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पराली जलाने के मामले हुए कम, फिर भी दिल्ली को क्यों नहीं मिला फायदा; 12 इलाको में जहरीली हवा

दिल्ली में वायु प्रदूषण का मुख्य कारण माने जाने वाली पराली जलाने की घटनाएं इस साल आधी से भी कम रहीं। इसके बावजूद दिल्ली में प्रदूषण से राहत नहीं मिली। इस बार 40 हजार से भी कम मामले सामने आए।

पराली जलाने के मामले हुए कम, फिर भी दिल्ली को क्यों नहीं मिला फायदा; 12 इलाको में जहरीली हवा
Sneha Baluniहिन्दुस्तान,नई दिल्लीThu, 07 Dec 2023 05:48 AM
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पराली जलाने से रोकने के उपाय इस साल कारगर साबित हुए हैं। चार साल पहले की तुलना में इस बार पराली जलाने की घटनाएं आधी से भी कम रहीं। केन्द्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के मुताबिक, वर्ष 2020 में पराली जलाने के 87 हजार से ज्यादा मामले दर्ज हुए थे। इस बार 40 हजार से भी कम मामले सामने आए। हालांकि, मौसम के कारकों की वजह से पराली जलाने की घटनाएं कम होने के बावजूद प्रदूषण बढ़ा है। 

आयोग ने 15 अक्तूबर से 30 नवंबर तक पूरे पराली सीजन की तुलना बीते वर्षों से की है। इससे पता चला कि पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के एनसीआर में शामिल जिलों में पराली जलाने की घटनाएं चार साल पहले की तुलना में आधी रह गई हैं। वर्ष 2020 में इस क्षेत्र में पराली जलाने की 87,632 घटनाएं हुई थीं, इस साल 39,186 घटनाएं ही हुईं।

धान की फसल के अवशेषों को खेत में ही जलाने की प्रवृत्ति पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश समेत देश के अन्य हिस्सों में रही है। बड़े पैमाने पर पराली जलाने के चलते दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में प्रदूषण स्तर में इजाफा होता है। इस वजह से पराली जलाने से रोकने के प्रयास किए जाते रहे हैं। इस वर्ष कुछ हद तक इसमें सफलता भी मिली है।

बेहद खराब श्रेणी में 12 इलाकों की हवा

हवा की रफ्तार बढ़ने से प्रदूषण स्तर में मामूली गिरावट आई है। समग्र तौर पर दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 से नीचे यानी खराब श्रेणी में आ गया है। अभी दिल्ली के 12 इलाके ऐसे हैं, जहां का सूचकांक 300 से ऊपर यानी बेहद खराब श्रेणी में बना हुआ है। दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 286 रहा। इसे खराब श्रेणी में रखा जाता है। मंगलवार को सूचकांक 297 था। यानी 24 घंटे में इसमें 11 अंकों का सुधार हुआ है। हवा की रफ्तार बढ़ने से भले ही प्रदूषण स्तर में थोड़ी कमी आई है, लेकिन अभी हवा पूरी तरह साफ होने की संभावना नहीं है।

नहीं मिला फायदा

केन्द्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के मुताबिक, पराली जलाने की घटनाओं में खासी कमी आने के बावजूद दिल्ली-एनसीआर के लोगों को इसका खास फायदा नहीं मिला। हवा की रफ्तार बेहद कम होने के चलते इस बार लोगों को ज्यादा प्रदूषण का सामना करना पड़ा।

मानक से दोगुना प्रदूषण

हवा में प्रदूषक कण पीएम 10 का औसत स्तर 100 और पीएम 2.5 का औसत स्तर 60 से कम होने पर उसे सही माना जाता है। दिल्ली-एनसीआर की हवा में पीएम 10 का औसत स्तर 205 व पीएम 2.5 का 112 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। यानी यहां मानकों से दोगुना प्रदूषण है।

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