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नाबालिग लड़की पर तेजाब फेंक खुद लगा पीने, दिल्ली में रेप के आरोपी की मौत

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि उसके पड़ोसी प्रेम सिंह के खिलाफ पहले से ही बलात्कार का मामला दर्ज है। वो अपने परिवार में एक शादी के कारण अंतरिम जमानत पर बाहर था।

नाबालिग लड़की पर तेजाब फेंक खुद लगा पीने, दिल्ली में रेप के आरोपी की मौत
Devesh Mishraएजेंसी,नई दिल्लीThu, 07 Dec 2023 11:11 PM
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राजधानी दिल्ली से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। गुरुवार को एक 54 साल का शख्स एक नाबालिग लड़की के ऊपर तेजाब फेंक दिया। आरोपी लड़की का पड़ोसी था। पुलिस ने बताया कि 17 साल की लड़की पर प्रेम सिंह नाम के व्यक्ति ने तेजाब से हमला कर दिया। इस घटना के बाद आरोपी की मौत हो गई। 

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि उसके पड़ोसी प्रेम सिंह के खिलाफ पहले से ही बलात्कार का मामला दर्ज है। वो अपने परिवार में एक शादी के कारण अंतरिम जमानत पर बाहर आया था।

पुलिस ने गुरुवार को बताया कि आज सुबह लगभग साढ़े सात बजे आरोपी प्रेम सिंह ने पीड़िता को उसके खिलाफ दर्ज बलात्कार का मामला वापस लेने की धमकी दी। जब शिकायतकर्ता ने ऐसा करने से इनकार कर दिया तब उसने उस पर तेजाब फेंक दिया। नाबालिग लड़की पर तेजाब फेंकने के बाद आरोपी खुद भी तेजाब पीने लगा। 

इस घटना के बाद नाबालिग लड़की और आरोपी दोनों को दिल्ली के डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया। तेजाब पीने से प्रेम सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी हॉस्पिटल में मौत हो गई। वहीं नाबालिग लड़की को मामूली चोटें आईं और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

वहीं एक दूसरी खबर में दिल्ली उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को नाबालिगों और वयस्कों से संबंधित यौन उत्पीड़न के मामलों की संख्या और सुनवाई की स्थिति के बारे में बताने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति राजीव शकधर और न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया की पीठ ने अधिकारियों से वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) का स्थान, प्रत्येक ओएससी में प्रदान की जाने वाली सुविधाएं और तैनात श्रमबल तथा वहां तैनात कर्मियों द्वारा किए जाने वाले कार्य के बारे में बताने के लिए भी कहा।

ओएससी का गठन परिवार, समुदाय और कार्यस्थल पर हिंसा से प्रभावित महिलाओं को सहायता प्रदान करने के लिए किया गया है। उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार से एक नया हलफनामा दाखिल कर यौन उत्पीड़न पर प्राप्त शिकायतों की संख्या पर वास्तविक स्थिति बताने को कहा, जिन्हें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत प्राथमिकी में बदल दिया गया।  

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