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28 मई, 2020|3:41|IST

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Delhi University में दाखिले की देरी से देशभर के छात्र परेशान

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डीयू में 15 अप्रैल से ही ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा के बाद भी अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। पिछले वर्ष 15 मई को आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई थी। पिछले वर्ष से ही तुलना की जाए तो एक माह की देरी हो चुकी है। इस माह भी अब तक डीयू के अधिकारी किसी एक तिथि को स्पष्ट नहीं कर पाए हैं। इससे छात्रों की चिंता बढ़ गई है।

डीयू में स्नातक के दाखिले कुछ बदलावों के साथ मई के तीसरे या चौथे सप्ताह में शुरू होने की संभावना है। लेकिन मेरिट से होने वाले दाखिले की राह डीयू के लिये इस बार भी आसान नजर नहीं आ रही है। प्रति वर्ष डीयू की मैराथन तैयारी के बाद भी आवेदन से लेकर दाखिले तक छात्रों और अभिभावकों को दर-दर भटकना पड़ता है। सत्र 2019-20 में भी डीयू में दाखिला प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न कराने की चुनौती है। दाखिला प्रक्रिया में देरी के लिए कई सुधार को कारण बताया जा रहा है। लेकिन क्या बदलाव हुए हैं। छात्रों को कैसी सुविधा और किसी रूप में दी जाएगी जैसे बिंदुओं पर डीयू दाखिला समिति या उसके चेयरमैन ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

इन कमियों पर ध्यान देना होगा 
सर्वर की समस्या : डीयू में अब भी मजबूत ऑनलाइन सिस्टम का अभाव है। यही कारण है कि जैसे ही डीयू में आवेदन प्रक्रिया शुरू होती है यहां सर्वर की समस्या शुरू हो जाती है। फीस भुगतान और अंकपत्र अपलोड करने में भी छात्रों को समस्या का सामना करना पड़ता है। 

स्पष्ट दिशा निर्देश का अभाव : डीयू दाखिला के लिए दाखिला समिति एक प्रास्पेक्टस बनाकर दिशा निर्देश जारी करती है, लेकिन कॉलेजों में उसके अलग मतलब निकाले जाते हैं। डीयू ने अब तक दाखिला से जुड़ा किसी तरह का इंफार्मेंशन बुलेटिन जारी नहीं किया है। आरक्षित वर्ग, स्पोर्ट्स, ईसीए और अन्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए दाखिले को  लेकर सरल व स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं होने से छात्रों के समक्ष काफी असमंजस की स्थिति रहती है। 

कटऑफ की संख्या निर्धारित नहीं : डीयू में दाखिला समिति हर साल यह दावा करती है कि कम से कम कटऑफ निकाली जायेगी। लेकिन अब तक डीयू के पास ऐसा कोई तरीका नहीं निकाला जा सका है जिससे यह पता चल सके कि कटऑफ की संख्या कितनी रखी जाये। पिछले वर्ष केवल पांच कटऑफ निकालने की बात कही गई थी लेकिन दाखिला समाप्त होते होते यह संख्या 10 हो गई। इस साल भी कम कटऑफ का दावा किया जा रहा है।  

तालमेल की कमी : हर साल मेरिट लिस्ट में छात्र अपनी जगह बनाने के बाद भी कॉलेज और डीयू प्रशासन के बीच चक्कर लगाते रहते हैं। जाति प्रमाणपत्र, बेस्ट फोर, विषयों के तालमेल सहित तमाम कारणों से छात्र को कॉलेज से डीयू प्रशासन के बीच जूझना पड़ता है। यदि दोनों का आपस में तालमेल हो जाए तो छात्रों और अभिभावकों को कम से कम परेशानी होगी। लेकिन हर साल डीयू और कॉलेज के बीच तालमेल की कोशिश बेकार साबित होती है।  

फर्जी बोर्ड चेक करने का तरीका नहीं : डीयू में लंबे समय से दाखिले से जुड़े एक पूर्व अधिकारी का कहना है कि डीयू के पास ऐसा कोई तरीका नहीं है, जिससे पता चल सके 12वीं का कौन सा बोर्ड फर्जी है। आमतौर से कुछ कॉलेजों ने अपने यहां 100 से अधिक सही बोर्ड की सूची लगाई है, लेकिन फिर भी नए बोर्ड की सत्यता की पुष्टि के लिए उनके पास कोई ठोस तरीका नहीं है। यही कारण है डीयू में हर साल फर्जी दाखिले के मामले आते हैं। प्राय: कॉलेज को इसके बारे में बाद में पता चलता है तब तक दाखिला प्रक्रिया समाप्त हो चुकी होती है, जिससे खाली सीटों पर वह दोबारा किसी योग्य छात्र को दाखिला भी नहीं दे सकते हैं। 

फॉरेंसिक जांच आसान नहीं : डीयू हर साल कॉलेजों पर सख्ती दिखाते हुए फर्जी दाखिला रोकने के लिए 12वीं के प्रमाणपत्रों की फॉरेंसिक जांच कराने का निर्देश देता है। लेकिन, कॉलेजों के लिए फॉरेसिंक जांच आसान नहीं है। कई कॉलेजों के प्रिंसिपल का कहना है कि फॉरेंसिक जांच का खर्च कौन वहन करेगा, इतने अधिक फॉरेंसिक एक्स्पर्ट एक साथ बुलाना कठिन है। डीयू इसमें किसी तरह की मदद नहीं करता है।

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  • Web Title:Students are upset with admission process is getting late in Delhi University