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दिल्ली हाईकोर्ट में तलाक-उल-सुन्नत को लेकर दायर याचिका खारिज

वरिष्ठ संवाददाता, नई दिल्लीPublished By: Shivendra Singh
Mon, 27 Sep 2021 06:31 PM
दिल्ली हाईकोर्ट में तलाक-उल-सुन्नत को लेकर दायर याचिका खारिज

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को मुस्लिम पतियों को अपनी पत्नी को किसी भी समय कोई कारण बताए बगैर तलाक (तलाक-उल-सुन्नत) के विशेष अधिकार को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा है कि संसद ने पहले ही इस बारे में कानून बना दिया है।

जस्टिस विपिन सांघी और जसमीत सिंह की पीठ ने कहा कि याचिका पूरी तरह से गलत व आधारहीन है। पीठ ने कहा कि संसद ने पहले ही इस मसले पर हस्तक्षेप किया है और मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 को अधिनियमित किया है। अधिनियम की धारा 3 के अनुसार, एक मुस्लिम पति द्वारा अपनी पत्नी पर ‘तलाक’ की कोई भी घोषणा, शब्दों द्वारा, या तो बोली गई या लिखित या इलेक्ट्रॉनिक रूप में या किसी अन्य तरीके से, जो भी हो, वह अवैध होगी।

यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने 28 साल की महिला की याचिका को खारिज कर दिया। महिला ने याचिका में मुस्लिम समुदाय में किसी भी समय बिना कारण बताए और पहले से नोटिस दिए बगैर पत्नी को तलाक (तलाक-उल-सुन्नत) देने के लिए पति को एकतरफा अधिकार दिए जाने को चुनौती दी थी। महिला ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर पति को दिए गए इस अधिकार को मनमाना, शरिया विरोधी, असंवैधानिक और बर्बर बताया था। याचिकाकर्ता महिला ने अधिवक्ता बजरंग वत्स के माध्यम से दाखिल याचिका में कहा है कि उसके पति ने इस साल आठ अगस्त को तीन तलाक देकर उसे छोड़ दिया और उसके बाद उसने अपने पति को कानूनी नोटिस जारी किया है।

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