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रिलायंस-डीएमआरसी विवाद : मेट्रो को 1000 करोड़ जमा कराने की अनुमति मिली

प्रमुख संवाददाता, नई दिल्लीShivendra Singh
Mon, 06 Dec 2021 06:02 PM
रिलायंस-डीएमआरसी विवाद : मेट्रो को 1000 करोड़ जमा कराने की अनुमति मिली

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रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ चल रहे विवाद के मामले में हाईकोर्ट ने सोमवार को दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) को 48 घंटे के भीतर एस्क्रो खाते में 1000 करोड़ रुपये जमा कराने की अनुमति दे दी। इससे पहले, डीएमआरसी ने न्यायालय को बताया कि वह फिलहाल 1000 करोड़ रुपये जमा करा देगा। यह मामला एयरपोर्ट मेट्रो लाइन के निर्माण को लेकर रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की सहायक कंपनी दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड (डीएएमईपीएल) के पक्ष में 4,600 करोड़ रुपये से अधिक के मध्यस्थ पुरस्कार (आर्बिट्रेशन अवॉर्ड) से जुड़ा हुआ है।

जस्टिस सुरेश कैत के समक्ष डीएमआरसी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पुरस्कार राशि की सीमा तक रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के सहायक के ऋण की जिम्मेदारी लेने को तैयार है। मेहता ने कहा कि चूंकि डीएमआरसी खुद वित्तीय संकट का सामना कर रही है, ऐसे में अचानक इतनी बड़ी देनदारी आने पर सार्वजनिक हित प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि डीएमआरसी के सक्षम अधिकारी समस्या का हल निकालने पर काम कर रहे हैं। डीएमआरसी ने न्यायालय को बताया कि उसके हिसाब से लगभग पांच हजार करोड़ रुपये की ही उसकी देनदारी बनती है जो कि याचिकाकर्ता कंपनी डीएएमईपीएल के दावे से काफी कम है।

दिल्ली मेट्रो की ओर से मेहता ने कहा कि हम सभी संभावनाओं पर काम कर रहे हैं। यदि हमें रुपये का भुगतान भी करना होगा तो हमें बैंकों से कर्ज लेने होंगे। डीएमआरसी ने कहा है कि ऐसे में वह डीएएमईपीएल के कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी ले सकती है। हाईकोर्ट रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की सहायक कंपनी डीएएमईपीएल की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। डीएएमईपीएल ने 2017 के मध्यस्थता पुरस्कार की राशि ब्याज सहित दिलाने की मांग की है। कंपनी ने याचिका में लगभग 7000 करोड़ रुपये की मांग की है। डीएएमईपीएल ने एयरपोर्ट मेट्रो लाइन का निर्माण और परिचान किया था, लेकिन बाद में अपने आपको इस लाइन पर मेट्रो के परिचालन से अलग कर लिया।

इस मामले में मध्यस्थता के बाद डीएमआरसी को 4600 करोड़ से अधिक रुपये डीएएमईपीएल को भुगतान करने को कहा गया था। याचिकाकर्ता कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि डीएमआरसी को पहले अवॉर्ड रकम का 50 फीसदी जमा कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल का 7000 करोड़ रुपये बनता है। इसके बाद न्यायालय ने मामले की सुनवाइ 22 दिसंबर तक स्थगित करते हुए डीएमआरसी को यह बताने के लिए कहा है कि उसके हिसाब से कितनी रकम की देनदारी बनती है।

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