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डिजाइन से लेकर तकनीकी गड़बड़ी तक, प्रगति मैदान टनल में कई खामियां उजागर; कंपनी को 500 करोड़ का नोटिस

नोटिस में कंपनी से पूछा गया है कि प्रोजेक्ट को पूरा नहीं कर पाने की वजह से सरकार और उससे संबंधित एजेंसियों को जो आर्थिक नुकसान हुआ है और उसकी जो छवि भी खराब हुई है उसके लिए क्यों ना उनपर ऐक्शन हो?

डिजाइन से लेकर तकनीकी गड़बड़ी तक, प्रगति मैदान टनल में कई खामियां उजागर; कंपनी को 500 करोड़ का नोटिस
Nishant Nandanलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीTue, 06 Feb 2024 06:48 PM
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प्रगति मैदान टनल को बनाने वाली कंपनी को लोक निर्माण विभाग (PWD) ने नोटिस जारी किया है। दरअसल इस टनल के निर्माण के बाद अब इसमें कई खामियां उजागर हुई हैं। जिसके बाद PWD ने नोटिस जारी करते हुए निर्माण कंपनी (L&T)  को 500 करोड़ रुपये का भुगतान करने के लिए कहा है। इसके साथ ही PWD ने कंपनी से यह भी कहा है कि पूरे प्रगति मैदान टनल के रिपेयर का काम शुरू करे और प्रोजेक्ट की तकनीकि और डिजाइन से संबंधित समस्याओं को फिर से ठीक करें। PWD की तरफ से कंपनी को नोटिस थमाते हुए कहा गया है कि वो टोकन अमाउंट के तौर पर कम से कम 500 करोड़ रुपये जमा करें। नोटिस में यह भी कहा गया है कि यह कंपनी भैरव मार्ग के नजदीक अहम अंडरपास (अंडरपास संख्या-5) के पूर्ण निर्माण में भी नाकाम रही है। 

लोक निर्माण विभाग ने कंपनी को 3 फरवरी को यह नोटिस जारी किया है और 15 दिनों के अंदर इसपर जवाब मांगा है। नोटिस में कंपनी से पूछा गया है कि प्रोजेक्ट को पूरा नहीं कर पाने की वजह से सरकार और उससे संबंधित एजेंसियों को जो आर्थिक नुकसान हुआ है और उसकी जो छवि भी खराब हुई है उसके लिए क्यों ना उनपर ऐक्शन लिया जाए? खासकर रेलवे ट्रैकों के नीचे बने टनल का काम पूरा नहीं हो सका है। 

आपको बता दें कि अंडरपास संख्या-5 प्रगति मैदान इंटीग्रेटेड ट्रांजिट कॉरिडोर का हिस्सा है। यह हिस्सा दिसंबर 2022 में खुलना था लेकिन निर्माण में चुनौतियों औऱ बाढ़ की वजह से नुकसान होने की वजह से कई बार इसमें देरी हुई है। प्रगति मैदान कॉम्पलेक्स और इसके इंटिग्रेटेड ट्रांजिट कॉरिडोर को जी-20 समिट को देखते हुए विकसित किए गए भारत मंडपम के साथ ही बनाया गया था। 1.3 किलोमीटर लंबे टनल और पांच अंडरपासों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जून 2022 में लॉन्च किया था। 

टनल के डिजाइन में भी कई खामियां

PWD ने जो नोटिस जारी किया है उसमें कहा गया है कि इस प्रोजेक्ट के लिए साल 2017 में टेंडर जारी किए गए थे और 2019 में इसका निर्माण पूरा होना था। हालांकि, प्रोजेक्ट बाद में पूरा हुआ औऱ साल 2022 में इसका उद्घाटन हुआ। हालांकि, गुजरते समय के साथ ही इसके निर्माण में खामियों का पता चला। यह कमियां ना सिर्फ तकनीकी हैं बल्कि इसके डिजाइन में भी खामियां हैं। सबसे ज्यादा भयावह और चिंता की बात यह है कि अंडरपास में कई जगह पानी जमा होता है।'  इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में 777 करोड़ रुपये खर्च हुए। यह 1.3 किलोमीटर लंबा टनल इंटिग्रेटेड कॉरिडोर के सेंटर में है और इससे जुड़े अंडरपास इस लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाए गए थे कि इससे भैरव मार्ग, रिंग रोड और मधुरा रोड सिग्नल फ्री हो जाएंगे। 

टनल की यह बड़ी खामियां हुईं उजागर

PWD ने 12 ऐसे अहम खामियों की पहचान की है। इसमें टनल के कुछ ज्वाइंट्स के पास से पानी का लीकेज होना, टनल में कई जगहों पर कंक्रीट/सीमेंट पर दरारें पड़ना, टनल में जलभराव, पूरे टनल और अंडरपास में ड्रेनेज सिस्टम का खराब इत्यादि शामिल है। इसके अलावा कर्बस्टोन में डैमेज, ब्रांच टनल के आईटपीओ पार्किंग का लंबे समय से साफ ना होना, नालियों के इंतजाम में कमी, छत से पानी टपकना, भित्ति चित्रों का कई स्थानों पर खराब हो जाना इत्यादि शामिल है। 

कंपनी ने क्या कहा...

इधर टनल के निर्माण से जुड़ी L&T कंपनी ने इसपर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कंपनी की तऱफ से कहा गया है कि वो PWD के खिलाफ 500 करोड़ रुपये का काउंटरक्लेम कर रही है। कंपनी की तरफ से कहा गया है कि PWD, DELHI उनके अहम क्लाइंट हैं और वो बरसों से उनके साथ अपने संबंधों को वैल्यू देते हैं। हालांकि, कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा है कि L&T, लोक निर्माण विभाग पर 500 करोड़ रुपये का काउंटरक्लेम करेगी। 



 

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