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जमानत मिली तो फाइलों पर साइन नहीं करेंगे केजरीवाल, SC ने ऐसा क्यों कहा

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को दिल्ली शराब घोटाले से जुड़े केस की सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि केजरीवाल को यदि जमानत दी जाती है तो वे फाइलों पर साइन नहीं करेंगे। कोर्ट 9 मई को अंतरिम जमानत पर फैसला देगी।

जमानत मिली तो फाइलों पर साइन नहीं करेंगे केजरीवाल, SC ने ऐसा क्यों कहा
Sneha Baluniहिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 08 May 2024 05:40 AM
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दिल्ली के कथित आबकारी घोटाले में मंगलवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत पर फैसला सुनाए बिना सुप्रीम कोर्ट की बेंच उठ गई। शीर्ष अदालत ने कहा, यदि लोकसभा चुनाव नहीं होते तो हम अंतरिम जमानत देने के मुद्दे पर विचार नहीं करते। अदालत ने साफ किया कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अंतरिम रूप से रिहा होने पर केजरीवाल को बतौर सीएम कार्यालय में उपस्थित होने और आधिकारिक फाइलों पर हस्ताक्षर करने की अनुमति देने के लिए इच्छुक नहीं हैं।

पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अंतरिम जमानत के मसले पर आदेश सुरक्षित रख लिया था और कहा था कि दो बजे आदेश पारित करेंगे। बाद में अदालत ने इस मामले की सुनवाई अस्थायी तौर पर गुरुवार यानी 9 मई के लिए स्थगित कर दिया। हालांकि, पीठ ने कहा कि यदि उस दिन इस पर विचार नहीं किया गया, तो सुनवाई अगले सप्ताह के लिए आगे बढ़ा दी जाएगी। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री छह माह तक ईडी द्वारा जारी समन से बचते रहे हैं। कृपया कोई अपवाद न बनाएं क्योंकि यह वास्तविक आम आदमी को हतोत्साहित करेगा और यह दर्शाता है कि यदि आप किसी पद पर हैं तो आपको लाभ मिलेगा।

वे बिना विभाग के मुख्यमंत्री मेहता

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि वह (केजरीवाल) किसी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं। वे बिना मंत्रालय और विभाग के मुख्यमंत्री हैं। मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से केजरीवाल को अंतरिम जमानत के मुद्दे पर बहस करने के लिए कहा। इस पर मेहता ने कहा कि यदि हमें अंतरिम जमानत का जवाब देने के लिए कहा जा रहा है तो पहले शीर्ष अदालत को उनकी (केजरीवाल) भूमिका पर सुनवाई करनी चाहिए। वह चुनाव में प्रचार नहीं कर रहे हैं तो आसमान नहीं गिर जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इस मामले में गुण-दोष पर नहीं जा रहे हैं, सिर्फ अंतरिम जमानत पर दलील रखिए।

उपराज्यपाल अड़ंगा न लगाएं: सिंघवी

जस्टिस संजीव खन्ना और दीपांकर दत्ता की पीठ ने जमानत की शर्तों को लेकर मुख्यमंत्री की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी से सवाल जवाब करते हुए यह टिप्पणी की। इसके जवाब में सिंघवी ने अदालत को भरोसा दिया कि यदि उन्हें (केजरीवाल) अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाता है तो वह किसी भी आधिकारिक फाइल पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे, बशर्तें उपराज्यपाल इस आधार पर कोई भी आधिकारिक काम यह कहकर न रोकें कि फाइलों पर मुख्यमंत्री ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इससे पहले सिंघवी ने कहा कि फाइल पर मेरे (केजरीवाल) हस्ताक्षर किए बगैर सरकार कैसे चल सकती है? मेरे मुवक्किल हर दिन 10 फाइलों पर हस्ताक्षर कर रहे हैं और सरकार के कामकाज/ नियमों के लेनदेन को देख रहे हैं।