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गाजियाबाद में आज तक सपा-बसपा को खाता खुलने का इंतजार

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सपा और बसपा आज तक कभी भी गाजियाबाद लोकसभा सीट से चुनाव नहीं जीती हैं, जबकि इस सीट (पहले हापुड़ लोकसभा) पर कांग्रेस की उपस्थिति हमेशा मजबूत रही। शुरुआती चुनावों में तो यहां से कांग्रेस के प्रत्याशी ही लोकसभा पहुंचते रहे। फिर देश के मूड के हिसाब से कांग्रेसी उम्मीदवार कभी जीते तो कभी हारे मगर राम मंदिर आंदोलन बाद से गाजियाबाद को भाजपा का गढ़ कहा जाने लगा है। साल 2004 को छोड़ साल 1991 से यहां कमल का फूल ही खिला है।

गठबंधन के प्रत्याशी सुरेंद्र कुमार मुन्नी के सामने इतिहास बदलने की चुनौती है। क्योंकि सपा हो या फिर बसपा, दोनों की पार्टियों के प्रत्याशियों ने कभी भी इस सीट पर दमदार प्रदर्शन नहीं किया है। मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही रहा।

लोकसभा चुनाव 2019 : सुरेंद्र शर्मा होंगे गाजियबाद से सपा के उम्मीदवार

वर्ष 2008 तक हापुड़ लोकसभा के नाम से जाने जानी वाली इस सीट पर साल 1957 में अस्तित्व में आई। वर्ष 1957 और 1962 में कांग्रेसी ही यहां से जीतकर दिल्ली गए मगर साल 1967 में निर्दलीय प्रत्याशी और आर्यसमाजी नेता प्रकाशवीर शास्त्री ने कांग्रेस के उम्मीदवार को हरा सबको चौंका दिया। साल 1971 में बीपी मौर्य ने फिर से यह सीट कांग्रेस की झोली में डाल दी। लेकिन, इमरजेंसी के बाद साल 1977 में हुए चुनाव में वह भारतीय लोकदल के प्रत्याशी महमूद अली खान से हार गए।

साल 1980 में कांग्रेस देश में जीती पर गाजियाबाद में हारी

साल 1980 में जब इंदिरा ने देश की राजनीति में जोरदार वापसी की पर गाजियाबाद के लोगों ने उनके प्रत्याशी पर भरोसा नहीं किया और जनता पार्टी (सेक्युलर) के उम्मीदवार अनवार को जिता दिया। इंदिरा की हत्या के बाद राजीव गांधी के नेतृत्व में जब पहली बार साल 1984 का चुनाव लड़ा गया तो गाजियाबाद के लोगों ने भी कांग्रेस के केदारनाथ सिंह को लोकसभा पहुंचाया। लेकिन बोफोर्स का मुद्दा उठा तो जनता दल के केसी त्यागी कांग्रेस प्रत्याशी को हरा लोकसभा गए। फिर लगातार चार बार डॉ. रमेश चंद तोमर भाजपा के प्रत्याशी के तौर पर जीतते रहे। साल 2004 में कांग्रेस के ही विधायक सुरेंद्र गोयल ने उन्हें हराया।

पिछले दो चुनाव से हाईप्रोफाइल हुई सीट

गाजियाबाद में भाजपा प्रत्याशियों की जीत का रिकॉर्ड देखते हुए पार्टी ने साल 2009 में राजनाथ सिंह को यहां से लड़ाया। फिर अगले चुनाव राजनीति में बिल्कुल नए जनरल वीके सिंह को यहां से उतारा। उनके खिलाफ कांग्रेस से राजबब्बर, सपा के सुधन रावत और बसपा के मुकुल उपाध्याय मैदान में थे। वीके सिंह ने रिकॉर्ड 5 लाख 67 हजार मतों से जीत दर्ज की और कांग्रेस के प्रत्याशी राज बब्बर समेत सभी की जमानत भी जब्त कर दी थी।

हापुड़ लोकसभा में गढ़ और हापुड़ विधानसभा भी थीं

हापुड़ लोकसभा में गाजियाबाद, मुरादनगर, मोदीनगर, हापुड़ और गढ़ मुक्तेश्वर विधानसभाएं शामिल थीं। साल 2008 में परिसीमन होने पर हापुड़ का कुछ हिस्सा मेरठ लोकसभा और कुछ भाग गाजियाबाद में आ गया। नई सीट गाजियाबाद लोकसभा में अभी भी पांच विधानसभाएं ही हैं मगर इनके नाम और भू-भाग बदल गए हैं। गाजियाबाद विधानसभा से अलग होकर साहिबाबाद विधानसभा, खेकड़ा से अलग होकर लोनी विधानसभा और हापुड़ से अलग होकर धौलाना विधानसभा बन गई हैं। साथ ही मोदीनगर विधानसभा बागपत में चली गई है। लोनी पहले खेकड़ा विधानसभा के रूप में बागपत लोकसभा का हिस्सा थी। इस तरह गाजियाबाद लोकसभा में अब गाजियाबाद, साहिबाबाद, मुरादनगर, धौलाना और लोनी विधान सभाएं हैं।

साल 2014 में किस प्रत्याशी को कितने वोट मिले

     नाम (पार्टी)                         प्राप्त मत

जनरल वीके सिंह (भाजपा)         7,58,482

राजबब्बर (कांग्रेस)                   1,91,222

मुकुल उपाध्याय(बसपा)            1,73,085

सुधन रावत(सपा)                     1,06,984

शाजिया इल्मी(आप)                 89,147

गाजियाबाद से अब तक चुने गए सांसद

वर्ष         सांसद                           पार्टी

2014      वीके सिंह                     भाजपा

2009     राजनाथ सिंह                भाजपा

2004   सुरेंद्र प्रकाश गोयल           कांग्रेस

1999   रमेश चंद तोमर               भाजपा

1998   रमेश चंद तोमर                भाजपा

1996   रमेश चंद तोमर                भाजपा

1991 रमेश चंद तोमर                  भाजपा

1989   केसी त्यागी                    जनता दल

1984   केदार नाथ सिंह                  कांग्रेस

1980   अनवार                   जनता पार्टी (सेक्युलर)

1977   महमूद अली खान             बीएलडी

1971   बीपी मौर्य                        कांग्रेस

1967   प्रकाशवीर शास्त्री               निर्दलीय

1962   कमला चौधरी                  कांग्रेस

1957   कृष्ण चंद्र शर्मा                 कांग्रेस

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  • Web Title:SP-BSP are waiting to open account in Ghaziabad Lok Sabha seat till now