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दिल्ली में तेंदुए की खोजबीन तीसरे दिन भी जारी; हाईकोर्ट ने पूछा- हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?

दिल्ली में एक तेंदुआ तीन दिन से वन विभाग और पुलिस की टीमों को परेशान कर रखा है। वहीं हाईकोर्ट ने असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य में वॉक विद वाइल्ड लाइफ कार्यक्रम के आयोजन पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

दिल्ली में तेंदुए की खोजबीन तीसरे दिन भी जारी; हाईकोर्ट ने पूछा- हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?
Krishna Singhलाइव हिंदुस्तान,नई दिल्लीWed, 06 Dec 2023 12:05 AM
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दिल्ली के नेब सराय इलाके में तेंदुए की लगातार तीसरे दिन मंगलवार को भी खोजबीन जारी रही। वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि टीमें इलाके में तैनात हैं लेकिन तेंदुआ नहीं नजर आया है। उप वन संरक्षक (दक्षिण संभाग) मनदीप मित्तल ने कहा कि वन विभाग की टीमें इलाके में तेंदुए की खोजबीन कर रही हैं। तेंदुआ शनिवार शाम से नहीं नजर आया है। लगता है कि तेंदुआ वन में वापस चला गया है। तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया गया है। 

लगातार तीसरे दिन तलाशी अभियान
वहीं दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस, वन विभाग, वेस्टर्न एवेन्यू रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और गैर सरकारी संगठन (बेल ए टेल) की संयुक्त टीम ने इलाके में एक घंटे तक तलाशी अभियान चलाया लेकिन सफलता नहीं हाथ लगी। तेंदुआ एक फार्महाउस के पास शुक्रवार रात और शनिवार सुबह नजर आया था। 

ड्रोन के जरिए तलाशी अभियान
अधिकारियों ने कहा कि इलाके में तीन तरफ से निकास बंद कर दिया गया है। इलाके में केवल जंगल की ओर जाने वाला ही खुला हुआ है। वन विभाग की टीमों ने ड्रोन के जरिए तलाशी अभियान चलाया था, लेकिन तेंदुआ तीन दिन से कहीं नजर नहीं आया है। ऐसा लग रहा है कि तेंदुआ अरावली के जंगलों में वापस चला गया है। फिर भी टीमें सतर्क हैं।

अभयारण्य में हादसा हुआ तो कौन जिम्मेदार होगा
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को दक्षिणी रिज में असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य में वॉक विद वाइल्ड लाइफ कार्यक्रम के आयोजन पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने अभयारण्य के अंदर लोगों की सुरक्षा के संबंध में अपनी चिंता दोहराई है। पीठ ने यह भी कहा कि अगर किसी व्यक्ति को चोट लगी तो क्या होगा? इस कार्यक्रम में बच्चे भी हो सकते हैं।

ऐसा नहीं कह सकते कि तेंदुआ लोगों को छोड़ देगा
पीठ ने कहा कि अभयारण्य 8-9 तेंदुओं के साथ-साथ लकड़बग्घे और सियार जैसे जंगली जानवरों का घर है। पीठ ने कहा कि तेंदुआ एक शर्मीला जानवर नहीं है जो लोगों से सामना होने पर उन्हें छोड़ देगा। ऐसे में वन विभाग को ही सावधानी बरतने की सलाह दी जा सकती है। ज्ञात रहे कि वन विभाग के इस कार्यक्रम का आयोजन 9 व 10 दिसंबर को होना है।

अभी तक पकड़ से बाहर है तेंदुआ
एमिक्स क्यूरी अधिवक्ता गौतम नारायण व आदित्य एन प्रसाद ने तर्क दिया कि असोला भाटी के अंदर कोई मानवीय गतिविधि नहीं हो सकती, जो एक संरक्षित क्षेत्र है। पीठ को सूचित किया गया है कि अभयारण्य से भटका हुआ तेंदुआ जिसे पिछले सप्ताह सैनिक फार्म में देखा गया था अभी तक पकड़ा नहीं गया है। 

क्या लोगों को शिक्षित करने का कोई अन्य तरीका नहीं
अधिवक्ता गौतम नारायण ने कहा कि वे वह तेंदुआ को पकड़ने में असमर्थ हैं। लेकिन वह चाहते हैं कि लोग रिज में 16 किलोमीटर के ट्रेक पर चलें। उन्होंने कहा कि हम जबरन वन्यजीवों के लिए बने क्षेत्र पर अतिक्रमण कर रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या लोगों को पशु संपदा के बारे में शिक्षित करने का कोई अन्य तरीका नहीं है।

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