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प्रोफेसर इकबाल ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी, जामिया के कार्यवाहक वीसी की नियुक्ति का मामला

प्रोफेसर इकबाल हुसैन ने जामिया मिलिया इस्लामिया के प्रो वाइस चांसलर और उसके बाद कार्यवाहक कुलपति के रूप में उनकी नियुक्ति को रद्द करने के एकल जज के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है।

प्रोफेसर इकबाल ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी, जामिया के कार्यवाहक वीसी की नियुक्ति का मामला
Subodh Mishraपीटीआई,नई दिल्लीSun, 26 May 2024 08:05 PM
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प्रोफेसर इकबाल हुसैन ने जामिया मिलिया इस्लामिया के प्रो वाइस चांसलर और उसके बाद कार्यवाहक कुलपति के रूप में उनकी नियुक्ति को रद्द करने के एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनकी याचिका पर सोमवार को न्यायमूर्ति रेखा पल्ली और न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई होगी। 

उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश ने 22 मई को हुसैन की प्रो वाइस चांसलर (वीसी) और उसके बाद जामिया के कार्यवाहक वीसी के रूप में नियुक्ति को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि नियुक्तियां संबंधित कानून के अनुरूप नहीं की गई थीं। हालांकि कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और प्रशासनिक मशीनरी ठप न हो, इसके लिए एक सप्ताह के भीतर कार्यवाहक वीसी के पद पर नई नियुक्ति की जाए। कोर्ट ने भारत के राष्ट्रपति, जो 'विजिटर' हैं, से इस बीच एक नियमित वीसी की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश देने के लिए भी कहा था।

कोर्ट ने मोहम्मद शमी अहमद अंसारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया था कि चूंकि प्रतिवादी प्रोफेसर इकबाल हुसैन को कानून के अनुसार नियुक्त नहीं किया गया है, इसलिए उन्हें कार्यवाहक कुलपति के रूप में बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। कोर्ट ने कहा था कि अस्थायी कुलपति की नियुक्ति वर्तमान आदेश की प्राप्ति की तारीख से एक सप्ताह की अवधि के भीतर की जाए। नियमित आधार पर कुलपति के पद पर नियुक्ति की शुरुआत बाद में शुरू होगी। अस्थायी कुलपति की नियुक्ति 30 दिनों के भीतर पूरा किया जाना चाहिए। 

14 सितंबर 2023 को तत्कालीन वीसी प्रोफेसर नजमा अख्तर ने हुसैन को जामिया मिलिया इस्लामिया (जेएमआई) का प्रो वीसी नियुक्त किया था। इसके बाद 12 नवंबर 2023 को अख्तर की सेवानिवृत्ति पर हुसैन के कार्यवाहक वीसी का कार्यभार संभालने के बारे में रजिस्ट्रार के कार्यालय द्वारा एक और अधिसूचना जारी की गई।

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि दोनों नियुक्तियां जेएमआई अधिनियम के प्रावधानों और यूजीसी द्वारा जारी नियमों का उल्लंघन थीं। अदालत ने कहा था कि जेएमआई को नियंत्रित करने वाले कानूनों में प्रदान की गई प्रक्रिया के अनुसार, प्रो वीसी पद के लिए तत्कालीन वीसी के अनुशंसित उम्मीदवार के रूप में हुसैन का नाम उनकी नियुक्ति से पहले अनुमोदन के लिए कार्यकारी परिषद के समक्ष रखा जाना चाहिए था। इसमें कहा गया था कि किसी भी असहमति के मामले में परिषद के फैसले को खारिज करने के लिए मामले को विजिटर के पास या नए नाम की सिफारिश करने के लिए वीसी के पास वापस भेजना चाहिए।

कोर्ट ने कहा था कि यदि आवश्यकता पड़ी तो एक बार फिर कार्यकारी परिषद को ही नए पदाधिकारी को नियुक्त करने का अधिकार होगा। प्रो वीसी के रूप में प्रारंभिक नियुक्ति कानून का उल्लंघन था, कोर्ट ने कहा था कि कार्यवाहक वीसी के रूप में हुसैन की बाद की नियुक्ति भी कानूनी रूप से वैध नहीं थी। कोर्ट ने कहा था कि कार्यवाहक वीसी के रूप में हुसैन की नियुक्ति के समय कानून का अनुपालन दिखाने के लिए कोई आकस्मिक स्थिति पैदा नहीं हुई थी।