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हिंदी न्यूज़ NCRमुंडका अग्निकांड : कोर्ट ने मनीष लकड़ा, हरीश गोयल और वरुण गोयल को एक दिन की पुलिस कस्टडी में सौंपा

मुंडका अग्निकांड : कोर्ट ने मनीष लकड़ा, हरीश गोयल और वरुण गोयल को एक दिन की पुलिस कस्टडी में सौंपा

13 मई को मुंडका मेट्रो स्टेशन के पास चार मंजिला व्यावसायिक इमारत में लगी आग की घटना में कुल 27 लोगों की मौत हो गई थी। इस इमारत में सीसीटीवी कैमरे और राउटर बनाने की कंपनी का ऑफिस था।

मुंडका अग्निकांड : कोर्ट ने मनीष लकड़ा, हरीश गोयल और वरुण गोयल को एक दिन की पुलिस कस्टडी में सौंपा
Praveen Sharmaनई दिल्ली | एएनआईTue, 17 May 2022 06:32 PM

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मुंडका अग्निकांड मामले में दिल्ली की एक अदालत ने इमारत के मालिक मनीष लकड़ा और फैक्ट्री मालिकों हरीश गोयल और वरुण गोयल को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। 13 मई को मुंडका मेट्रो स्टेशन के पास चार मंजिला व्यावसायिक इमारत में लगी आग की घटना में कुल 27 लोगों की मौत हो गई थी। इस इमारत में सीसीटीवी कैमरे और राउटर बनाने की कंपनी का ऑफिस था।

दिल्ली पुलिस ने इमारत के मालिक मनीष लाकड़ा को रविवार को गिरफ्तार किया था। आग लगने के दौरान मनीष अपने परिवार के साथ बिल्डिंग के ऊपरी मंजिल पर मौजूद था और क्रेन की मदद से परिवार समेत नीचे उतरकर फरार हो गया था। उसे पकड़ने के लिए पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही थीं।

पुलिस उपायुक्त (बाहरी) समीर शर्मा ने रविवार को बताया था कहा कि हमें सूचना मिली थी कि मनीष लकड़ा हरिद्वार जा रहा है। हमने जाल बिछाया और दिल्ली तथा हरियाणा में कई जगहों पर छापे मारकर उसे घेवरा मोड़ पर पकड़ लिया। हालांकि, पुलिस ने कंपनी के मालिक हरीश गोयल और विजय गोयल को घटना के संबंध में उसी दिन गिरफ्तार कर लिया था। 

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एनएचआरसी टीम ने मुंडका अग्नस्थिल का किया दौरा
 
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की एक टीम ने सोमवार को मुंडका में उस व्यावसायिक इमारत का दौरा किया था, जहां शुक्रवार को भीषण आग लगने से कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई और अन्य कई घायल हो गए थे। डीआईजी सुनील कुमार मीणा के नेतृत्व वाले इस दल में चार सदस्य शामिल हैं। ये सदस्य क्रमश: पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) एम.एस.गिल, डीएसपी कुलबीर सिंह, निरीक्षक कुलवंत सिंह और निरीक्षक अरुण त्यागी हैं। 

इससे पहले एनएचआरसी ने रविवार को दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है, जिसमें दोषियों लोगों के खिलाफ कार्रवाई और राहत एवं पुनर्वास की स्थिति तय करना शामिल है। आयोग ने मीडिया रिपोर्टों के आधार पर पाया कि सरकारी कर्मचारियों के वैधानिक कर्तव्यों के प्रति पूर्ण उदासीनता के कारण मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ है। इस हादसे के बाद कई लोगों के लापता होने की भी खबरें हैं। लापता हुए लोगों के परिजन उनकी तलाश में अभी भी अस्पतालों और थाने के चक्कर लगा रहे हैं।