़ी फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने डीडीए से पूछा कि रिज क्षेत्र में पेड़ों को काटने के खिलाफ सर्वोच्च अदालत के आदेश के बावजूद वहां पेड़ों को कैसे काट दिया गया। क्या ऐसा करने के लिए एलजी ने कहा था? पढ़ें यह रिपोर्ट...

क्या एलजी ने रिज क्षेत्र में पेड़ों को काटने के लिए कहा? सुप्रीम कोर्ट की डीडीए को कड़ी फटकार
Krishna Singhहिन्दुस्तान,नई दिल्लीMon, 24 Jun 2024 08:23 PM
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सुप्रीम कोर्ट ने राजधानी दिल्ली के रिज क्षेत्र में पेड़ों की कटाई के मसले पर दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को कड़ी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने डीडीए से पूछा कि रिज क्षेत्र में पेड़ों को काटने के खिलाफ सर्वोच्च अदालत के आदेश के बावजूद वहां पेड़ों को कैसे काट दिया गया। क्या ऐसा करने के लिए एलजी ने डीडीए अधिकारियों को निर्देश दिया था। अदालत ने कहा कि डीडीए पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले 'निर्लज्ज कृत्यों' को नजरअंदाज नहीं कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए शीर्ष अदालत ने डीडीए उपाध्यक्ष से स्पष्ट शब्दों में यह बताने के लिए कहा है कि क्या अदालत की अनुमति के बगैर एलजी के आदेश पर पेड़ों को काटा गया। जस्टिस अभय एस ओका और उज्जल भुइयां की अवकाशकालीन पीठ ने कहा, यह चौंकाने वाला तथ्य है कि जानते हुए भी रिज क्षेत्र में पेड़ों को काटा गया कि सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बगैर इसे नहीं काटा जा सकता है।

पीठ ने कहा कि हम डीडीए के उस कृत्य की विस्तृत जांच का आदेश दे सकते हैं, जिसके तहत रिज क्षेत्र में कई मूल्यवान पेड़ नष्ट हो गए और परिणाम स्वरूप पर्यावरण का काफी नुकसान हुआ। ‌शीर्ष अदालत ने तल्खी भरे अंदाज में कहा कि राजधानी में इस तरह के बेशर्मी भरे कृत्यों (पेड़ो को काटने) को इस अदालत द्वारा हल्के में नहीं लिया जा सकता।

अदालत ने कहा कि यदि अधिकारी पर्यावरण की रक्षा के अपने वैधानिक और संवैधानिक कर्तव्यों का पालन नहीं कर रहे हैं तो अदालत को सभी अधिकारियों को स्पष्ट और प्रभावी संकेत देना होगा कि पर्यावरण को इस तरह से नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित डीडीए अधिकारियों को अवमानना ​​नोटिस जारी कर यह बताने के लिए कहा कि क्यों न उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। पीठ ने डीडीए उपाध्यक्ष को यह बताने के लिए कहा है कि क्या इस अदालत की अनुमति के बगैर रिज क्षेत्र में पेड़ों को काटा गया। तीन फरवरी को उपराज्यपाल के साइट निरीक्षण के दौरान क्या हुआ, इस बारे में कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध है। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला गंभीर है और हमें डीडीए उपाध्यक्ष से तथ्यों का स्पष्ट व विस्तृत ब्योरा चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही दिल्ली में बड़े पैमाने पर पौधरोपण अभियान चलाने का प्रस्ताव/निर्देश दिया। साथ ही डीडीए और अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी से इस मामले में सहायता करने को कहा। मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी। 

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले छतरपुर से दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय तक सड़क बनाने के लिए दक्षिणी रिज के सतबारी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की अनुमति देने के लिए डीडीए उपाध्यक्ष के खिलाफ आपराधिक अवमानना ​​का नोटिस जारी किया था। इस मामले में उपाध्यक्ष की ओर से दाखिल हलफनामा को भी सुप्रीम कोर्ट ने भ्रामक बताते हुए खिंचाई की थी। शीर्ष अदालत ने डीडीए को काटे गए प्रत्येक पेड़ के बदले 100 नए पेड़ लगाने का भी निर्देश दिया था।