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दिल्ली के बुराड़ी में अवैध प्लॉट की बाउंड्री में MCD का चला बुलडोजर, पीड़ितों ने निगम की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए; बिल्डरों पर कार्रवाई की मांग

बुराड़ी स्थित कमलपुर के कमल विहार में 3.5 एकड़ और 1.5 एकड़ निजी कृषि भूमि पर कार्रवाई हुई। इसके अलावा मल्का गंज वार्ड में एक अवैध ढांचे को ध्वस्त किया गया। बुराड़ी में कार्रवाई के दौरान दिल्ली पुलिस

दिल्ली के बुराड़ी में अवैध प्लॉट की बाउंड्री में MCD का चला बुलडोजर, पीड़ितों ने निगम की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए; बिल्डरों पर कार्रवाई की मांग
Swati Kumariराहुल मानव,नई दिल्लीThu, 04 Jan 2024 09:17 PM
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दिल्ली में अवैध निर्माण पर दिल्ली नगर निगम की कार्रवाई जारी है। निगम ने गुरुवार को विभिन्न जगहों पर अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की। कई प्लॉटों की चारदीवारी व ढांचे को ध्वस्त किया। बुराड़ी वार्ड में कुल 5 एकड़ निजी कृषि भूमि पर अवैध रूप से बनाए गए प्लॉटों की बाउंड्री को तोड़ा। बुराड़ी स्थित कमलपुर के कमल विहार में 3.5 एकड़ और 1.5 एकड़ निजी कृषि भूमि पर कार्रवाई हुई। इसके अलावा मल्का गंज वार्ड में एक अवैध ढांचे को ध्वस्त किया गया। बुराड़ी में कार्रवाई के दौरान दिल्ली पुलिस के कई कॉन्स्टेबल भी मौजूद रहे। साथ ही तीन बुल्डोजर से अवैध निर्माण को गिराया। निगम की कार्रवाई 31 जनवरी तक जारी रहेगी। निगम की कार्रवाई के खिलाफ कई पीड़ितों ने सवाल खड़े किए। पीड़ित लोगों ने कहा कि बिल्डरों ने उन्हें यह जमीन बेची। यहां पर और भी कई मकान बने हुए हैं। उन्हें क्यों नहीं तोड़ा गया। कई लोगों ने गांव की जमीन बेचकर यहां पर 27 गज, 50 गज और 100 गज के प्लॉट खरीदे हैं। इन पर लोगों ने 7.5 से 28 लाख रुपये तक खर्च किए हैं। लोगों ने मांग की है कि अवैध रूप से प्लॉट बेचने वाले बिल्डरों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। 

अवैध निर्माण करने वाले बिल्डरों के प्रति कर रहे हैं जागरूक : निगम
निगम के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2011 में निजी पावर ऑफ अटॉर्नी के तहत जमीन को ट्रांसफर कराने पर प्रतिबंध लगा दिया था। पुराने बसे हुए मकानों व घरों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। अनधिकृत कॉलोनियों में यह पुराने मकानों को नियमित करने की प्रक्रिया जारी है। सिर्फ निजी कृषि भूमि व अन्य सरकारी जमीन पर अवैध रूप से नए निर्माण कार्य को रोक रहे हैं। कृषि भूमि पर सिर्फ खेती करने की ही अनुमति है। लोगों को भी यह संदेश दे रहे हैं कि वह ऐसे अवैध निर्माण करने वाले बिल्डरों के धोखे में न फंसे। इसे लेकर लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। बिल्डरों पर भी कार्रवाई हो रही है। सरकारी मान्यता प्राप्त भूमि पर सेल डीड के जरिए ही जमीन के उपयोग के अनुसार प्लॉट व मकान के मालिकाना हक के लिए दस्तावेज अनिवार्य होते हैं। इसके अलावा निजी कृषि भूमि, सरकारी जमीन में अवैध रूप से नोटरी के जरिए प्लॉट को कानूनी रूप से प्रमाणित किया जा रहा है। तो यह गलत है। इस पर रोक लगनी चाहिए। इस संबंध में लोगों के बीच जागरूकता फैलाई जा रही है। 

पीड़ितों के बयान 
प्रीति कुमारी ने कहा, 'मैं घरों में बर्तन साफ करने का काम करती हूं। मैंने और मेरे परिवार ने बहुत मुश्किल से रकम जोड़कर कर प्लॉट की चारदीवारी और अन्य काम करवाया था। मेरा 1 से 2 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। एक बिल्डर से 50 गज जमीन खरीदी थी। यह कार्रवाई गलत है।' वहीं रोमी कहती हैं, मैं निजी स्कूल में कॉन्ट्रैक्ट पर काम करके मैथ्स और साइंस विषयों को छात्रों को पढ़ाती हूं। मैंने 100 गज का प्लॉट बिल्डर से खरीदा। मेरे प्लॉट की चारदीवारी को तोड़ दिया गया। यहां पर कई जगहों पर अवैध निर्माण के ढांचे मौजूद हैं। लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।'

स्थानीय निवासी ने विनोद कुमार मौर्या ने कहा, 'मैं दीवारों पर पेंट लगाने का काम करता हूं। मैंने बहुत मुश्किल से रकम जोड़कर 27 गज जमीन पर एक छोटा मकान बनाया था। इसे तोड़ दिया गया। मेरा 1 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। कर्जा लेकर प्लॉट खरीदा था। प्रशासन गरीबों को ही परेशान कर रहा है।' आस्था कहती हैं, 'मेरे परिवार ने बिहार के सिवान जिले में रसूलपुर में स्थित गांव की जमीन को बेच दिया। उस रकम से 50 गज का प्लॉट खरीदा। मेरे प्लॉट में बनाए गए ढांचे को ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई गलत है। सरकारी व कृषि भूमि पर अवैध रूप से प्लॉट बेचने वाले बिल्डरों पर कार्रवाई होनी चाहिए।'

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