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ड्यूटी के दौरान बीमार-दिव्यांग हुए कर्मचारी का वेतन रोकना असंवैधानिक, दिल्ली हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि ड्यूटी पर तैनाती के दौरान कर्मचारी बीमार अथवा शारीरिक दिव्यांगता का शिकार होता है तो उसका वेतन रोकना असंवैधानिक है।

ड्यूटी के दौरान बीमार-दिव्यांग हुए कर्मचारी का वेतन रोकना असंवैधानिक, दिल्ली हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
Praveen Sharmaनई दिल्ली। हेमलता कौशिकMon, 04 Dec 2023 05:35 AM
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दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि ड्यूटी पर तैनाती के दौरान कर्मचारी बीमार अथवा शारीरिक दिव्यांगता का शिकार होता है तो उसका वेतन रोकना असंवैधानिक है। उसे इस दौरान का पूरा वेतन मिलनी चाहिए। कोर्ट ने यह फैसला रेलवे सुरक्षा फोर्स में तैनात एक कॉन्स्टेबल की याचिका को मंजूर करते हुए दिया।

जस्टिस संजीव सचदेवा एवं जस्टिस मनोज जैन की बेंच ने कहा, याचिकाकर्ता कॉन्स्टेबल पिछले सात साल से अपने हक के पैसे के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। बेंच ने केन्द्र सरकार को निर्देश दिया कि वह पीड़ित को 12 सप्ताह के भीतर बकाया वेतन का भुगतान करे। बेंच ने यह भी कहा कि अगर निर्धारित अवधि में तनख्वाह का भुगतान नहीं किया जाता तो इस राशि पर केंद्र सरकार को साढ़े सात फीसदी के ब्याज का अतिरिक्त भुगतान भी करना होगा।

विभाग की गलती कॉन्स्टेबल नहीं भुगतेगा : बेंच ने कहा कि कर्मचारी लगातार संबंधित विभाग से अपनी जांच कराने के लिए आग्रह करता रहा, लेकिन उसकी जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित करने में तकरीबन एक साल का समय लग गया। इसमें कॉन्स्टेबल की गलती नहीं थी। विभाग को तत्काल मेडिकल बोर्ड गठित कर जांच करानी चाहिए थी, इसलिए सरकार व रेलवे तय समय के भीतर कॉन्स्टेबल को उसकी तनख्वाह दे।

यह है मामला : याचिकाकर्ता रेलवे सुरक्षा फोर्स में वर्ष 2012 में कॉन्स्टेबल के पद पर नियुक्त हुआ था। उस समय वह शारीरिकतौर पर स्वस्थ था। जून 2015 में उसको सुनने में दिक्कत होने लगी। उसने रेलवे अस्पताल में कानों की जांच कराई। इसके बाद ऑल इंडिया मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली में भी जांच हुई। दोनों जगह बताया गया कि उसके दाहिने कान में सुनने की क्षमता मध्यम स्तर की है, जबकि बाएं कान में यह क्षमता बेहद कम है।

कॉन्स्टेबल को आगे के कार्य की तैनाती के लिए मेडिकल बोर्ड गठित कर उसकी शारीरिक क्षमता के हिसाब से काम देने की सिफारिश की गई, लेकिन केन्द्र सरकार व संबंधित विभाग ने बोर्ड गठित करने में एक साल का समय खराब कर दिया। इस दौरान कॉन्स्टेबल को ड्यूटी भी नहीं मिली। इतना ही नहीं, उसका वेतन भी रोक दिया गया।

बोर्ड गठित करने में एक साल लग गया

एक साल बीत जाने पर जून 2016 में कॉन्स्टेबल के स्वास्थ्य की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया गया। बोर्ड ने रिपोर्ट में माना कि कॉन्स्टेबल अब सुरक्षा फोर्स में कार्य करने में सक्षम नहीं है। उसे अन्य कोई कार्य दिया जाए। रिपोर्ट के आधार पर कॉन्स्टेबल को बुकिंग क्लर्क का काम दिया गया, लेकिन जून 2015 से जून 2016 का वेतन नहीं दिया गया। इसके चलते कॉन्स्टेबल को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। कोर्ट ने यह फैसला रेलवे सुरक्षा फोर्स में तैनात एक कॉन्स्टेबल की याचिका को मंजूर करते हुए दिया।

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