ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News NCRजमानत ना देने का कोई उचित कारण नहीं, राजद्रोह केस में शरजील इमाम की बेल पर क्या बोले हाई कोर्ट के जज

जमानत ना देने का कोई उचित कारण नहीं, राजद्रोह केस में शरजील इमाम की बेल पर क्या बोले हाई कोर्ट के जज

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि 2020 के सांप्रदायिक दंगों से जुड़े राजद्रोह और गैरकानूनी गतिविधियों के एक मामले में छात्र कार्यकर्ता शरजील इमाम को बेल नहीं देने का कोई उचित कारण नहीं था।

जमानत ना देने का कोई उचित कारण नहीं, राजद्रोह केस में शरजील इमाम की बेल पर क्या बोले हाई कोर्ट के जज
Mohammad Azamभाषा,दिल्लीMon, 10 Jun 2024 09:17 PM
ऐप पर पढ़ें


साल 2020 में हुए दंगे के मामले में शरजील इमाम को लेकर हाई कोर्ट कमेंट आया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि 2020 के सांप्रदायिक दंगों से जुड़े राजद्रोह और गैरकानूनी गतिविधियों के एक मामले में छात्र कार्यकर्ता शरजील इमाम को जमानत नहीं देने का कोई उचित कारण नहीं था। अदालत ने कहा कि अधीनस्थ न्यायालय ने आरोपों की व्यापकता से प्रभावित होकर उसे राहत देने से इनकार कर दिया था। शरजील पर आरोप है कि उसने जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में असम और नॉर्थ-ईस्ट के बाकी हिस्से को देश से काटने की बात की थी। इसके बाद शरजील को गिरफ्तार कर लिया गया था।

इस मामले में न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत की अध्यक्षता वाली पीठ ने गिरफ्तारी के चार साल से अधिक समय बाद 29 मई को इमाम को जमानत दी थी। हाल में अपलोड किए गए पीठ के आदेश में कहा गया है कि आरोपों के गंभीर होने मात्र से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 436-ए के तहत जमानत देने से इनकार नहीं किया जा सकता। आदेश में कहा गया है कि इस मामले में हमें कोई उचित कारण नहीं मिला, जिसके कारण न्यायालय को राहत न देने के लिए बाध्य होना पड़ा।

दिल्ली हाई कोर्ट की पीठ ने कहा कि अधीनस्थ न्यायालय ने आरोपों की व्यापकता को देखते हुए यह पाया कि उन्होंने भड़काऊ भाषण दिए थे, जिसके कारण दंगे हुए, इसलिए जमानत देने से इनकार कर दिया गया। पीठ में न्यायमूर्ति मनोज जैन भी शामिल थे। 

अभियोजन पक्ष के अनुसार, इमाम ने 13 दिसंबर, 2019 को जामिया मिलिया इस्लामिया और 16 दिसंबर, 2019 को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में भाषण दिए, जहां उसने असम और शेष पूर्वोत्तर को देश से काटने की धमकी दी थी। इस मामले में अब दिल्ली हाई कोर्ट का कहना है कि शरजील को जमानत ना देने का कोई उचित कारण नहीं था।