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दक्षिणी निगम के वेतन पर खर्च पर दिल्ली हाईकोर्ट ने जताई हैरानी, कहा- कामकाज के मुकाबले सैलरी पर खर्च बहुत ज्यादा

नई दिल्ली। पीटीआई Published By: Praveen Sharma
Tue, 03 Aug 2021 05:38 PM
दक्षिणी निगम के वेतन पर खर्च पर दिल्ली हाईकोर्ट ने जताई हैरानी, कहा- कामकाज के मुकाबले सैलरी पर खर्च बहुत ज्यादा

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि दक्षिण दिल्ली नगर निगम (SDMC) द्वारा कर्मचारियों को दिया जा रहा वेतन भुगतान उसके कामकाज के मुकाबले बहुत ज्यादा है और यह बिल्कुल तार्किक नहीं है। हाईकोर्ट ने निगम से यह भी पूछा कि क्या कर्मचारियों की बायोमिट्रिक उपस्थिति उनके आधार कार्ड से लिंक है।

हाईकोर्ट ने कहा कि जब नगर निगम सफाई और विकास के बहुत ज्यादा कार्य नहीं कर रहा है, ऐसे में वह कर्मचारियों को इतना ज्यादा वेतन भुगतान कैसे कर सकता है।

जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस जसमीत सिंह की बेंच ने सवाल किया, ''क्या एमसीडी में बायोमिट्रिक हाजिरी प्रणाली लागू है? क्या आपने उसे आधार के साथ लिंक किया है? क्या उनके लोकेशन का पता लगाने के लिए जियो टैगिंग की जा रही है?

एसडीएमसी की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि निगम में बायोमिट्रिक हाजिरी प्रणाली लागू है और उसके आधार से लिंक होने तथा जियो टैगिंग के बारे में वह पता करेंगे। निगम के वकील दिव्य प्रकाश पांडे ने कहा कि इस संबंध में स्थानीय निकाय द्वारा उठाए गए कदमों को लेकर वह हलफनामा दायर करेंगे।

उन्होंने हाईकोर्ट को बताया कि निगम के मासिक खर्च में 214 करोड़ रुपये वेतन पर और 30 करोड़ रुपये पेंशन पर खर्च होते हैं। बेंच ने कहा कि नगर निगम का काम सिर्फ वेतन भुगतान करना नहीं है, बल्कि सफाई और विकास कार्य करना भी है।

बेंच ने कहा कि यदि आप देश या विदेश में दूसरों की तुलना में अपना खर्च देखते हैं, तो आप वेतन पर असामान्य रूप से अधिक खर्च कर रहे हैं जो साफ-सफाई के आपके मूल कामकाज को देखते हुए उचित नहीं है। आपको यह देखने की जरूरत है कि क्या आप ओवरस्टाफ हैं और वेतन का भुगतान कर रहे हैं। बेंच ने कहा, "हम चाहते हैं कि आप चलें, हम आपको लाठी दे रहे हैं, लेकिन आपको इसे बैसाखी नहीं बनाना चाहिए। 

कोर्ट की सलाह पर एसडीएमसी ने कहा कि वह समीक्षा कर रहे हैं कि क्या निगम में कर्मचारियों की संख्या आवश्यकता से अधिक है। बेंच ने कहा कि घोस्ट कर्मचारियों से हर कोई वाकिफ है, जहां लोग घर बैठे अपनी तनख्वाह का लुत्फ उठा रहे हैं। इसे भयावह बताते हुए बेंच ने कहा कि अदालत को निगम को अपने काम के बारे में बताने की जरूरत नहीं है।

कोर्ट ने इस मामले को अब 11 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है जब शिक्षकों, अस्पताल कर्मचारियों, सफाई कर्मचारियों और इंजीनियर आदि के वेतन और पेंशन का भुगतान नहीं होने संबंधी अन्य याचिकाओं पर विचार किया जाएगा।

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