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9 अगस्त, 2020|8:00|IST

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आठवां फेरा : महिलाओं के समान अधिकार के लिए आठवां फेरा जरूरी

आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान की मुहिम आठवां फेरा के तहत सोमवार को गाजियाबाद कार्यालय में संवाद आयोजित किया गया। इस दौरान महिलाओं ने मुखर होकर अपनी बात रखी। कई ऐसे पल भी आए, जब अपने संघर्षों को याद कर उनकी आंखें नम हो गईंं मगर कार्यक्रम के समापन के वक्त महिलाएं नई ऊर्जा और संकल्पों के साथ विदा हुईं।

हिन्दुस्तान की ओर से आयोजित संवाद में आई महिलाओं ने कहा कि समान अधिकार के लिए आठवां फेरा जरूरी है। जब महिलाएं घर पर सभी को सम्मान दे सकती हैं तो क्या वह अपने हिस्से का सम्मान प्राप्त करने की अधिकारी भी हैं। माया ममता चैरिटेबल ट्रस्ट की अध्यक्ष ममता गुप्ता ने कहा कि परिवार के पुरुष जो भी करें वह सब ठीक है, लेकिन महिलाएं गलत काम का भी विरोध नहीं कर सकती। अंत में उन्हें ही सबसे ज्यादा इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।

आनंद सेवा समिति की संस्थापिका ममता सिंह ने कहा कि सात फेरे लेने से ही केवल पति-पत्नी नहीं बन जाते। उन्हें हर कदम पर एक दूसरे की जरूरत पड़ती है। महिला अकेलेपन से टूट जाती हैं। डासना पीएचसी प्रभारी एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी ओझा का कहना है कि आदमी की सोच परवरिश पर निर्भर करती है। पुरुष की सोच निर्धारित करना एक महिला के हाथ में होता है। शिवांगी शर्मा ने कहा कि आठवां फेरा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। यह वास्तव में विश्वास का फेरा है। पहले फेरे से ही महिला को केवल बताया जाता है कि वह परिवार के प्रति समर्पित रहेगी। लेकिन उसके अधिकारी की बात कोई नहीं करता। मीनाक्षी सिंह ने कहा कि समय के साथ सोच बदलने की जरूरत है। अब मां को अपने बेटों को इस आठवें फेरे के बारे में घर से सिखाना होगा। शालू पाण्डेय ने कहा कि आज भी महिलाएं कही न कही बेडियों में जकड़ी हुई हैं। यदि घर पर पति बेहतर व्यवहार करके हैं तो वह खुद बाहर जाकर बेहतर काम कर सकती हैं। शिक्षाविद् डॉ. ज्योति यादव कि आज भी महिलाओं फैसला लेने की क्षमता कम है। इसके लिए पढ़ाई जरूरी है। परिवार परामर्श केंद्र की काउंसलर आफताब नाज ने कहा कि पति पत्नी एक दूसरे की धुरी है। फिर महिला को समान अधिकार क्यो नहीं है। इसका बड़ा कारण यह भी है कि महिलाओं ने अपनी आजादी का गलत इस्तेमाल किया है। इसके उसने सम्मान में कमी आई है। सुमन गोयल ने कहा कि सब कुछ परवरिश पर निर्भर है। महिलाओं को समान अधिकार पाने के लिए लड़ना होगा।

महिलाओं की प्रतिक्रिया

''आठवां फेरा बहुत जरूरी है। अब से शुरुआत करें आने वाली पीढ़ी अपने बच्चों से शुरू करें। इससे कल बेहतर होगा।'' -पूजा शर्मा, सदस्य, राष्ट्रीय सैनिक संस्था

''इस करवा चौथ आठवां फेरा महिलाओं के लिए जीवन का सबसे बड़ा उपहार होगा। जो पहले नहीं किया अब करें।'' -रागिनी अग्निहोत्री, शिक्षिका

''सात फेरों को लेते समय दिए सभी वचन लोग नहीं निभा पाते। आठवें फेरे के आगे सात फेरों की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।'' -डॉ. वानी पुरी रावत, चिकित्सक

''सात फेरों में सबकुछ है मगर इनका पालन नहीं हो रहा है। यदि इसका पालन हो तो सात फेरों की भी जरूरत नहीं।'' -लक्ष्मी त्यागी, प्रधानाचार्या

''मेरे पति हर काम में साथ देते हैं। मैं समाज सेवा के साथ खुद के लिए कुछ भी कर पाती हूं यह पति के समर्थन की वजह से ही हो पाता है।'' -डॉ. गीता अग्रवाल, शिक्षाविद्

''समय के साथ लोगों की सोच में भी बदलाव आया है। अब महिलाओं को पहले के मुकाबले ज्यादा सम्मान मिलता है।'' -अनिता सक्सेना, सदस्य लक्ष्य फाउंडेशन

''महिलाओं की दशा सुधारने के लिए समाज का शिक्षित होना जरूरी है। शिक्षित परिवारों में महिलाओं की स्थित बेहतर है।'' -विधु गर्ग, विधु चैरिटेबल ट्रस्ट,

''घर में माहौल को बिगाड़ने में पुरुषों से ज्यादा महिलाओं की भागीदारी होती है। पुरुष स्वतंत्रता दे तो एक महिला बाधा बन जाती है।'' -शैली सेठी, समाजसेविका

''आज वाकई समाज में आठवें फेरे की शुरुआत की जरुरत है। महिलाएं समाज का आधार होती हैं। उन्हें और स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।'' -ज्योति शर्मा, समाज सेविका

''समान अधिकार पाने के लिए महिलाओं को खुद भी जागरूक होना पड़ेगा। कर्तव्यों का भी पालन करना होगा।'' -डॉ. वीना मित्तल, समाज सेविका

''मेरे पति मेरा साथ देते हैं विश्वास करते हैं और स्वतंत्रता देते हैं तभी मैं समाज सेवा और पति के विजनेस में हाथ बंटा पाती हूं।'' -संध्या श्रीवास्तव, समाजसेविका

''एक महिला समाज और सोच का आधार है। एक महिला ही सबसे ज्यादा महिला का उत्पीड़न करती और कराती है।'' -गार्गी त्यागी, काउंसलर

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  • Web Title:mahilaon ke samaan adhikar ke liye aathwa phera jaroori