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हिंदी न्यूज़ NCRJNU में बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री नहीं हुई प्रदर्शित, छात्रों ने थाने में दर्ज कराई पथराव की शिकायत; ABVP पर आरोप

JNU में बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री नहीं हुई प्रदर्शित, छात्रों ने थाने में दर्ज कराई पथराव की शिकायत; ABVP पर आरोप

छात्र पुलिस स्टेशन तक मार्च करते हुए पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि जब प्रतिबंधित बीबीसी डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया जा रहा था तब पथराव किया गया। जेएनयूएसयू ने अपनी शिकायत दर्ज करवाई है।

JNU में बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री नहीं हुई प्रदर्शित, छात्रों ने थाने में दर्ज कराई पथराव की शिकायत; ABVP पर आरोप
Nishant Nandanलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 25 Jan 2023 07:04 AM

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जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में एक बार फिर बवाल हुआ है। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बनी विवादित डॉक्यूमेंट्री के प्रदर्शन को लेकर यह बवाल हुआ है। जेएनयूएसयू नाम के एक छात्र संगठन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर बीबीसी के विवादित डॉक्यूमेंट्री के प्रदर्शन की बात कही थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इस संगठन से जुड़े छात्रों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रसंघ के कार्यालय का बिजली और इंटरनेट कनेक्शन काट दिया। हालांकि, उन्होंने अपने मोबाइल फोन और अन्य उपकरणों पर वृत्तचित्र देखा। जेएनयू प्रशासन के एक अधिकारी ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''विश्वविद्यालय में बिजली आपूर्ति लाइन में गंभीर खराबी आ गई है। हम इसकी जांच कर रहे हैं। इंजीनियरिंग विभाग कह रहा है कि इसे जल्द से जल्द सुलझा लिया जाएगा।''

डॉक्यूमेंट्री देखने के लिए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) कार्यालय के बाहर इकट्ठा हुए छात्रों ने दावा किया कि जब वे इसे अपने फोन पर देख रहे थे तो उन पर पत्थर फेंके गए। छात्रों के आरोपों और दावों पर जेएनयू प्रशासन की ओर से भी तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इधर जेएनयू में हुए इस बवाल के बाद वहां के कुछ छात्रों ने वसंत कुंज में एक पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

छात्र पुलिस स्टेशन तक मार्च करते हुए पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि जब प्रतिबंधित बीबीसी डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया जा रहा था तब पथराव किया गया। जेएनयूएसयू ने अपनी शिकायत दर्ज करवाई है। पुलिस की तरफ से उन्हें आश्वासन दिया गया है कि वो इस घटना की जांच करेंगे। छात्र संगठन की तरफ से कहा गया है कि हमने उन लोगों के नाम और डिटेल पुलिस को दिये हैं जो उनमें शामिल हैं। संगठन का आरोप है कि पथराव की इस घटना में एक अन्य छात्र संगठन एबीवीपी का हाथ है। जिसके बाद हमने प्रदर्शन बंद कर दिया है। हम जेएनयू प्रॉक्टर कार्यालय में भी अपनी शिकायत दर्ज करवाएंगे।

वृत्तचित्र देखने गए असरार अहमद ने कहा, ''हम शांति से (अपने फोन पर) वृत्तचित्र देख रहे थे, लेकिन कुछ लोगों ने हम पर पत्थर फेंके। अंधेरा होने के कारण पथराव करने वालों की पहचान नहीं हो सकी।'' वृत्तचित्र के प्रदर्शन के लिए मौजूद बालाजी ने दावा किया कि कुछ छात्रों ने अपने मोबाइल और अन्य उपकरणों पर डॉक्यूमेंट्री डाउनलोड की थी।

बालाजी ने कहा, ''उन्होंने (जेएनयू प्रशासन ने) बिजली और इंटरनेट बंद कर दिया है। हमने अन्य छात्रों के साथ वृत्तचित्र साझा किया और इसे एक साथ देख रहे हैं।'' बालाजी ने यह भी दावा किया कि परिसर में सादी वर्दी में पुलिसकर्मी घूम रहे थे। हालांकि, पुलिस की कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई।

सरकार ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच ट्विटर और यूट्यूब को ''इंडिया: द मोदी क्वेश्चन'' नामक वृत्तचित्र के लिंक ब्लॉक करने का निर्देश दिया था। विदेश मंत्रालय ने वृत्तचित्र को एक ''दुष्प्रचार का हथकंडा'' बताते हुए खारिज कर दिया है। सरकार का कहना है कि इसमें निष्पक्षता का अभाव है और यह एक औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाता है।विपक्षी दलों ने हालांकि वृत्तचित्र तक पहुंच को अवरुद्ध करने के सरकार के कदम की आलोचना की है।

भाषा इनपुट के साथ