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दिल्ली को तय कोटे से आधी बिजली दे रहा एनटीपीसी : सत्येंद्र जैन

वरिष्ठ संवाददाता, नई दिल्लीPublished By: Shivendra Singh
Mon, 11 Oct 2021 09:15 PM
दिल्ली को तय कोटे से आधी बिजली दे रहा एनटीपीसी : सत्येंद्र जैन

दिल्ली के ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन ने सोमवार को केंद्र सरकार के उस बयान को खारिज किया है, जिसमें कहा गया है कि बिजली की किल्लत नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर बिजली की किल्लत नहीं है तो एनटीपीसी दिल्ली को निर्धारित आवंटन से आधी बिजली की आपूर्ति ही क्यों कर रहा है। उन्होंने कहा कि अगर बिजली का संकट नहीं है तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ केंद्र सरकार को बिजली संकट को लेकर पत्र क्यों लिख रहे हैं। जैन ने कहा कि देश में बिजली का संकट है। केंद्र सरकार इसे जब तक समस्या नहीं मानेगी, तब तक इसका समाधान नहीं निकलेगा।

सत्येंद्र जैन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह चिंता की बात है कि देश में बिजली का संकट है। उत्तर भारत के कई राज्यों में बिजली की कटौती हो रही है। दिल्ली में गैस आधारित बिजली उत्पादन संयंत्र से बिजली उत्पादन करके जरूरत को पूरा किया जा रहा है। लेकिन देश के बाकी हिस्सों में चिंता की स्थिति है। जैन ने कहा कि किसी भी बिजली उत्पादन संयंत्र के पास कोयले का कम से कम 15 दिन का स्टॉक होना चाहिए और इस समय ज्यादातर प्लांट में 2-3 दिन का स्टॉक ही बचा है। उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा, अगर एनटीपीसी के सारे प्लांट 50-55 फीसदी क्षमता से काम कर रहे हैं तो कोयले की कमी कैसे उत्पन्न हो रही है। 

केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह के बिजली संकट को अफवाह बताने वाले बयान पर सत्येंद्र जैन ने कहा कि अगर ऐसा है तो देश के अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्री इसे लेकर प्रधानमंत्री को पत्र क्यों लिख रहे हैं। यहां तक कि उत्तरप्रदेश में, जहां भाजपा की सरकार है, वहां की राज्य सरकार ने भी केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पत्र लिखने से इन्हें समस्या है। 

दिल्ली में मांग फिलहाल इसलिए किल्लत नहीं
सत्येंद्र जैन ने कहा कि दिल्ली में बिजली की मांग फिलहाल कम है। बिजली की मांग कम होने के बाद भी हमें एनटीपीसी से समझौते के मुताबिक पूरी बिजल नहीं मिल रही है। मांग पूरी करने के लिए हम स्पॉट रेट पर 17 से 20 रुपये प्रति यूनिट बिजली खरीदकर निर्बाध आपूर्ति कर रहे हैं। इसके अलावा गैस आधारित प्लांट जिनकी क्षमता 1300 मेगावाट के आसपास है, उन्हें भी पूरी क्षमता के साथ चलाया जा रहा है। इसलिए दिल्ली में अभी पावर कट जैसी समस्या नहीं है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में एक समय पर बिजली की मांग 7300 मेगावाट से भी ज्यादा थी, जो फिलहाल घटकर 4562 मेगावाट हो गई है। समझौते के मुताबिक एनटीपीसी को साल में 85 फीसदी बिजली समय पर देनी होती है। 

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