ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News NCRदिल्ली में जहां-तहां मिलीं 50 लाशें, NCR में 100 से ज्यादा मौतें; गर्मी ने कहर बरपा दिया

दिल्ली में जहां-तहां मिलीं 50 लाशें, NCR में 100 से ज्यादा मौतें; गर्मी ने कहर बरपा दिया

दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद समेत पूरे एनसीआर में भीषण गर्मी ने कहर बरपा दिया है। 48 घंटे में 100 से ज्यादा मौतें हुई हैं। अस्पतालों में बड़ी संख्या में हीटस्ट्रोक के मरीज पहुंच रहे हैं।

दिल्ली में जहां-तहां मिलीं 50 लाशें, NCR में 100 से ज्यादा मौतें; गर्मी ने कहर बरपा दिया
Sudhir Jhaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीThu, 20 Jun 2024 09:21 AM
ऐप पर पढ़ें

दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद समेत पूरे एनसीआर में भीषण गर्मी ने कहर बरपा दिया है। 48 घंटे में एनसीआर के अस्पतालों में करीब 150 लाशें पहुंचीं हैं, जिनमें से अधिकतर की मौत लू की वजह से होने की आशंका व्यक्त की गई है। जान गंवाने वाले अधिकतर लोग ऐसे हैं जिनके पास अपना घर या गर्मी से निजात पाने के इंतजाम नहीं हैं। हालत यह है कि अस्पतालों में लाशों को रखने के लिए फ्रीजर की कमी हो गई है। कुछ वैसी ही स्थिति बन गई है जैसी कोरोना की दूसरी लहर के दौरान थी। पुलिस ने कहा कि उसे सुरक्षा गार्डों, भिखारियों या बेघर लोगों की अस्वभाविक मौतों के संबंध में फोन पर सूचना मिल रही है। 

दिल्ली में 50 लाशें बरामद
दिल्ली में पिछले 48 घंटों के दौरान अलग-अलग इलाकों से 50 लोगों के शव बरामद किए गए। इनमें से अधिकतर बेघर हैं। हालांकि, पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है कि क्या सभी की मौत गर्मी से संबंधित कारणों से हुई। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि बुधवार को इंडिया गेट के निकट बच्चों के पार्क में 55 वर्षीय एक व्यक्ति का शव मिला। उन्होंने बताया कि मौत के कारण का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम कराया जाएगा। बेघर लोगों के लिए काम करने वाले एक गैर सरकारी संगठन ‘सेंटर फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट’ ने दावा किया है कि 11 से 19 जून के बीच दिल्ली में भीषण गर्मी के कारण 192 बेघर लोगों की मौत हुई।

1969 के बाद ऐसी गर्मी
भीषण गर्मी का प्रकोप जारी रहने के चलते ‘लू’ लगने से जान गंवाने वाले लोगों और यहां अस्पतालों में इससे पीड़ित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। गंभीर जल संकट से जूझ रही दिल्ली में अधिकतम तापमान सामान्य से चार डिग्री अधिक 43.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शहर में न्यूनतम तापमान 35.2 डिग्री सेल्सियस रहा जो 1969 के बाद जून में सबसे अधिक है।

राम मनोहर लोहिया में 5 मौतें, एक दर्जन की हालत गंभीर
केंद्र द्वारा संचालित राममनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में पिछले दो दिन में 22 मरीज लाए गए। अस्पताल में पांच मौतें हुई हैं और 12 से 13 मरीज जीवनरक्षक प्रणाली पर हैं। अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'पीड़ितों को कोई अन्य बीमारी नहीं थी। जब ऐसे लोग अस्पताल आते हैं, तो उनके शरीर का तापमान दर्ज किया जाता है और यदि यह 105 डिग्री फारेनहाइट से अधिक पाया जाता है तथा कोई अन्य कारण नहीं होता है, तो उन्हें लू से पीड़ित मरीज घोषित कर दिया जाता है।' उन्होंने बताया, 'लू के कारण मरने वालों को हीटस्ट्रोक का संदिग्ध मामला घोषित किया जाता है। दिल्ली सरकार की एक समिति है जो बाद में मौतों की पुष्टि करती है।'

सफदरजंग और एलएनजेपी में भी कई मौतें
सफदरजंग अस्पताल में लू लगने से बीमार होने के कुल 60 मरीज आए, जिनमें से 42 को भर्ती किया गया। अस्पताल ने छह लोगों की मौत की सूचना दी है, जिसमें 60 वर्षीय एक महिला और 50 वर्षीय एक पुरुष शामिल हैं, जिनकी मंगलवार को मौत हो गई। लोकनायक जयप्रकाश (एलएनजेपी) अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, पिछले दो दिन में हीटस्ट्रोक के कारण चार मरीजों की मौत हो गई है। अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया, 'मंगलवार को संदिग्ध हीटस्ट्रोक के कारण दो मौतें हुईं और बुधवार को भी दो लोग हताहत हुए। हीटस्ट्रोक के 16 मरीज भर्ती हैं।' पीड़ितों में से एक की 15 जून को इलाज के दौरान मौत हो गई। उसकी उम्र करीब 39 साल थी, वह एक मोटर मैकेनिक था, जो जनकपुरी में अपनी दुकान पर काम करते समय बेहोश हो गया था। जब उसे अस्पताल लाया गया था तो वह तेज बुखार से जूझ रहा था।

