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Hindi News NCRनाबालिग से रेप मामले में दोषी को 10 साल की जेल, अपहरण मामले में 5 साल की सजा

नाबालिग से रेप मामले में दोषी को 10 साल की जेल, अपहरण मामले में 5 साल की सजा

आरोपी मोहित ने 3 अप्रैल, 2017 को सुबह 11.30 बजे नाबालिग पीड़िता को शादी या अवैध यौन संबंध के लिए मजबूर करने के लिए उसका अपहरण किया और उसके साथ बलाlत्कार और यौन उत्पीड़न का अपराध भी किया।

नाबालिग से रेप मामले में दोषी को 10 साल की जेल, अपहरण मामले में 5 साल की सजा
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Sourabh JainPTI,नोएडाSun, 09 Jun 2024 12:33 AM
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गौतमबुद्ध नगर जिले की एक अदालत ने एक नाबालिग लड़की से बलात्कार के मामले में एक शख्स को 10 साल सश्रम कारावास और शादी के लिए मजबूर करने के इरादे से उसका अपहरण करने के लिए पांच साल की सजा सुनाई है। विशेष पॉक्सो कोर्ट के न्यायाधीश (प्रथम) विकास नागर के आदेश के अनुसार दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। साथ ही उन्होंने दोषी पर 55,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

ग्रेटर नोएडा निवासी मोहित पर अप्रैल 2017 में 16 वर्षीय लड़की का अपहरण करने और फिर उसके साथ बलात्कार करने का आरोप था। उस समय दनकौर पुलिस स्टेशन में आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 363, 366 और 376 और पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामले के संबंध में FIR दर्ज की गई थी। आरोपी और पीड़ित दोनों एक ही गांव के हैं। 

बचाव पक्ष के वकील नरेश चंद गुप्ता ने आरोपी के लिए न्यूनतम सजा की मांग करते हुए कहा कि वह अपने गरीब परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है, जबकि विशेष लोक अभियोजक जय प्रकाश भाटी ने किसी तरह की नरमी नहीं बरतने और अधिकतम सजा की मांग की, क्योंकि यह एक नाबालिग के खिलाफ बहुत गंभीर अपराध था।

न्यायाधीश नागर ने शुक्रवार को पारित आदेश में कहा, 'अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों की गहन आलोचनात्मक जांच और मूल्यांकन से यह अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि प्रस्तुत साक्ष्य यह साबित करने के लिए पर्याप्त हैं कि आरोपी मोहित ने 3 अप्रैल, 2017 को सुबह 11.30 बजे नाबालिग पीड़िता को शादी या अवैध यौन संबंध के लिए मजबूर करने के लिए उसका अपहरण किया और उसके साथ बलात्कार और यौन उत्पीड़न का अपराध भी किया।'

जज ने आदेश में कहा कि, 'मुकदमे के दौरान दोषी द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को उसे दी गई मूल सजा में समायोजित किया जाएगा। दोनों मूल सजाएं एक साथ चलेंगी।' उन्होंने कहा, 'सीआरपीसी की धारा 357 के प्रावधान के तहत, दोषी पर लगाए गए जुर्माने का 85 प्रतिशत पीड़िता के पुनर्वास के खर्चों को पूरा करने के लिए दिया जाएगा।' 

मामले की सुनवाई के दौरान, अदालत ने पीड़िता की उम्र के बारे में भी विसंगति पाई, उसके पिता ने दावा किया कि घटना के समय वह 13 वर्ष की थी, जबकि उसके शैक्षिक प्रमाण पत्र और चिकित्सा कानूनी रिपोर्ट में उसकी उम्र लगभग 16 वर्ष बताई गई थी। हालांकि, अदालत ने कहा कि किसी भी स्थिति में, पीड़िता अपने खिलाफ अपराध के समय नाबालिग थी।