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मुख्य सचिव से जुड़ी रिपोर्ट खारिज किए जाने पर बिफरी केजरीवाल सरकार, क्या कहा?

बामनोली जमीन अधिग्रहण मामले में मुख्य सचिव नरेश कुमार से जुड़ी रिपोर्ट को एलजी वीके सक्सेना की ओर से खारिज किए जाने पर केजरीवाल सरकार ने गहरी नाराजगी जताई है। जानें दिल्ली सरकार ने क्या कहा...

मुख्य सचिव से जुड़ी रिपोर्ट खारिज किए जाने पर बिफरी केजरीवाल सरकार, क्या कहा?
Krishna Singhभाषा,नई दिल्लीMon, 20 Nov 2023 12:59 AM
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दिल्ली के एलजी वीके सक्सेना ने सतर्कता मंत्री आतिशी की उस रिपोर्ट पर विचार करने से इनकार कर दिया है, जिसमें बामनोली जमीन अधिग्रहण मामले में मुख्य सचिव नरेश कुमार की 'प्रथम दृष्टया संलिप्तता' का आरोप लगाया गया है। राज निवास के सूत्रों ने रविवार को बताया कि उपराज्यपाल ने रिपोर्ट पर विचार करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि यह 'पूरी तरह से मंत्री के पूर्वाग्रह पर आधारित' मालूम पड़ती है। वहीं इस घटनाक्रम पर केजरीवाल सरकार ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह 'उपराज्यपाल द्वारा अपने पसंदीदा अधिकारियों यानी मुख्य सचिव और संभागीय आयुक्त को बचाने का एक निर्लज्ज प्रयास है।

समाचार एजेंसी पीटीआई भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली सरकार ने कहा कि उपराज्यपाल को 'मामले में सीबीआई की निष्पक्ष जांच की अनुमति देनी चाहिए। साथ ही इस मामले में पूर्वाग्रह अपनाने और कुछ व्यक्तियों के प्रति लगाव के कारण उन्हें बचाने से बचना चाहिए। वहीं राज निवास के सूत्रों ने कहा कि एलजी वीके सक्सेना ने दिल्ली सरकार की रिपोर्ट पर अपनी टिप्पणी में कहा कि इससे मामले में जारी जांच में मदद मिलने के बजाय उसमें बाधा पैदा हो सकती है।

उपराज्यपाल ने दिल्ली सरकार की ओर से भेजी गई फाइल पर अपनी टिप्पणी में कहा- मुझे माननीय (सतर्कता) मंत्री द्वारा प्रस्तुत और माननीय मुख्यमंत्री द्वारा समर्थित 'शिकायतों' पर 'प्रारंभिक रिपोर्ट' मिली है। यह आश्चर्यजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है कि सतर्कता से संबंधित संवेदनशील मामलों से जुड़ी यह रिपोर्ट गोपनीय लिफाफे में मेरे सचिवालय को भेजी गई लेकिन पहले ही सार्वजनिक कर दी गई। इसकी डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक प्रतियां खुले तौर पर उपलब्ध हैं। इसके विवरण के बारे में मीडिया में खबरें प्रसारित की गई हैं।

इसमें कहा गया है कि रिपोर्ट का चुनिंदा हिस्सा मीडिया में लीक हो गया, जिसे देख प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि इस कथित जांच का मकसद सच्चाई का पता लगाना नहीं, वरन 'मीडिया ट्रायल' शुरू करना और पूरे मुद्दे का राजनीतिकरण करना है। ऐसे में जब यह मामला पहले ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित है। कोई भी यह सोचने पर मजबूर हो सकता है कि क्या यह सार्वजनिक पूर्वाग्रह पैदा करने जैसा नहीं है, जिसका उद्देश्य माननीय अदालतों को प्रभावित करना है।

वीके सक्सेना ने कहा- इस मामले की जांच भी सीबीआई पहले से ही कर रही है। चूंकि मुख्य सचिव और मंडलायुक्त की सिफारिशों के आधार पर मेरे द्वारा अनुमोदित मामले की पहले से ही सीबीआई द्वारा जांच की जा रही है, मेरा मानना है कि मेरे समक्ष जो सिफारिश की गई है वह पूर्वाग्रह से ग्रसित है और विचार करने योग्य नहीं है। अत: इस रिपोर्ट पर विचार नहीं किया जा सकता है। वहीं दिल्ली सरकार ने कहा कि यह उपराज्यपाल द्वारा अपने पसंदीदा अधिकारियों यानी मुख्य सचिव और संभागीय आयुक्त को बचाने की कोशिश है।

दूसरी ओर मुख्य सचिव कुमार ने आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि निहित स्वार्थ वाले ऐसे लोग उन पर कीचड़ उछाल रहे हैं, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार को लेकर सतर्कता कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कार्यालय ने सतर्कता मंत्री की 670 पन्नों की रिपोर्ट बुधवार को उपराज्यपाल को सौंपी थी। रिपोर्ट में भूमि अधिग्रहण के विषय में कुमार पर प्रथम दृष्टया मिलीभगत का आरोप लगाया गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मामले में अनुचित लाभ 897 करोड़ रुपये से ज्यादा का है।

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