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न्यूज क्लिक केस में सामने आएंगे और नाम, अदालत में बोली दिल्ली पुलिस, अभी बंद नहीं हुई जांच

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 8,000 पन्नों की चार्जशीट पर संज्ञान लिया है। दिल्ली पुलिस ने अदालत में कहा कि जांच अभी बंद नहीं हुई है, अभी और नाम सामने आएंगे। विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ें रिपोर्ट...

न्यूज क्लिक केस में सामने आएंगे और नाम, अदालत में बोली दिल्ली पुलिस, अभी बंद नहीं हुई जांच
Krishna Singhएएनआई,नई दिल्लीTue, 30 Apr 2024 06:56 PM
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दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार को न्यूजक्लिक और इसके संस्थापक एवं प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की ओर से दाखिल 8,000 पन्नों की चार्जशीट पर संज्ञान लिया। यह मामला गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967 के तहत दर्ज किया गया है। आरोप है कि न्यूज पोर्टल को चीन समर्थक प्रचार को बढ़ावा देने के लिए बड़ी रकम मिली थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. हरदीप कौर ने आरोपपत्र पर संज्ञान लिया।

विशेष लोक अभियोजक अखंड प्रताप सिंह ने अदालत को बताया कि छापेमारी के दौरान दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। अमित चक्रवर्ती ने सरकारी गवाह बनने के लिए आवेदन दिया था। मामले में आठ संरक्षित गवाह हैं। इन आठों समेत विभिन्न बयानों के आधार पर अपराध का संज्ञान लिया जाएगा। वर्तमान आरोप पत्र प्रबीर पुरकायस्थ और न्यूजक्लिक के खिलाफ है। इस केस में पुलिस की जांच अभी भी जारी है। अन्य जिन लोगों के बारे में जांच जारी है उनके नाम बाद में सामने आएंगे। 

अदालत ने आरोपों पर बहस के लिए 31 मई की तारीख दी। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने अदालत को सूचित किया था कि उन्हें न्यूजक्लिक मामले में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए यूएपीए की धारा 45 और सीआरपीसी की धारा 196 के तहत सभी आवश्यक मंजूरी प्राप्त कर ली है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा हाल ही में पटियाला हाउस कोर्ट में आरोप पत्र दायर किया गया था और इसमें लगभग 8,000 पन्ने हैं। मामले में न्यूजक्लिक के एचआर हेड अमित चक्रवर्ती को भी सरकारी गवाह बना दिया गया है।

दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की ओर से दर्ज की गई एफआईआर में कहा गया है कि देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बाधित करने, असंतोष पैदा करने, एकता को खतरे में डालने की साजिश के तहत विदेशी संस्थाओं की ओर से भारत में अवैध रूप से करोड़ों की विदेशी रकम का निवेश किया गया है। इस विदेशी फंड के करोड़ों रुपये के बदले में पेड न्यूज चलाईं गईं। ऐसी खबरें फैलाने का मकसद देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को नुकसान पहुंचाना था।