ट्रेंडिंग न्यूज़

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

हिंदी न्यूज़ NCRकांग्रेस कमजोर, बसपा बाहर; दिल्ली में बदल चुका MCD का खेल, किसके हाथ बाजी?

कांग्रेस कमजोर, बसपा बाहर; दिल्ली में बदल चुका MCD का खेल, किसके हाथ बाजी?

निगम चुनावों का परिणाम राजधानी की राजनीति के भविष्य को तय करेगा। भाजपा के सामने अपना गढ़ बचाने की चुनौती है। वह 15 वर्ष से निगम की सत्ता में काबिज है तो AAP भी जीत के लिए जोर लगा रही है।

कांग्रेस कमजोर, बसपा बाहर; दिल्ली में बदल चुका MCD का खेल, किसके हाथ बाजी?
Sudhir Jhaगौरव त्यागी,नई दिल्लीSun, 04 Dec 2022 08:33 AM

इस खबर को सुनें

0:00
/
ऐप पर पढ़ें

निगम चुनावों का परिणाम राजधानी की राजनीति के भविष्य को तय करेगा। भाजपा के सामने अपना गढ़ बचाने की चुनौती है। वह 15 वर्ष से निगम की सत्ता में काबिज है तो आम आदमी पार्टी निगम चुनाव जीतकर दिल्ली में अपनी पकड़ को और मजबूत करने के प्रयास में है। कांग्रेस के सामने अपना वजूद बचाने का सवाल है।

पांच वर्ष पहले हुए निगम चुनावों में भाजपा ने बड़ी जीत हासिल की थी। उसे निगम में 181 सीटों पर जीत मिली थी। पहली बार निगम चुनाव में उतरी आप ने 48 सीटों पर जीत हासिल की। कांग्रेस तीसरे नंबर पर खिसक गई और उसे मात्र तीस सीटों पर संतोष करना पड़ा। भाजपा ने निगम में चौथी बार काबिज होने के लिए प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी। दिल्ली के नेताओं के साथ-साथ दूसरे प्रदेशों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों को चुनाव प्रचार के लिए उतारा गया। आम आदमी पार्टी ने भी रोड शो और जनसभाओं के सहारे माहौल को गर्माया।

अन्य दलों, उम्मीदवारों को मिले वोट दिखाएंगे असर चुनाव में अन्य दलों या स्वतंत्र प्रत्याशियों को मिले वोट भी अपना असर दिखाएंगे। वर्ष 2012 के चुनाव में करीब 33 फीसदी वोट अन्य के खाते में गया था। 2017 में यह घटकर करीब 17 फीसदी रह गया। भाजपा, कांग्रेस और आप की त्रिकोणीय लड़ाई में भाजपा को बड़ी सफलता मिली थी। वर्ष 2007 और 2012 के चुनावों में बसपा को दस प्रतिशत से ज्यादा वोट मिलते थे। 2017 के चुनावों से बसपा दौड़ से बाहर हो गई। इस बार चुनाव में छह राष्ट्रीय और एक प्रादेशिक दल हिस्सा ले रहे हैं। मतों का प्रतिशत अन्य के खाते में गया तो यह परिणाम पर अपना रंग दिखाएगा।

मत प्रतिशत बढ़ाने में जुटे सभी दल
निगम चुनावों में सभी दल मत प्रतिशत बढ़ाने में जुटे हैं। इस बार मतों का थोड़ा भी अंतर चुनाव परिणाम को बड़े स्तर पर प्रभावित कर सकता है। बीते चुनाव में भाजपा ने 36 फीसदी मतों के साथ 181 सीटों पर जीत हासिल की थी। भाजपा को सबसे ज्यादा मत पूर्वी दिल्ली में 39 फीसदी मिले थे। आम आदमी पार्टी को पहले ही चुनाव में 26 फीसदी से ज्यादा मत मिले थे। कांग्रेस को नुकसान का सामना करना पड़ा था। 2012 के चुनाव में कांग्रेस को तीस फीसदी से ज्यादा मत मिले थे, लेकिन 2017 में उसका मत प्रतिशत घटकर 21 प्रतिशत पर आ गया। इसके चलते कांग्रेस 77 पार्षदों से घटकर 30 पर आ गई थी।

परिसीमन और सीटों का गणित बदला
इस बार चुनाव में परिसीमन और सीटों का गणित बदल गया है। वर्ष 2017 में हुए चुनावों में तीन निगमों के लिए 272 वार्ड थे। अब निगमों का एकीकरण कर दिया गया है। तीनों निगमों को आपस में मिलाकर एक निगम बनाया गया है। वार्ड की संख्या भी 272 से घटकर 250 रह गई है। इसके लिए नया परिसीमन किया गया। परिसीमन के चलते सीटों का गणित बदल गया है। कुछ वार्ड छोटे और कुछ वार्ड बड़े हो गए हैं। परिसीमन के चलते कई सीटों पर पार्षदों को अपनी सीट बदलकर चुनाव लड़ना पड़ा। परिसीमन का असर निगम के चुनाव परिणामों पर भी पड़ेगा।