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बढ़ी फीस की वसूली नहीं, समिति पर खर्च हो गए सवा पांच करोड़

delhi high court

निजी स्कूलों ने छठे वेतनमान के नाम पर अभिभावकों से बढ़ी हुई फीस वसूली थी। हाईकोर्ट के आदेश पर इसकी समीक्षा के लिए 2011 में समिति गठित की गई थी जिस पर 31 मार्च 2018 तक 5.24 करोड़ रुपये खर्च हो गए। मगर समिति की सिफारिश के बावजूद बढ़ी हुई फीस की पूरी वसूली नहीं हो पाई है। शुरुआत में महज दो-चार स्कूलों ने थोड़ी फीस वापस की थी। यह खुलासा एक आरटीआई आवेदन के जवाब में हुआ है।

जवाब के मुताबिक हाईकोर्ट ने 31 अगस्त 2011 को समीक्षा के लिए जस्टिस अनिल देव सिंह के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया। कमेटी का खर्च शिक्षा निदेशालय और निजी स्कूलों को मिलकर उठाना था। आठ साल में निदेशालय ने एक करोड़ रुपये और निजी स्कूलों ने 4.17 करोड़ रुपये कमेटी पर खर्च किए।

कमेटी ने हाईकोर्ट में कई रिपोर्ट पेश करते हुए सैकड़ों स्कूलों को मनमानी फीस बढ़ाने का दोषी पाया। साथ ही उनसे नौ फीसदी ब्याज सहित पैसे वापस करने की सिफारिश की। अखिल भारतीय अभिभावक संघ के अध्यक्ष अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद कमेटी की समीक्षा के खर्च के लिए जो राशि निजी स्कूलों से वसूली गई है उससे अभिभावकों पर दोहरी मार पड़ी है।

अग्रवाल ने कहा कि एक तो फीस की वापसी नहीं हुई। दूसरी, स्कूल कमेटी पर खर्च हो रही राशि को अप्रत्यक्ष रूप से अभिभावकों से ही वसूल रहे हैं। अगर समिति की सिफारिशों पर समय से अमल होता तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।

604 स्कूलों से वसूलने थे 750 करोड़
अखिल भारतीय अभिभावक संघ के अध्यक्ष अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने बताया कि समिति ने एक हजार से अधिक निजी स्कूलों के बही खातों की जांच की। इनमें 604 निजी स्कूलों को मनमानी फीस वसूलने का दोषी पाया गया। उन्होंने कहा कि आकलन के मुताबिक इन स्कूलों से 750 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वसूली जानी है। अग्रवाल के मुताबिक समिति ने जांच के दौरान 200 निजी स्कूलों के रिकॉर्ड फर्जी पाए थे। इन निजी स्कूलों की विशेष जांच करने की सिफारिश भी शिक्षा निदेशालय से की गई थी।

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  • Web Title:Not recovering increased fees Five crore rupees spent on the committee