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नीतू सोलंकी हत्याकांड : गुरुग्राम में छिपा था राजू, नेपाल तक तलाशती रही पुलिस

1 / 2राजू गहलोत और नीतू सोलंकी

2 / 2नीतू सोलंकी के माता और पिता

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आठ साल पहले लिव इन पार्टनर नीतू सोलंकी की हत्या करने के बाद राजू गहलोत दिल्ली से मात्र पांच किलोमीटर दूर गुरुग्राम में पहचान बदलकर रह रहा था, जबकि दिल्ली पुलिस उसे काठमांडू और गोवा सहित दक्षिण भारत के कई राज्यों में ढूंढ़ती रही। 

मैसेज को अनदेखा किया : पुलिस के पास आरोपी का आधार कार्ड का डाटा था, जिसमें फिंगर प्रिंट, मोबाइल नंबर की जानकारी थी। पुलिस ने राजू का मोबाइल सर्विलांस पर लगा रखा था। राजू ने यह नंबर फरार होने के बाद बंद कर दिया और आधार कार्ड में नया नंबर अपडेट कर दिया। सर्विलांस पर लगे मोबाइल नंबर पर आए आधार कार्ड का नंबर अपडेट करने के मैसेज को पुलिस ने अनदेखा किया। इससे राजू अपने फर्जी पहचान पत्र बनवाने में कामयाब हो गया। अगर पुलिस सतर्क होती तो पहले ही उसकी गिरफ्तारी हो जाती। 

8 साल से फरार लिव-इन पार्टनर के हत्यारोपी की मौत,ऐसे बचता रहा पुलिस 

काठमांडू तक तलाश : पुलिस को शक था कि राजू गहलोत नेपाल या दक्षिण भारत के राज्यों में छिपा है। इस कारण पुलिस उसे काठमांडू, गोवा, कर्नाटक सहित दक्षिण भारत के कई राज्यों में तलाश करती रही।

पांच साल में जांच अधिकारी घर नहीं पहुंचा : राजू के न मिलने पर पुलिस ने केस बंद समझ लिया था। मामले के कई जांच अधिकारी बदले, लेकिन पांच साल में कोई भी जांच अधिकारी राजू के घर नहीं पहुंचा। अंत समय में जब राजू के बारे में उसके जानकारों को सूचना मिली तो उन्होंने उस समय केस के जांच अधिकारी रहे अपराध शाखा के इंस्पेक्टर को सूचना दी। मगर तब तक देर हो चुकी थी।

''गहलोत हत्या करने से पहले ही फर्जी पहचान पत्रबनाने में माहिर था।उसने बंगलुरू व गुरुग्राम में नौकरी पाने और आवास के लिए रोहन दहिया के नाम से फर्जी पहचान पत्रतैयार किए थे।'' -राजीव रंजन, एडिशनल कमिश्नर, क्राइम ब्रांच 

''पुलिस बेटी को इंसाफ दिलाने में विफल रही, मगर भगवान ने उसे सजा दे दी।वह कई साल तक गुरुग्राम में काम करता रहा। फिर भी पुलिस उसे पकड़ नहीं पाई।'' - सुशीला सोलंकी, नीतू की मां 

''कंपनी में नौकरी के लिए आवेदन के समय उसने अपना आधार कार्ड, पैन कार्ड व ड्राइविंग लाइसेंस दिए थे। उसके पास पांच साल का अनुभव था। इससे उस पर शक नहीं हुआ।'' -रोहन का सहकर्मी 

इस तरह से बदली थी अपनी पहचान

पहचान पत्रों पर नकली नाम : रोहन दहिया 

पिता का नाम : प्रीत सिंह दहिया (गहलोत के पिता का असली नाम भी प्रीत सिंह है)

आखिरी पता : भीम गढ़ खेरी, गुरुग्राम 

स्थायी पता : नवादा गांव, दिल्ली

इस कंपनी में काम करता था : आईटी/कॉल सेंटर सर्विस फर्म, गुरुग्राम 

कंपनी में पद : टीम लीडर

वेतन : 25 हजार 

आरोपी ने ये फर्जी आईडी प्रूफ बनवाए  : आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस 

