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Hindi News NCRबौद्ध मत हिंदू धर्म से अलग है, अपनाने को परमिशन लेनी होगी; गुजरात सरकार का आदेश

बौद्ध मत हिंदू धर्म से अलग है, अपनाने को परमिशन लेनी होगी; गुजरात सरकार का आदेश

गुजरात में अब जिला मजिस्ट्रेट से इजाजत लिए बिना कोई भी धर्मांतरण नहीं कर पाएगा। इसे लेकर सरकार ने सर्कुलर जारी किया है। जिसमें बौद्ध को हिंदू धर्म से अलग माना है।

बौद्ध मत हिंदू धर्म से अलग है, अपनाने को परमिशन लेनी होगी; गुजरात सरकार का आदेश
Sneha Baluniलाइव हिन्दुस्तान,गांधीनगरThu, 11 Apr 2024 08:47 AM
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गुजरात सरकार ने एक सर्कुलर जारी कर कहा है कि बौद्ध मत को एक अलग धर्म माना जाना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति हिंदू से बौद्ध धर्म, जैन धर्म या सिख धर्म में जाना चाहता है तो इसके लिए उसे पहले इजाजत लेनी होगी। धर्म परिवर्तन कराने वाले शख्स को गुजरात धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2003 के प्रावधानों के तहत संबंधित जिला मजिस्ट्रेट से पूर्व मंजूरी लेनी होगी। गृह विभाग ने इस सर्कुलर को आठ अप्रैल को जारी किया था। तब सरकार के संज्ञान में आया था कि बौद्ध धर्म में परिवर्तन के आवेदनों का निपटारा नियमों के अनुसार नहीं किया जा रहा है। सर्कुलर पर उप सचिव (गृह) विजय बधेका ने साइन किए थे।

गुजरात में हर साल दशहरा और अन्य त्योहारों पर आयोजित कार्यक्रमों में ज्यादातर दलितों को सामूहिक रूप से बौद्ध धर्म अपनाते देखा जाता है। सर्कुलर में कहा गया है कि हमारी नजर में आया है कि जिला मजिस्ट्रेटों के कार्यालय गुजरात धर्म स्वतंत्रता अधिनियम की मनमाने ढंग से व्याख्या कर रहे हैं। सर्कुलर में कहा, 'यह देखने में आया है कि हिंदू धर्म से बौद्ध धर्म में परिवर्तन की अनुमति मांगने वाले आवेदनों में, नियमों के अनुसार प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा। इसके अलावा, कभी-कभी, आवेदकों और स्वायत्त निकायों से आवेदन मिल रहे हैं कि हिंदू धर्म से बौद्ध धर्म में धार्मिक परिवर्तन के लिए पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं है।'

सर्कुलर में कहा गया है, 'ऐसे मामलों में जहां पूर्व अनुमति के लिए आवेदन दिए जाते हैं, संबंधित कार्यालय ऐसे आवेदनों का निपटान यह कहते हुए कर रहे हैं कि संविधान के अनुच्छेद 25 (2) के तहत, सिख धर्म, जैन धर्म और बौद्ध धर्म हिंदू धर्म के अंदर शामिल हैं और इसलिए आवेदक को ऐसे धार्मांतरण के लिए अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। ऐसा हो सकता है कि कानूनी प्रावधानों के पर्याप्त अध्ययन के बिना धर्म परिवर्तन जैसे संवेदनशील विषय में आवेदकों को दिए गए जवाबों को लेकर न्यायिक केस हो सकते हैं।' सर्कुलर में कहा गया है कि 'गुजरात फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट के रेफरेंस में, बौद्ध धर्म को एक अलग धर्म माना जाएगा।'