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क्या हम आपातकाल लगा दें? केजरीवाल के लिए PIL पर क्यों भड़का HC, क्या थी ऐसी डिमांड

दिल्ली उच्च न्यायालय ने उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें न्यायिक हिरासत में जेल में बंद दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को जेल से सरकार चलाने की अनुमति देने की मांग की गई थी।

क्या हम आपातकाल लगा दें? केजरीवाल के लिए PIL पर क्यों भड़का HC, क्या थी ऐसी डिमांड
Subodh Mishraलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 08 May 2024 02:32 PM
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से जुड़ी एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में केजरीवाल से इस्तीफे की मांग करने और मीडिया में दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाने से जुड़ी खबरें चलाने से रोकने की मांग की गई थी। पेशे से वकील श्रीकांत प्रसाद द्वारा दायर याचिका में शराब नीति मामले में न्यायिक हिरासत में बंद केजरीवाल को जेल से सरकार चलाने की अनुमति देने की मांग की गई थी। इसमें केजरीवाल के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कैबिनेट मंत्रियों से बातचीत करने के लिए व्यवस्था करने की भी मांग की गई थी।

हाई कोर्ट की डिविजन बेंच जिसमें कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति मनमीत पीएस अरोड़ा शामिल हैं, ने जुर्माने लगाते हुए यह याचिका खारिज कर दी। याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि वह न तो मीडिया पर सेंसरशिप लगा सकती है और न ही किसी को केजरीवाल के इस्तीफे की मांग करने वाले बयान देने से रोक सकती है। अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा, क्या हम दिल्ली में आपातकाल लगा दें? हम ऐसा नहीं कर सकते हैं।   

याचिका में भाजपा दिल्ली के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा को केजरीवाल के इस्तीफे के लिए बयान देकर दबाव बनाने से रोकने और डीडीयू मार्ग पर आप कार्यालय के समझ  प्रदर्शन करने के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की भी मांग की गई थी। पीठ ने कहा कि चूंकि केजरीवाल ने ईडी द्वारा अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए पहले ही सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर कर दी है। शीर्ष अदालत उनकी अंतरिम रिहाई के मुद्दे पर विचार कर रही है। उन्हें वीसी के माध्यम से कैबिनेट मंत्रियों से बातचीत करने की अनुमति देने की जरूरत नहीं है। 

याचिका में कहा गया है कि पिछले 7 वर्षों से दिल्ली के शासन का शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में अच्छा ट्रैक रिकॉर्ड है। संविधान और न ही किसी कानून ने मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री सहित किसी भी मंत्री को जेल से सरकार चलाने से रोका है। याचिकाकर्ता ने कहा कि यदि कोई राजनीतिक व्यक्ति न्यायिक हिरासत में है तो यह आरपीए के तहत उल्लिखित दोषी की परिभाषा के अंतर्गत नहीं आएगा।

इस पर अदालत ने कहा, 'आप वकील हैं कि नहीं? क्या आपको लगता है कि अदालतें अनुच्छेद 226 के तहत सेंसरशिप लगाती हैं? आप प्रेस पर प्रतिबंध लगाने का आदेश मांग रहे हैं।' केंद्र सरकार की ओर से पेश एएसजी चेतन शर्मा ने कहा कि याचिका तथ्यात्मक और कानूनी रूप से गलत है। उन्होंने कहा कि परोक्ष उद्देश्यों से जनहित याचिका दायर की गई है। 

बता दें कि केजरीवाल को ईडी ने 21 मार्च की रात गिरफ्तार किया था। 10 अप्रैल को दिल्ली उच्च न्यायालय ने केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति स्वर्णकांत शर्मा की पीठ के उक्त आदेश को शीर्ष न्यायालय में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को कुछ प्रतिबंधों के साथ जमानत पर रिहा करने का संकेत दिया था।