सर गंगाराम में हर दिन 30-35 मरीज
दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में प्रतिदिन ओपीडी में हीटस्ट्रोक के 30 से 35 मामले सामने आ रहे हैं। अस्पताल के आंतरिक चिकित्सा विभाग के अध्यक्ष डॉ. अतुल कक्कड़ ने कहा, 'ओपीडी में, चिकित्सा सुविधाएं गर्मी से होने वाली बीमारियों से संबंधित साप्ताहिक 30 से 35 मामलों की रिपोर्ट कर रही हैं। इनमें मांसपेशियों में ऐंठन और थकावट जैसी स्थितियां शामिल हैं।'

नोएडा में 48 घंटे में 24 मौतें
गौतमबुद्ध नगर में बुधवार को भी भीषण गर्मी का दौर जारी रहा। इस बीच 15 लोगों की मौत हो गई। पुलिस और स्थानीय लोगों ने उनको लू लगने की आशंका जताई है। इन शवों को पुलिस अलग-अलग स्थानों से लाई थी। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने इससे इनकार किया है। वहीं, मंगलवार को नौ लोगों की मौत हो गई थी। उनको भी लू लगने की आशंका जताई गई थी। जिला अस्पताल में चार लोगों को इलाज के लिए लाया गया था, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। 10 से 15 ऐसे शवों का पोस्टमार्टम किया गया, जिनकी मौत कार्डियक अरेस्ट और अन्य बीमारियों से हुई थी। आम तौर पर बीमारी से मौत की हालत में पोस्टमार्टम नहीं किया जाता है। ये मौतें भी संदिग्ध थीं। यही कारण है कि इन शवों का पोस्टमार्टम किया गया। इनमें से कई को पुलिस अलग-अलग अस्पतालों में इलाज के लिए ले गई थी।

गाजियाबाद में 24 घंटे में 15 मौतें
भीषण गर्मी में खुले आसमान के नीचे चलना खतरे से खाली नहीं है। 24 घंटों में दो सरकारी अस्पतालों में लाए गए 15 लोगों की मौत हो गई। आशंका जताई कि लू लगने से मौत हुई है। सरकारी अस्पतालों में कोरोना काल की तरह हाहाकार मचा है। पिछले 24 घंटे में 15 लोगों को एमएमजी और संयुक्त अस्पताल की इमरजेंसी में तैनात चिकित्सकों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। इन मरीजों को पुलिस और एंबुलेंस सेवा के माध्यम से अस्पताल लाया गया था। एमएमजी अस्पताल की इमरजेंसी में मंगलवार देर रात वैशाली सेक्टर-3 से 60 वर्षीय अज्ञात पुरुष, साहिबाबाद रेलवे स्टेशन से 65 वर्षीय अज्ञात पुरुष, चौधरी मोड़ से 50 वर्षीय अज्ञात पुरुष, शालीमार गार्डन से 40 वर्षीय अज्ञात पुरुष को एंबुलेंस कर्मचारी लेकर पहुंचे। जहां सभी को जांच के बाद मृत घोषित कर दिया गया। इसी तरह गाजियाबाद रेलवे स्टेशन से 40 वर्षीय नरेश, छपरौला से 49 वर्षीय लोकेंद्र चौहान और कौशांबी से 50 वर्षीय कनोहरी को पुलिस इमरजेंसी में लकेर पहुंची। उन्हें भी चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।

फरीदाबाद में एक ही अस्पताल पहुंचे 31 शव
कोरोना काल के बाद एक बार फिर फरीदाबाद के विभिन्न इलाकों में मरने वालों का आंकड़ा अचानक से बढ़ गया है। बीते 24 घंटे में बीके अस्पताल में बने शवगृह में करीब 31 शव पहुंचाए गए। अस्पताल के शवगृह में एक साथ इतने शव रखने की जगह नहीं है, इसलिए शवगृह के बाहर ही इन्हें रखा गया है। इससे पहले कोरोना काल में मई-2021 में एक दिन में करीब 38 शवों का अंतिम संस्कार किया गया था। अब आलम यह है कि इन शवों को सड़ने से बचाने के लिए बीके अस्पताल के शवगृह में डीप फ्रीजर की कमी हो गई। शवगृह के अंदर और उसके बाद बाहर शव रखे हुए हैं। बीके अस्पताल में काम करने वाले सामाज सेवियों ने इन मरने वालों में से अधिकांश की मौत गर्मी की वजह से होने की आशंका व्यक्त की है। गर्मी की वजह से खुले में रखे शव जल्द सड़ रहे हैं। इससे आसपास बदबू भी हो गई है।

24 घंटे में अचानक से बढ़ी संख्या बीके अस्पताल के शवगृह में सामान्य तौर पर रोजाना 10 से 12 शव पोस्टमार्टम के लिए आते हैं। इनमें से तीन से चार अज्ञात शव भी होते हैं। इन अज्ञात शवों का पोस्टमार्टम 72 घंटे प्रतीक्षा करने के बाद किया जाता है। यदि इस दौरान कोई नहीं आता है तो उसका पोस्टमॉर्टम करके अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया जाता है। 24 घंटे में अज्ञात शवों की अचानक बढ़ गई है। इस दौरान विभिन्न थाना क्षेत्रों की पुलिस 12 अज्ञात शव लेकर पहुंची है। इसके अलावा 19 शव विभिन्न दिमाग की नस फटने, हार्ट अटैक, विभिन्न बीमारी, शराब अधिक पीने सहित कई कारणों से मरने वालों के शव पहुंचे हैं। बीके अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार 12 अज्ञात के अलावा दो सड़क दुर्घटना में मरने वालों के शव पहुंचे हैं।

(पीटीआई और हिन्दुस्तान इनपुट)