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क्यों केजरीवाल से राजकुमार का हुआ मोहभंग, बाल मजदूर से लेकर मंत्री तक; कैसा रहा सफर

अरविंद केजरीवाल से प्रभावित होकर राजकुमार आनंद ने इंडिया अगेंस्ट करप्शन मूवमेंट ज्वाइन किया। इसके बाद आम आदमी पार्टी से जुड़े और विधायक बने। उन्हें 2020 में दिल्ली सरकार में मंत्री बनाया गया।

क्यों केजरीवाल से राजकुमार का हुआ मोहभंग, बाल मजदूर से लेकर मंत्री तक; कैसा रहा सफर
Sneha Baluniपीटीआई,नई दिल्लीThu, 11 Apr 2024 11:47 AM
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वरिष्ठ नेताओं के जेल जाने से परेशानी झेल रही आप को बुधवार को जोर का झटका तब लगा जब मंत्री और पार्टी के दलित चेहरे राजकुमार आनंद ने इस्तीफा दे दिया। उनका पार्टी और पद से इस्तीफा देना हर किसी के लिए चौंकाने वाला कदम था। वे भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दिनों से ही मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ जुड़े हुए थे। उन्हें दिल्ली सीएम का करीबी भी माना जाता था।

मंत्रिमंडल और पार्टी से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू की गई जंग से उपजी थी, अब भ्रष्टाचार में 'फंसी' है और 'मेरे लिए इस पार्टी में रहना मुश्किल हो गया है।' पटेल नगर विधायक की कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जो अर्श से फर्श पर पहुंचा है। दिल्ली सरकार के पोर्टल पर उनके आधिकारिक जीवन परिचय के अनुसार, उनके माता-पिता को 'गरीबी के कारण' उन्हें उनके नाना-नानी के पास अलीगढ़ भेजना पड़ा था।

पोर्टल में लिखा है, 'उनके नाना एक कबाड़ी थे और उनकी आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि वह अपने नाती को पढ़ा सकें।' 57 साल के नेता की प्रोफाइल में उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के रूप में बताया गया है जिसका जीवन 'संघर्षों से भरा' था। इसमें लिखा है कि आनंद को अलीगढ़ की एक ताला फैक्ट्री में 'बाल मजदूर' के तौर पर काम करना पड़ा था। लेकिन बाद में उन्होंने एक बिजनेसमैन के रूप में सफलता हासिल की। 

पोर्टल के अनुसार, 'कारखानों में फेंके गए फोम का उपयोग करके तकिए बनाने से लेकर रेक्सिन लेदर का एक सफल बिजनेसमैन बनने तक, आनंद का सफर आसान और सिंपल लग सकता है, लेकिन हकीकत में यह कई कठिनाइयों और उतार-चढ़ाव के दौर से गुजरा है।' 2020 में दिल्ली विधानसभा चुनाव के हलफनामे में उनकी संपत्ति 78.9 करोड़ रुपये बताई गई थी।

पार्टी से इस्तीफा देने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, 'मैं उस समय अरविंद केजरीवाल से जुड़ा था जब उन्होंने रामलीला मैदान (इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन का स्थल) से कहा था कि राजनीति बदलने के बाद देश बदल जाएगा। राजनीति नहीं बदली। लेकिन अब राजनेता बदल गए हैं। आम आदमी पार्टी भ्रष्टाचार में डूबी हुई है। हालात को देखते हुए मेरे लिए इस पार्टी में रहना मुश्किल हो गया है। इसलिए आपके जरिए मैं बताना चाहता हूं कि मैं इस पार्टी और अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे रहा हूं।'

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से आर्ट्स (राजनीति विज्ञान) में मास्टर्स डिग्री धारक आनंद ने केजरीवाल के 'प्रभाव' में 2011 में 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' में एक्टिव तौर पर भाग लिया। वह वह 2012 में केजरीवाल और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के अन्य नेताओं द्वारा स्थापित आम आदमी पार्टी (आप) में शामिल हुए। उन्हें 2020 के विधानसभा चुनावों में पटेल नगर आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी ने मैदान में उतारा, जहां उन्होंने भाजपा के उम्मीदवार को हराकर जीत हासिल की। नवंबर 2022 में, उन्हें दिल्ली कैबिनेट में शामिल किया गया और समाज कल्याण, एससी और एसटी, गुरुद्वारा चुनाव और सहकारिता विभाग की जिम्मेदारी दी गई।

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