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Hindi News NCRभूमिगत जल को विषैला बना रही रेन वाटर हार्वेस्टिंग, NGT को सौंपी गई 176 सोसाइटियों की सर्वे रिपोर्ट

भूमिगत जल को विषैला बना रही रेन वाटर हार्वेस्टिंग, NGT को सौंपी गई 176 सोसाइटियों की सर्वे रिपोर्ट

डीपीसीसी ने कहा कि 176 में से 103 सोसाइटियों के वर्षा जल संचयन पिट से पानी के नमूने लिए गए। जांच में इन गड्ढों में जमा पानी एवं मिट्टी में कोलीफार्म बैक्टीरिया और अमोनिकल नाइट्रोजन मिला।

भूमिगत जल को विषैला बना रही रेन वाटर हार्वेस्टिंग, NGT को सौंपी गई 176 सोसाइटियों की सर्वे रिपोर्ट
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Praveen Sharmaनई दिल्ली। प्रभात कुमारSat, 22 Jun 2024 06:30 AM
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दिल्ली की ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों में लगे वर्ष जल संचयन (आरडब्ल्यूएच) उपकरण बारिश का पानी बचा तो रहे हैं, लेकिन इससे भूजल दूषित हो रहा है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को सौंपी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।

डीपीसीसी ने कहा है कि वर्षा जल बचाने के लिए बनाए गए गड्ढे का डिजाइन दोषपूर्ण होने से इसमें सीवेज का पानी मिल रहा है, इससे भूजल दूषित हो रहा है। डीपीसीसी ने द्वारका में 176 ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों में लगे वर्षा जल संचयन उपकरणों के सर्वे के आधार पर रिपोर्ट तैयार की है। एनजीटी प्रमुख जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की अगुवाई वाली बेंच को डीपीसीसी ने रिपोर्ट सौंपी है। डीपीसीसी ने महेश चंद्र सक्सेना की याचिका पर रिपोर्ट दी है।

कोलीफार्म बैक्टीरिया मिला : डीपीसीसी ने कहा कि 176 में से 103 सोसाइटियों के वर्षा जल संचयन पिट से पानी के नमूने लिए गए। जांच में इन गड्ढों में जमा पानी एवं मिट्टी में कोलीफार्म बैक्टीरिया और अमोनिकल नाइट्रोजन मिला। अमोनिकल नाइट्रोजन की मौजूदगी के लिए मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों के अपघटन और पशु अपशिष्ट या सीवेज को जिम्मेदार है। संयुक्त टीम (दिल्ली जल बोर्ड भी शामिल) द्वारा एकत्र किए गए अधिकांश नमूने गैर-बरसात के मौसम में लिए गए थे। रिपोर्ट में कहा गया कि आरडब्ल्यूएच गड्ढों में भरा पानी वर्षा जल नहीं हो सकता है, इसमें मानवीय गतिविधियों से निकलने वाला अपशिष्ट सोसायटियों के जल निकासी के माध्यम से आपस में मिल जाता है।

ऐसे दूषित हो रहा भूजल

डीपीसीसी ने दिल्ली जल बोर्ड की एक पुरानी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि भूजल के दूषित होने का मुख्य कारण रिचार्ज बोरवेल पाइपों का मौजूदा भूजल स्तर तक पहुंच जाना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आदर्श रूप से रिचार्ज बोरवेल पाइप की गहराई को भूजल स्तर से काफी ऊपर रखा जाना चाहिए।

सुधारात्मक कदम उठाएं

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इस रिपोर्ट पर गंभीर चिंता जताई है और डीपीसीसी को आदेश दिया कि वह दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) को इस बारे में विस्तृत जानकारी दे। साथ ही जल बोर्ड को वर्षा जल संचयन उपकरण के डिजाइन में दोष की उचित जांच करने और सुधार के लिए समुचित कदम उठाने का निर्देश दिया है।