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रोहिणी कोर्ट शूटआउट : वो अंधाधुंध फायरिंग कर रहे थे, जिंदा पकड़ पाना नामुमकिन था...

नई दिल्ली | प्रमुख संवाददाताPublished By: Praveen Sharma
Sun, 26 Sep 2021 02:46 PM
रोहिणी कोर्ट शूटआउट : वो अंधाधुंध फायरिंग कर रहे थे, जिंदा पकड़ पाना नामुमकिन था...

रोहिणी कोर्ट में शुक्रवार को हुई शूटआउट घटना की आंखों देखी पूरी कहानी एफआईआर के रूप में एक एसआई ने प्रशांत विहार थाने में दर्ज कराई है। दिल्ली पुलिस की थर्ड बटालियन में तैनात सब इंस्पेक्टर (एसआई) वीर सिंह ने टीम के साथ कार्रवाई करते हुए बदमाशों को ढेर कर दिया था। एसआई के अनुसार, बदमाश अंधाधुंध फायरिंग कर रहे थे और ऐसे में उन्हें पकड़ना नामुमकिन था। आइए, एफआईआर से जानते हैं कि तब क्या हुआ था।

वीर सिंह के अनुसार, मेरा काम अलग-अलग जेलों से अंडर ट्रायल कैदियों को अलग-अलग कोर्ट में पेश करना है। 24 सितंबर को मेरी ड्यूटी इंस्पेक्टर इंद्रलाल के साथ मुलजिम जितेंद्र उर्फ गोगी को तिहाड़ जेल से रोहिणी कोर्ट में पेश करने की थी। मुलजिम को पेश करने के दौरान एसआई राजेंद्र, एसआई सुनील, सिपाही जगदीश, सिपाही कमांडो अमित, सिपाही विवान भी साथ थे। सुबह 10 बजे दो मुलजिमों को तिहाड़ जेल से सरकारी गाड़ियों में बैठाकर थर्ड बटालियन गार्ड की कस्टडी में रोहिणी कोर्ट परिसर खारजा में बंद किया गया। एक मुलजिम अशरफ को कोर्ट नंबर 304 में पेश करने के बाद वापस खारजा में बंद कर दिया गया।

दोपहर करीब एक बजकर 10 मिनट पर गोगी को कोर्ट नंबर 207 में पेशी के लिए पहुंचाया गया। एक रात पहले ही जिला पुलिस, स्पेशल सेल को गोगी की पेशी की सूचना दी गई थी। वीर सिंह के अनुसार, गोगी को कोर्ट नंबर 207 में पेश किया गया और सुरक्षा के मद्देनजर अन्य कर्मियों को कोर्ट रूम के आसपास तैनात किया गया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गगन दीप सिंह कोर्ट की सुनवाई में व्यस्त थे। कोर्ट रूम में कोर्ट कर्मियों के अलावा पांच से छह वकील भी थे। अचानक वकील की वेशभूषा में कुर्सियों पर बैठे दो व्यक्ति उठे और हथियार निकालकर गोगी को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरू कर दीं। जब तक हम जवाबी कार्रवाई कर पाते, तब तक गोगी को कई गोलियां लग चुकी थीं। दोनों संदिग्ध हथियार लेकर अंधाधुंध गोलियां चला रहे थे। लिहाजा, उन्हें पकड़ना संभव नहीं था। एसआई के मुताबिक, अगर वकील की वेशभूषा में आए बदमाशों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई नहीं की जाती तो कई निर्दोष लोगों की जान जा सकती थी।

जरा सी चूक पर किसी की भी जान जा सकती थी

एसआई के अनुसार, कोर्ट रूम में जज साहब, अन्य कर्मी व वकील भी मौजूद थे। जरा सी चूक पर किसी की भी जान जा सकती थी, इसलिए सभी की सुरक्षा और जान-माल की हिफाजत के लिए तुरंत मैंने, कमांडो सिपाही शक्ति और सिपाही चिराग ने कार्रवाई की। हमने अपने हथियार से उन बदमाशों पर तुरंत गोली चला दी। उस दौरान वहां पर अन्य सुरक्षा कर्मी भी पहुंच गए और उन्होंने भी कार्रवाई की।

घटना के बाद कंट्रोल रूम को दी थी सूचना

घटना के बाद मैंने इंस्पेक्टर इंद्रलाल साहब के कहने पर तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी। इसके बाद गोगी को घायल अवस्था में पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।

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