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गुजरात से दुहाई डिपो पहुंचे नमो भारत के तीन डिब्बे, जल्द मेरठ ट्रैक पर दौड़ेगी ट्रेन; क्या हैं खासियतें

गुजरात के सावली से रैपिड रेल के तीन डिब्बे एनसीआरटीसी के दुहाई डिपो पहुंच गए हैं। डिब्बों को जोड़कर डिपो के अंदर ट्रायल होगा। इसके कुछ दिन बाद ट्रायल के लिए मेरठ में ट्रैक पर दौड़ाया जाएगा।

गुजरात से दुहाई डिपो पहुंचे नमो भारत के तीन डिब्बे, जल्द मेरठ ट्रैक पर दौड़ेगी ट्रेन; क्या हैं खासियतें
Sneha Baluniहिन्दुस्तान,गाजियाबादThu, 29 Feb 2024 07:20 AM
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मेरठ में चलने वाली मेट्रो के तीन डिब्बे मंगलवार रात एनसीआरटीसी के दुहाई डिपो पहुंच गए। गुजरात के सावली से बड़े ट्राला में लादकर इसे लाया गया। डिब्बों को जोड़कर डिपो के अंदर ट्रायल होगा। इसके कुछ दिन बाद ट्रायल के लिए मेरठ में ट्रैक पर दौड़ाया जाएगा। एनसीआरटीसी अधिकारियों का कहना है कि ट्रेन को भारत में ही डिजाइन कर इसे यहीं बनाया गया है। 

मेक इन इंडिया अभियान के तहत यह ट्रेन बनाई है। मेरठ मेट्रो के ट्रेनसेट ऊर्जा कुशल है। साथ ही हल्के और ब्रेकिंग सिस्टम से लैस है। यह ट्रेन स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी), स्वचालित ट्रेन नियंत्रण (एटीसी) और स्वचालित ट्रेन संचालन (एटीओ) है। 

ट्रेन 120 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चलेगी 

मेरठ मेट्रो ट्रेन की परिचालन गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा है। इसका ट्रायल रन जल्द शुरू कराने की तैयारी है। मेरठ मेट्रो 13 स्टेशन के साथ 23 किलोमीटर लंबा है। फिलहाल मेरठ मेट्रो का निर्माण तेजी से चल रहा है। यह देश की पहली ट्रेन है जो नमो भारत ट्रेन और मेरठ मेट्रो रैपिड रेल ट्रांजिस्ट सिस्टम (आरआरटीएस) कॉरिडोर पर चलेगी। ट्रेन मेरठ शहर के अंदर चलेगी।

मेरठ मेट्रो के स्टेशन

मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल (भूमिगत), भैसाली (भूमिगत), बेगमपुल (भूमिगत), एमईएस कॉलोनी, दौरली, मेरठ नॉर्थ, मोदीपुरम और मोदीपुरम डिपो है। मेरठ साउथ, शताब्दी नगर, बेगमपुल और मोदीपुरम स्टेशन पर आरआरटीएस के साथ मेट्रो भी उपलब्ध होंगी। लोग सुविधानुसार ट्रेन आगे जाने के लिए बदल सकेंगे।

ये होंगी विशेषताएं

● मेट्रो का डिजाइन आधुनिक तरीके से बनाया गया है, इसमें यात्रियों को आराम और सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।
● एक ट्रेन मे 700 से ज्यादा यात्री सफर कर सकेंगे, मेरठ मेट्रो के ट्रेन हल्के वजन और स्टेनलेस स्टील से निर्मित है।
● मेरठ मेट्रो में भीड़ प्रबंधन सुनिश्चित करने की बेहतर व्यवस्था होगी। सभी स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर (पीएसडी) के साथ मेट्रो संचालन को जोड़ा जाएगा।
● ऊर्जा खपत में कमी के लिए ट्रेनों के दरवाजों में पुश बटन का प्रयोग किया गया है। इसकी मदद से सिर्फ वही दरवाजे खुलेंगे जहां पुश बटन को दबाया जाएगा। इसके साथ ही आपातकालीन निकास उपकरण, अग्निशामक यंत्र, अलार्म जैसे सुरक्षा सिस्टम को जोड़ा गया है।
● आपातकालीन स्थिति में मेडिकल स्ट्रेचर ले जाने के लिए ट्रेन में जगह की व्यवस्था, व्हील चेयर के लिए भी स्थान।

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