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34 साल पुरानी मांग पूरी, मोदीनगर-हापुड़ को पीएम मोदी देने वाले हैं बड़ी सौगात; जाम से मिलेगी मुक्ति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 फरवरी को मोदीनगर और हापुड़ के लोगों की 34 साल पुरानी मांग को पूरा करके उन्हें बड़ी सौगात देने वाले हैं। पीएम राज चौपला पर रेलवे ओवर ब्रिज का वर्चुअल शिलान्यास करेंगे।

34 साल पुरानी मांग पूरी, मोदीनगर-हापुड़ को पीएम मोदी देने वाले हैं बड़ी सौगात; जाम से मिलेगी मुक्ति
Sneha Baluniआयुष गंगवार,ट्रांस हिंडनThu, 22 Feb 2024 07:13 AM
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 फरवरी को मोदीनगर और हापुड़ के लोगों को बड़ी सौगात देने जा रहे हैं। दो जिलों के हजारों वाहन चालकों को जाम से छुटकारा दिलाने के लिए राज चौपला पर रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) का वर्चुअल शिलान्यास करेंगे। इसके साथ ही कड़कड़ मॉडल अंडरपास के काम की शुरुआत होगी।

दिल्ली-मेरठ रोड पर राज चौपला मोदीनगर का व्यस्ततम प्वॉइंट है, क्योंकि यहीं से पड़ोसी जनपद हापुड़ के लिए रास्ता जाता है। मोदीनगर से हापुड़ जाने का यह एकमात्र मार्ग है। इसी कारण राज चौपला और यहां से निकल रहे मोदीनगर-हापुड़ मार्ग पर वाहनों का दबाव ज्यादा रहता है। राज चौपला से मोदीनगर-मेरठ मार्ग पर 100 चलते ही रेलवे फाटक है।

सुबह गाजियाबाद-मेरठ सेक्शन पर लोकल समेत कई ट्रेनों का परिचालन होता है, इससे सुबह करीब नौ बजे से दोपहर 12 बजे के बाद तक जाम रहता रहता है। इस दौरान पांच-10 मिनट के लिए ही फाटक खुलता है, लेकिन वाहनों का दबाव अधिक होने से जाम से छुटकारा नहीं मिल पाता। फाटक बंद होते ही फिर जाम लगने लगता है, जिस कारण दिल्ली-मेरठ मार्ग पर भी वाहन चालक परेशान होते हैं।

34 साल पुरानी मांग पूरी

राज चौपला आरओबी के लिए साल 1990 में मोदीनगर के लोगों ने सबसे पहली बार मांग उठाई थी। कई आंदोलन हुए तो रेलवे ने प्रस्ताव बनाए, जो कागजों से बाहर नहीं निकल सके। 34 साल बाद मोदीनगर के लोगों को यह सौगात मिलने जा रही है। इससे पहले प्रधानमंत्री ने धोबीघाट आरओबी के रूप में 42 साल पुरानी मांग को पूरा किया था।

कड़कड़ मॉडल के लोगों को मिलेगी राहत

प्रधानमंत्री कड़कड़ मॉडल में रेलवे अंडरपास का भी शिलान्यास कर रहे हैं। करीब 25 करोड़ रुपये से बनने वाले इस अंडरपास का काम भी शुरू हो चुका है। अंडरपास बनने के बाद 15 हजार से अधिक वाहन चालकों को राहत मिलेगी।

काम शुरू होने में लगेगा वक्त

प्रधानमंत्री इसका शिलान्यास 26 फरवरी को कर रहे हैं, लेकिन जमीन पर काम शुरू होने में अभी समय लगेगा। इसकी वजह है कि रेलवे ने अपने हिस्से का करीब 20 करोड़ रुपये का एस्टीमेट बना लिया है, लेकिन रेलवे लाइन के दोनों तरफ होने वाले काम की डीपीआर स्थानीय एजेंसी तैयार नहीं कर पाई है।

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