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MCD मेयर चुनाव में टालनी ना पड़ जाएं वोटिंग की तारीख, अब एलजी पर नजरें, कहां फंसा पेच?

MCD Mayor Elections: निर्वाचन आयोग ने एमसीडी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव को हरी झंडी दे दी। हालांकि आधिकारिक सूत्रों की मानें तो अभी भी एक जगह पेच फंसता नजर आ रहा है। पढ़ें यह रिपोर्ट...

MCD मेयर चुनाव में टालनी ना पड़ जाएं वोटिंग की तारीख, अब एलजी पर नजरें, कहां फंसा पेच?
Krishna Singhपीटीआई,नई दिल्लीThu, 25 Apr 2024 12:07 AM
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निर्वाचन आयोग ने बुधवार को एमसीडी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव को हरी झंडी दे दी। निर्वाचन आयोग ने कहा कि उसे 26 अप्रैल को होने वाले एमसीडी मेयर चुनाव पर कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि अभी भी एक जगह पेच फंसता नजर आ रहा है। उपराज्यपाल वीके सक्सेना (Lieutenant Governor VK Saxena) के कार्यालय ने अभी तक चुनाव के लिए पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति नहीं की है। ऐसे में सूत्रों का कहना है कि वोटिंग की तारीख टाली भी जा सकती है। 

दरअसल, पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति का प्रस्ताव नगर निगम सचिव से लेकर एमसीडी आयुक्त के पास तक जाता है। उसके बाद शहरी विकास सचिव, मुख्य सचिव, शहरी विकास मंत्री और मुख्यमंत्री के पास जाता है। अंत में यह एलजी के पास पहुंचता है। दिल्ली के शहरी विकास मंत्री सौरभ भारद्वाज का कहना है कि पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति की फाइल उनको दरकिनार कर के एलजी के कार्यालय को भेज दी गई थी। वहीं आधिकारिक सूत्रों ने दावा किया कि एलजी को अभी तक यह सीएम आफिस से प्राप्त नहीं हुई है।

नगर निकाय अधिकारियों के अनुसार, पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति पर अनिश्चितता के कारण मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव के लिए मतदान स्थगित भी किया जा सकता है। एमसीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अब तक हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है कि पीठासीन अधिकारी नियुक्त करने का हमारा अनुरोध स्वीकार कर लिया गया है या नहीं। ऐसे में जब तक कुछ स्पष्टता नहीं मिल जाती तब तक हम आगे की कार्रवाई तय नहीं कर पाएंगे।

एक अधिकारी ने कहा कि मेयर का चुनाव अप्रैल में पहली सदन की बैठक में होने की उम्मीद है। यदि ऐसा हुआ तो यह एक अभूतपूर्व परिस्थिति होगी... वहीं एमसीडी के एक अन्य सूत्र ने कहा कि यदि पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति नहीं हो पाती है तो वोटिंग के टलने की संभावना है। सनद रहे आधिकारिक सूत्रों ने पहले ही संकेत दिया था कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के जेल में होने के कारण पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। यही नहीं इसमें देरी भी हो सकती है।