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राष्ट्रीय परियोजना प्रभावित हो रही और पैसा विज्ञापन पर खर्च हो रहा...केजरीवाल सरकार से SC क्यों हुआ नाराज

दिल्ली की केजरीवाल सरकार से सुप्रीम कोर्ट नाराज हो गया है। कोर्ट ने कहा कि इस परियोजना के लिए धन मुहैया कराने के आदेश का आंशिक रूप से पालन करने का कोई औचित्य नहीं है, पूर्ण रूप से पालन होना चाहिए।

राष्ट्रीय परियोजना प्रभावित हो रही और पैसा विज्ञापन पर खर्च हो रहा...केजरीवाल सरकार से SC क्यों हुआ नाराज
Sneha Baluniहिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 29 Nov 2023 07:29 AM
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के लिए दिल्ली सरकार द्वारा अपने हिस्से का पूरा धन मुहैया न कराने पर नाराजगी जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस परियोजना के लिए धन मुहैया कराने के आदेश का आंशिक रूप से पालन करने का कोई औचित्य नहीं है, इसका पूर्ण रूप से पालन किया जाए। जस्टिस संजय किशन कौल और सुधांशु धूलिया की पीठ ने यह टिप्पणी तब की, जब दिल्ली सरकार ने कहा कि उसने 415 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है। पीठ ने कहा कि आदेश के तहत पूरी रकम का भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

पैसा देना सरकार की जिम्मेदारी जस्टिस कौल ने कहा कि 'समस्या यह है कि दिल्ली सरकार पर उस पैसे के भुगतान के लिए अदालत को दबाव बनाना पड़ रहा है, जो पैसा देना उसकी जिम्मेदारी है।' पीठ ने दिल्ली सरकार से कहा कि आपको हर हाल में इस परियोजना के लिए अपने हिस्से का पैसा देना होगा। इसके साथ ही पीठ ने मामले की सुनवाई 7 दिसंबर तय कर दी है।

अदालत ने कड़ा रुख अख्तियार किया 

शीर्ष अदालत ने पिछली सुनवाई पर अलवर और पानीपत से जोड़ने के लिए प्रस्तावित रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम की परियोजनाओं के लिए धन मुहैया नहीं कराने पर दिल्ली सरकार को आड़े हाथ लिया था। साथ ही कहा था कि ‘राष्ट्रीय परियोजना प्रभावित हो रही है और पैसा विज्ञापन पर खर्च हो रहा है।’ पीठ ने इस मामले में कड़ा रूख अख्तियार करते हुए दिल्ली सरकार को विज्ञापन मद से 418 करोड़ आरआरटीएस परियोजना के लिए स्थानांतरित करने का आदेश दिया है।

‘देय राशि का तुरंत भुगतान किया जाए’

बीते अप्रैल मे सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से उल्लेख किया था कि दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर, दिल्ली-अलवर कॉरिडोर और दिल्ली-पानीपत कॉरिडोर के समय पर कार्यान्वयन के लिए दिल्ली सरकार द्वारा देय शेष राशि का तुरंत भुगतान किया जाना था। पीठ ने कहा था कि मामले में पेश जानकारी से पता चलता है कि विज्ञापन के लिए तीन साल का बजटीय प्रावधान 1100 करोड़ रुपये था, जबकि इस वित्तीय वर्ष में भी इस मद में 550 करोड़ रुपए रखा गया है। धन की कमी से आरआरटीएस जैसी राष्ट्रीय परियोजनाएं प्रभावित होती है और हम यह कहने को इच्छुक होंगे कि पैसे को बुनियादी ढांचे में लगाया जाए।

यह है मामला

सार्वजनिक परिवहन को सुगम बनाने के लिए आरआरटीएस महत्वाकांक्षी परियोजना है। इसमें सेमी-हाई स्पीड रेल कॉरिडोर शामिल है, जो दिल्ली को मेरठ, अलवर और हरियाणा के पानीपत से जोड़ेगा। इसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम बना रहा है। एनसीआरटीएस केंद्र और संबंधित राज्यों के बीच एक संयुक्त उद्यम है। दिल्ली-मेरठ परियोजना पहले से ही निर्माणाधीन है और इस कोरिडोर के लिए दिल्ली सरकार अपने हिस्से के रूप में 1,180 करोड़ का भुगतान करने पर सहमत हो गई थी। मगर बाकी कॉरिडोर के लिए दिल्ली सरकार ने धन की कमी का हवाला देते हुए अपने हिस्से का धन मुहैया कराने से इनकार कर दिया था।

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