इन जगहों पर पुलिस ने तलाश की : दिल्ली, गोवा, सोनीपत, बेंगलुरू, मुंबई 

17 जून को राजू गहलोत को अस्पताल में भर्ती कराया

25 जून को राजू की अस्पताल में मौत हो गई 

आखिरी सांस तक हाथ नहीं आया

नई दिल्ली (व.सं.)। राजू गहलोत आखिरी सांस तक पुलिस के हाथ नहीं आया।उसकी मौत के बाद ही पुलिस को उसके बारे में पता चला। क्राइम ब्रांच के इंस्पेटर रितेश कुमार को बुधवार सुबह किसी शख्स ने फोन कर राजू गहलोत के बारे में सूचना दी।इसके बाद पुलिस की दो टीमें अस्पताल पहुंची, मगर उससे घंटों पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी।वहीं, राजू की मौत की खबर सुनने के बाद नीतू सोलंकी की मां सुशीला ने बताया कि हमें पुलिस पर विश्वास नहीं है।शायद वे झूठ बोल रहे हैं।उन्होंने हमें इस मामले की प्रगति के बारे में भी कोईजानकारी नहीं दी।नीतू के पिता करतार सिंह सोलंकी ने बताया कि पुलिस ने इस मामले की जांच के दौरान उनके साथ सहयोग नहीं किया।

सहकर्मियों को भी नहीं पता था खौफनाक सच

नई दिल्ली (व.सं.)। फरवरी 2011 में लिव इन पार्टनर नीतू सोलंकी की निर्मम हत्या करने वाला राजू गहलोत आठ साल तक दिल्ली पुलिस की मोस्ट वांटेड की सूची में रहा।इस दौरान वह पहचान छुपाकर पुलिस से बचने में कामयाब रहा।नकली पहचान के सहारे ही वह सितंबर 2017 से गुरुग्राम के एक कॉल सेंटर में काम कर रहा था।उसके सहकर्मियों को भी उसकी खौफनाक सच्चाईनहीं पता चली।

वहां सहकर्मी उसे रोहन दहिया के नाम से जानते थे और उसकी छवि एक मेहनती और कम बोलने वाले शख्स के रूप में थी। बीती 17 जून को सहकर्मियों को पता चला कि रोहन पेट की गंभीर बीमारी से पीड़ित है। गुरुग्राम की आईटी और कॉल सेंटर की सेवाएं उपलब्ध कराने वाली फर्म में काम करने वाले रोहन के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बीमारी का पता चलने पर उसे अस्पताल में भर्ती करा दिया और हर समय कंपनी का कोईन कोई कर्मचारी उसके साथ होता था। हमने उसके लिए छह यूनिट खून की भी व्यवस्था की।कंपनी की बीमा पॉलिसी द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले डेढ़ लाख रुपये खत्म होने के बाद रुपयों की भी व्यवस्था की गई।हालंाकि, जब बुधवार को सहकर्मियों को रोहन की सही पहचान के बारे में पता चला तो उन्हें विश्वास नहीं हुआ कि वह एक भगोड़ा अपराधी था, जिसने अपनी लिव इन पार्टनर की हत्या कर शव बैग में भरकर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर फेंक दिया था।

रोहन की नियुक्ति करने वाले कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अब हमें पता लगा कि वह क्यों फोटो खिंचवाने में आनाकानी करता था और लोगों से घुलने-मिलने से भी बचता था।

वहीं, उसके एक सहकर्मी ने बताया कि गहलोत ने कभी ऐसा कुछ भी नहीं किया, जिससे पुलिस को उसकी भनक तक लग सके। उसने कभी किसी के साथ बुरा बर्ताव नहीं किया। वह उतना ही बोलता था, जितना की जरूरी हो। यह उसके पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज व्यहवार से बिल्कुल उल्टा था, जिसमें बताया गया था कि वह छोटी-छोटी बातों में गुस्सा हो जाता था, विशेष रूप से जब वह शराब पी लेता था। कंपनी में वह अनुशासित प्रदर्शन करता था। उसकी इंग्लिश पर अच्छी पकड़ थी, इसलिए उसे कंपनी में फ्रेशर्स को ट्रेनिंग देने का काम दिया गया था। 

शराब पीने से शरीर के कई अंग काम नहीं कर रहे थे 

पुलिस का कहना है कि गहलोत की मौत मल्टीपल ऑर्गन फेलियर की वजह से हुई, क्योंकि वह बहुत अधिक शराब पीता था।हालांकि, उसके सहकर्मियों का कहना हैकि उन्होंने उसे केवल सिगरेट पीते हुए देखा है।उसने उनके साथ कभी भी शराब नहीं पी।शायद उसे डर था कि शराब के नशे में वह उनके सामने अपने राज खोल देगा।

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  • Web Title:Neetu Solanki Murder case: Raju Gehlot was hidden in Gurugram Delhi Police seaching in Nepal