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Hindi News NCRसफर होगा सुहाना, गर्मी से भी राहत; दिल्ली-एनसीआर में NHAI का मियावाकी प्लान

सफर होगा सुहाना, गर्मी से भी राहत; दिल्ली-एनसीआर में NHAI का मियावाकी प्लान

एनसीआर को गर्मी से बचाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने एक योजना बनाई है। प्राधिकरण ने इसके लिए दिल्ली-एनसीआर में राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े अलग-अलग जगहों पर 53 एकड़ जमीन चिन्हित की है।

सफर होगा सुहाना, गर्मी से भी राहत; दिल्ली-एनसीआर में NHAI का मियावाकी प्लान
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Subodh Mishraलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 19 Jun 2024 12:26 PM
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दिल्ली-एनसीआर में पड़ रही भीषण गर्मी की आंच राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) तक पहुंच चुकी है। एनसीआर को गर्मी से बचाने के लिए प्राधिकरण ने एक योजना बनाई है। प्राधिकरण ने घोषणा किया है कि उसने दिल्ली-एनसीआर में राष्ट्रीय राजमार्ग के सटी अलग-अलग जगहों पर 53 एकड़ जमीन चिन्हित की है, जिस पर वह जापानी तकनीक अपनाकर लोगों को गर्मी से बचाने का उपाय करेगी।

प्राधिकरण ने जानकारी देते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे मियावाकी बागवानी (जापानी तकनीक से पौधारोपण) के विकास के लिए प्रस्तावित कुछ स्थलों में द्वारका एक्सप्रेसवे के हरियाणा के साथ लगती 4.7 एकड़ जमीन, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के दिल्ली-वडोदरा खंड पर सोहना के पास 4.1 एकड़ जमीन, हरियाणा में अंबाला-कोटपुतली कॉरिडोर के चाबरी और खरखरा इंटरचेंज के पास पांच-पांच एकड़ जमीन शामिल है।

इसके अलावा, NH-709बी पर शामली बाईपास के पास 12 एकड़ से जमीन, गाजियाबाद के पास ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर दुहाई इंटरचेंज के पास 9.2 एकड़ और NH-34 के मेरठ-नजीबाबाद खंड के पास 5.6 एकड़ जमीन की भी पहचान की गई है। चयनित स्थलों पर तैयारी शुरू हो चुकी है और आगामी मानसून सीजन के दौरान पौधारोपण किया जाएगा। इसे अगस्त 2024 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है।

क्या है मियावाकी बागवानी

यह पौधारोपण का जापानी तकनीक है। इस तकनीक से कम समय में घने, देशी और जैव विविधता वाले जंगल बनाना संभव है। इस तकनीक से लगाए गए पौधे भूजल को बनाए रखते हैं और भूजल स्तर को रिचार्ज करने में मदद करते हैं। इस विधि से पेड़ दस गुना तेजी से बढ़ते हैं और पेड़-पौधे धूल अवरोधक के रूप में कार्य करते हैं। प्राधिकरण ने कहा है कि वह पौधों की स्वदेशी प्रजातियों को लगाने पर ध्यान केंद्रित करेगा, जो स्थानीय जलवायु और मिट्टी में जीवित रह सकें।