New Psychoactive Drug will come in law jurisdiction - नए साइकोएक्टिव ड्रग को कानून के दायरे में लाने की कवायद शुरू DA Image

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नए साइकोएक्टिव ड्रग को कानून के दायरे में लाने की कवायद शुरू   

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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के गाजियाबाद स्थित राष्ट्रीय व्यसन उपचार केंद्र में नए साइकोएक्टिव ड्रग को कानून के दायरे में लाने की कवायद शुरू कर दी गई है। इसके लिए उपचार केंद्र में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस प्रयोगशाला बन चुकी है। इसे जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा।   

वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने कुछ महीने पहले गाजियाबाद के कमला नेहरूनगर स्थित एम्स के राष्ट्रीय व्यसन उपचार केंद्र (नशा मुक्ति केंद्र) के विशेषज्ञों के साथ नए साइकोएक्टिव (नए मनोवैज्ञानिक पदार्थ) ड्रग पर बैठक की थी। इसमें देश में बढ़ते जा रहे नए प्रकार के नशों को कानून के दायरे में लाने पर चर्चा की गई थी। ताकि अगर कोई इस ड्रग के साथ पकड़ा जाता है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जा सके। इस पर मंत्रालय ने राष्ट्रीय व्यसन उपचार केंद्र के विशेषज्ञों को इस प्रोजेक्ट पर काम करने का आदेश दिया था। इसके तहत उपचार केद्र को अपने यहां एक प्रयोगशाला शुरू करने का आदेश दिया था। यही नहीं मंत्रालय ने इसके लिए सभी जरूरी मशीनों को भी उपलब्ध कराने की बात कही थी। अब राष्ट्रीय व्यसन उपचार केंद्र में यह प्रयोगशाला बनाई जा चुकी है। इसे जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा। 

देश में तेजी से बढ़ रहा नए साइकोएक्टिव ड्रग का नशा

राष्ट्रीय व्यसन उपचार केंद्र के वरिष्ठ प्रो. राकेश लाल ने बताया कि देश में विभिन्न प्रकार की ड्रग हैं,जिन्हें ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट और नारकोटिक ड्रग्स एक्ट समेत अन्य कानूनों के दायरे में रखा गया है। इन कानूनों के दायरों में आने वाली ड्रग के साथ अगर कोई पकड़ा जाता है,तो उनके खिलाफ इन्हीं कानूनों के अंतर्गत कार्रवाई की जाती है लेकिन नए साइकोएक्टिव ड्रग ऐसी ड्रग को कहते हैं,जो देश भर में नए प्रकार के नशों को बढ़ावा दे रही है लेकिन ये नशा किसी भी कानून के दायरे में नहीं आता। यह नशा भी उतना ही घातक है,जितना की अन्य लेकिन कानून के दायरे में न होने के कारण ऐसा नशा करने या इस तरह का नशा बांटने वालों पर कार्रवाई नहीं हो पाती। यही वजह है कि वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने इस प्रकार की ड्रग को भी कानून के दायरे में लाने के लिए ही यह कदम उठाया है। इस पर काम भी करना शुरू कर दिया गया है।

200 नमूने लिए जा चुके हैं
प्रो. राकेश लाल ने बताया कि वित्त मंत्रालय ने कहा है कि अगर एक भी मामला इस तरह के नशे का पॉजिटिव आ गया तो नए साइकोएक्टिव ड्रग को कानून के दायरे में लाना आसान हो जाएगा।  यही वजह है कि प्रयोगशाला शुरू होने से पहले ही देश भर के कोनों से ऐसे मरीज जो विभिन्न क्लीनिक या नशा मुक्ति केंद्र पर नशे की लत को छुड़ाने के लिए जाते हैं,वहां से उनकी पेशाब के नमूने मंगाने का काम पिछले तीन महीने से चल रहा है। अभी तक करीब दो सौ से ज्यादा ऐसे मरीजों के पेशाब के नमूने लिए जा चुके हैं। इन नमूनों को प्रयोगशाला में ही बनें डिप फ्रीजर में रखा गया है। उन्होंने बताया कि इन नमूनों को छह से नौ महीने तक डिप फ्रीजर में रखा जा सकता है। 

इन जगहों पर बनाए गए केंद्र
नए साइकोएक्टिव ड्रग पर लगाम कसने के लिए राष्ट्रीय व्यसन उपचार केंद्र की टीम ने अमृतसर, शिमला, कोलकाता, त्रिवेंद्रम और इम्फाल में अपना एक-एक केंद्र बना दिया है। क्योंकि इन जगहों से ज्यादा इस तरह का नशा करने वाले ज्यादा मरीज मिलने की उम्मीद विशेषज्ञों को है। 

गंभीर बीमारियां हो सकती हैं
प्रो. राकेश लाल ने बताया कि नए साइकोएक्टिव ड्रग का नशा मानसिक और शारीरिक दोनों ही रूप से बेहद घातक है। जानकारी न होने के कारण लोग इस तरह के नशे को कर रहे हैं। इस तरह का नशा करने वाले को बेहद गंभीर शारीरिक और मानसिक बीमारियां हो सकती हैं। इस नशे को लोग वर्तमान में इंजेक्शन के भी रूप में ले रहे हैं। यह नशा व्यक्ति को मौत के मुंह में भी भेज सकता है। 

यह है साइकोएक्टिव ड्रग
नए साइकोएक्टिव ड्रग को डिजाइनर ड्रग कहते हैं।  जिन्हें अवैध पदार्थों जैसे भांग, अफीम और कोकीन के प्रभावों को दोहराने के लिए विभिन्न दवाओं के रूप में तैयार किया जाता है। जैसे-केटामिन दवा जो कि मरीज को बेहोश करने के काम आती है। इससे नशा इंजेक्शन के जरिए किया जाता है। इसका नशा करने से गुर्दे और फेफड़े खराब होने के साथ ही इंसान के दिमाग पर बड़ा असर पड़ता है। इसके अलावा पौधों में डाले जाने वाले विभिन्न पदार्थ और कई प्रकार की पारम्परिक दवाओं के जरिए इस नशे को किया जाता है।

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