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सुप्रीम कोर्ट ने दी दिल्ली में बने शिव मंदिर को गिराने की इजाजत, क्या है वजह

जस्टिस पीवी संजय कुमार ने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाकर्ता प्राचीन शिव मंदिर अवाम अखाड़ा समिति पर भी सवाल उठाया।

सुप्रीम कोर्ट ने दी दिल्ली में बने शिव मंदिर को गिराने की इजाजत, क्या है वजह
Aditi Sharmaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीFri, 14 Jun 2024 02:24 PM
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है जिसमें  यमुना के बाढ़ क्षेत्र में मौजूद एक शिव मंदिर को गिराने की अनुमति दी गई थी। फैसला देते हुए जस्टिस पीवी संजय कुमार और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश में कोई खामी नहीं है। जस्टिस पीवी संजय कुमार ने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाकर्ता प्राचीन शिव मंदिर अवाम अखाड़ा समिति के अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल उठाया।

जस्टिस कुमार ने कहा, "आप बाढ़ के मैदानों में अखाड़ा कैसे बना सकते हैं? क्या अखाड़ा आम तौर पर (भगवान) हनुमान से जुड़ा नहीं है?" इससे पहले गीता कॉलोनी में ताज एन्क्लेव के पास स्थित प्राचीन शिव मंदिर (प्राचीन शिव मंदिर) को ध्वस्त करने की अनुमति देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा था कि भगवान शिव को कोर्ट की सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है बल्कि हमें भगवान शिव की सुरक्षा और आशीर्वाद की जरूरत है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा था कि यमुना नदी के तलहटी क्षेत्र और बाढ़ वाले इलाकों से सभी अतिक्रमणों और अवैध निर्माणों को हटा दिया जाता है तो भगवान शिव ज्यादा खुश होंगे। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि मंदिर आध्यात्मिक गतिविधियों का केंद्र है, जहां नियमित रूप से 300 से 400 श्रद्धालु आते हैं।

याचिका में दावा किया गया कि याचिकाकर्ता सोसायटी को मंदिर की संपत्ति की पारदर्शिता, जवाबदेही और जिम्मेदार प्रबंधन को बनाये रखने के उद्देश्य से 2018 में पंजीकृत किया गया था। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता सोसायटी भूमि पर अपने स्वामित्व, अधिकार या हित के संबंध में कोई दस्तावेज दिखाने में पूरी तरह विफल रही है और इस बात का कोई सबूत नहीं है कि मंदिर का कोई ऐतिहासिक महत्व है। अदालत ने कहा कि सोसायटी को मंदिर में रखी मूर्तियों और अन्य धार्मिक वस्तुओं को हटाने और उन्हें किसी अन्य मंदिर में स्थानांतरित करने के लिए 15 दिन का समय दिया जाता है। अदालत ने कहा कि यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं तो दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाता है कि मूर्तियों को किसी अन्य मंदिर में रखा जाए।

अदालत ने कहा, ‘‘डीडीए को अनधिकृत निर्माण को गिराने की स्वतंत्रता होगी और याचिकाकर्ता सोसायटी और उसके सदस्य ऐसी प्रक्रिया में कोई बाधा या रुकावट पैदा नहीं करेंगे। स्थानीय पुलिस और प्रशासन कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए उक्त प्रक्रिया में पूरी सहायता प्रदान करेंगे।’’