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'यौन शोषण के शिकार बच्चों को न्याय के लिए गुजरात में साल 2071 व अरुणाचल में 2117 तक करना होगा इंतजार'

नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने बाल यौन शोषण की घटनाओं को राष्ट्रीय आपातकाल बताया। मंगलवार को दिल्ली के इंडिया हेबिटेट सेंटर में हुए कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि भारत में बाल यौन शोषण की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने इस दौरान नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने बच्चों के यौन शोषण पर एक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में बताया कि देश में यौन शोषण के शिकार बच्चों के साल 2016 तक लंबित मामले को निपटाने में ही अभी 99 साल लग जाएंगे। सत्यार्थी के मुताबिक अगर 2016 तक पोस्को एक्ट के तहत दर्ज मामलों के निपटारे की बात करें तो देश के कई राज्यों में पीड़ितों को कई सालों तक न्याय का इंतजार करना होगा। 

कैलाश सत्यार्थी ने बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों की समयबद्ध सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) जैसा एक सक्षम 'राष्ट्रीय बाल न्यायाधिकरण' बनाए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर बच्चों को न्याय के लिए हमारी अदालतों में दशकों तक इंतजार करना पड़े तो यह हम सबकी सामूहिक विफलता है। उन्होंने कहा कि अगर 15 साल की किसी लड़की का शोषण होता है तो वह अपने नाती-पोतों के साथ 70 साल की उम्र तक सुनवाई कोर्ट की सुनवाई में हिस्सा लेती रहेगी। उन्होंने कहा कि बाल न्यायाधिकरण बनाने के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि यह एनजीटी की तरह सक्षम हो। आज एनजीटी के सक्षम होने से पर्यावरण को लेकर चीजें बदलीं हैं। एनजीटी ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों में डर पैदा किया है। अगर बच्चों के लिए भी एक ताकतवर न्यायाधिकरण होगा तो मामलों की जल्द सुनवाई होगी और देश में बाल अधिकारों की बेहतर ढंग से सुरक्षा हो सकेगी। 

बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा को NGT की तर्ज पर बने बाल न्यायाधिकरण

दिल्ली में 2029 और यूपी में 2026 तक न्याय मिल पाएगा
कैलाश सत्यार्थी ने इस मौके पर 'चिन्ड्रन कैन नॉट वेट' रिपोर्ट जारी कर बाल यौन शोषण के लंबित मामलों की सुनवाई पर चिंता जताई। इस रिपोर्ट के मुताबिक अगर 2016 तक के मामलों की बात करें तो अरुणाचल प्रदेश में बच्चों के यौन शोषण के मामले का निपटारा करने में 99 साल लग जाएंगे। वहीं यूपी, राजस्थान में यौन शोषण के शिकार बच्चों को न्याय के लिए 2026 तक इंतजार करना पड़ेगा। वहीं गुजरात में उन्हें 2071 और अरुणाचल में 2117 तक न्याय मिल पायेगा।  इस रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में बाल यौन शोषण के शिकार बच्चों को न्याय के लिए 2029 तक इंतजार करना पडेगा। 2016 में भारतीय दंड संहिता और पॉक्सो के तहत बच्चों से जुड़े अपराध के 1,06,958 मामले दर्ज हुए।    

इन राज्यों में न्याय के लिए सबसे कम इंतजार करना होगा

राज्य  -   न्याय के लिए इस साल तक इंतजार करना होगा

पंजाब -  2018

हरियाणा - 2019

आंध्रप्रदेश - 2019  

मध्यप्रदेश - 2020

तमिलनाडु - 2020 

गोवा - 2021

उत्तराखंड - 2023

उत्तर प्रदेश - 2026

इन राज्यों में सबसे अधिक इंतजार करना होगा

राज्य  -   न्याय के लिए इस साल तक इंतजार करना होगा
अरुणाचल प्रदेश - 2117

गुजरात - 2071

अंडमान एवं निकोबार - 2055

मणिपुर - 2048

केरल- 2039

प. बंगाल - 2035

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  • Web Title:Kailash Satyarthi releases report on sexual abuse of children