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5 मार्च, 2021|4:07|IST

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दिल्ली दंगों को एक साल पूरा, एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल बॉडीज की फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट के खिलाफ याचिका दायर

delhi riots

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में एक याचिका दायर कर मंगलवार को मांग की गई कि राजधानी में पिछले साल हुए दंगों में दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग (डीएमसी) जैसी विभिन्न एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल बॉडीज (Extra Judicial Bodies) द्वारा दी गई फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट (Fact-Finding Reports) का कोई कानूनी आधार नहीं होने की घोषणा की जाए।

उत्तर पूर्वी दिल्ली में पिछले साल फरवरी में हुए दंगों में एक वकील की याचिका पर चीफ जस्टिस डी.एन. पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की एक बेंच ने केंद्र, दिल्ली पुलिस और डीएमसी समेत विभिन्न एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल बॉडीज को नोटिस जारी कर उनका पक्ष पूछा है। दंगों के दौरान याचिकाकर्ता वकील के स्कूल को आग लगा दी गई थी।

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसा के बाद उत्तर पूर्वी दिल्ली में 24 फरवरी 2020 को सांप्रदायिक झड़पें हुई थीं और इस दौरान 53 लोगों की मौत हुई थी जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। याचिकाकर्ता की दलील है कि जब स्कूल को जलाए जाने के संबंध में दर्ज एफआईआर पर आरोप पत्र दायर किया जा चुका है तब एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल बॉडीज  द्वारा दी गई फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट सुनवाई की तय प्रक्रिया में हस्तक्षेप करेंगी।

याचिका में मांग की गई कि इन रिपोर्टों को सार्वजनिक जगहों से हटाया जाए और यह घोषित किया जाए कि कानून में इनकी कोई अहमियत नहीं है। इस मामले में केंद्र की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि डीएमसी एक वैधानिक निकाय है और इसकी रिपोर्ट निचली अदालत द्वारा किसी भी समय मांगी जा सकती है। भले ही अभियोजन उस पर भरोसा न करने का फैसला करे।

उन्होंने कहा कि आरोपी या पीड़ित रिपोर्ट पर भरोसा कर सकते हैं। मेहता ने कहा कि कुछ रिपोर्ट जहां स्वस्थापित निकायों की हैं, डीएमसी एक वैधानिक निकाय है। डीएमसी की फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट में विधानसभा चुनावों के दौरान भाषणों के जरिये कथित तौर पर लोगों को भड़काने के लिए भाजपा के एक नेता की तरफ इशारा किया गया है।

डीएमसी की रिपोर्ट पर भाजपा ने आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया था कि दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग भगवा पार्टी के खिलाफ निराधार आरोप लगा रहा है। डीएमसी की 130 पन्नों की रिपोर्ट में दिल्ली पुलिस पर भी कार्रवाई न करने का आरोप लगाया गया है।  

बता दें कि, पिछले साल उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों को आज एक साल पूरा हो गया है। ऐसे में अब भी दिल्ली पुलिस आरोपियों को सजा नहीं दिला सकी है। 

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  • Web Title:Plea in High Court against reports by extra judicial bodies on north-east Delhi riots