Jurmana doguna hua to ghaziabad mein niyam todne wale hue aadhe - New Traffic Fines :जुर्माना दोगुना होते ही यहां नियम तोड़ने वाले हुए आधे DA Image

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New Traffic Fines :जुर्माना दोगुना होते ही यहां नियम तोड़ने वाले हुए आधे

हेलमेट व सीट बेल्ट नहीं लगाने पर दो गुना जुर्माना लगने से लोग अब ट्रैफिक नियमों का पालन करने को लेकर जागरूक हो रहे हैं। अगस्त और सितंबर माह के चालानों की संख्या में 47 फीसदी तक कमी आई है। हालांकि, अभी तक गाजियाबाद में पुरानी दरों के आधार पर ही चालान किए जा रहे हैं। वहीं प्रदूषण प्रमाणपत्र बनवाने वालों की संख्या भी दोगुनी हो गई है।

केंद्र सरकार की ओर से ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना शुल्क बढ़ाने के आदेश को जारी कर दिया है, लेकिन प्रदेश सरकार की ओर से इस पर कोई आदेश नहीं जारी किया गया। जुर्माना शुल्क बढ़ने के डर से वाहन चालक भी अब ट्रैफिक नियमों का निरंतर पालन कर रहे हैं। इससे जनपद में होने वाले चालान में भी कमी आई है। पिछले माह की तुलना में सितंबर में लगभग आधे चालान कटे हैं।

ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने भी बताया कि जिस मार्ग पर एक दिन में ट्रैफिक नियम उल्लंघन करने वाले 50 लोगों के चालान होते थे। वहां अब 20 से 30 लोग के चालान होते हैं। 95 फीसदी लोग अब दोपहिया वाहनों पर हेलमेट और कार में सीटबेल्ट पहन कर निकलते हैं। एक दिन में करीब 400 से 500 चालानों की संख्या में कमी आई है।

चालान के डर ने बढ़ाई हेलमेट की बिक्री : एक हजार रुपये के चालान के डर से हेलमेट की दुकानों पर बिक्री बढ़ गई है। दिन भर हेलमेट खरीदने वाले चालकों की कतारें लगी रहती हैं। मेरठ रोड पर मुरादनगर और दुहाई स्थित दुकानों पर एक दिन में 100-150 हेलमेट की बिक्री हो रही है। खरीदारों की बढ़ती संख्या को देखते हुए दुकादारों ने भी हेलमेट के दाम बढ़ा दिए हैं। 500 रुपये में मिलने वाला हेलमेट 700 व 800 रुपये में बेच रहे हैं।

''एक से सात अगस्त तक जनपद में कुल 9214 चालान हुए हैं। वहीं एक सितंबर से सात सितंबर तक केवल 4432 चालान हुए हैं। इसमें अभी भी सबसे अधिक चालान बिना हेलमेट और सीटबेल्ट के हो रहे हैं। हालांकि अभी जनपद में पुराने नियामवली के अनुसार ही चालान किए जा रहे हैं, लेकिन सख्ती को देखते हुए लोग नियमों के पालन करने में जागरूक हो रहे हैं।'' -एसएन सिंह, पुलिस अधीक्षक यातायात

लाइसेंस बनवाने के लिए लगी होड़

चालान होने के डर से आवेदकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। पिछले माह शुरूआत के सात दिनों में 1300 लोगों ने आवेदन किया था। इस माह में संख्या बढ़कर 1550 के पार पहुंच गई है। एआरटीओ विश्वजीत सिंह ने बताया कि ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदन के बाद एक नियत तारीख पर आवेदक को टेस्ट के लिए आना होता है। विभाग की ओर से एक तारीख पर 250 आवेदकों को ही टाइम स्लॉट मिलता है। कभी-कभी कुछ आवश्यकता पड़ने पर प्रार्थना पत्र लिखकर जल्द डीएल बनवा सकते हैं।

प्रदूषण प्रमाण पत्र के लिए लग रही लाइन

जनपद में 115 प्रदूषण जांच केंद्र थे। प्रदूषण जांच केंद्रों को परिवहन विभाग की वेबसाइट से जोड़ने के लिए ऑनलाइन कर दिया गया था। ऑनलाइन करने के लिए केवल 65 केंद्रों ने ही पंजीकरण कराया जिससे 40 केंद्र बंद हो गए। बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र के वाहन का चलाने में दो हजार रुपये जुर्माना है। इसके चलते प्रमाण पत्र बनवाने वालों की संख्या केंद्रों पर ढाई गुनी हो गई है। केंद्र संचालक के मुताबिक पहले एक दिन में 50 लोग ही प्रमाण पत्र बनवाते थे। अब 250 तक पहुंच जाती है।

वाहनों के दस्तावेज डिजिटल लॉकर में रखें

ट्रांस हिंडन (संवाददाता) | वाहन चलाते समय अब लोगों को कागजात रखने से मुक्ति मिल जाएगी। गाजियाबाद पुलिस डिजिलॉकर और ऑनलाइन डॉक्यूमेंट्स को भी मान्य करेगी। इस बाबत आईजी जोन मेरठ आलोक सिंह ने निर्देश जारी किए हैं। निर्देश में सभी इलेक्ट्रानिक और डिजिटल कागजातों को मान्य करने की बात कही गई है।

आईजी जोन मेरठ ने 19 नवंबर 2018 को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से इलेक्ट्रोनिक दस्तावेजों को भी जांच के दौरान मान्य होने के संबंध में स्थानीय पुलिस को निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत सभी वाहनों के रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंश, फिटनेस,परमिट, ड्राइविंग लाइसेंस की मूल कॉपी या इलेक्ट्रानिक कॉपी को डिजीलॉकर या एमपरिवहन एप पर दिखाने पर वैध प्रमाण माना जाएगा।

इलेक्ट्रानिक कॉपी दिखाने पर किसी भी नागरिक को सुरक्षा अधिकारी द्वारा परेशान नहीं किया जाएगा। इसके बाद से गाजियाबाद समेत मेरठ जोन के सभी जिलों में यह निर्देश जारी किया गया है। इसके साथ ही परिवहन विभाग के एप एमपरिवहन एप पर संरक्षित कागजातों को भी पुलिस अधिकारी द्वारा मांगे जाने पर प्रमाण के तौर पर प्रस्तुत किया जा सकता है।

आईजी कार्यालय के ट्विटर हैंडल से भी इस संबंध में ट्वीट किया गया है। पुलिस अधीक्षक (यातायात) एसएन सिंह ने बताया कि आईजी जोन मेरठ के आदेश मिले हैं। जांच के दौरान पुलिस एवं यातायातकर्मी डिजिलॉकर में सुरक्षित दस्तावेज दिखाने पर उन्हें माना जा रहा है। सभी यातायात पुलिसकर्मियों को भी इसकी जानकारी देने के साथ ही लोगों को भी इसके प्रति जागरुक किया जा रहा है।

ऐसे इस्तेमाल करें डिजिलॉकर

डिजिलॉकर का इस्तेमाल उपभोक्ता अपने आधार नंबर और आधार से रजिस्टर्ड मोबाइल के जरिए कर सकते हैं। डिजिलॉकर पूरी तरह से नि:शुल्क है। डिजीलॉकर में उपभोक्ता अपने आधार नंबर से लॉगइन करते हैं। जिसके बाद रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर एक ओटीपी प्राप्त होता है जिसके बाद आप डिजी लॉकर का इस्तेमाल अपने कागजातों को इलेक्ट्रानिक तौर पर सुरक्षित करने के लिए कर सकते हैं। 

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