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देश में मुस्लिमों के खिलाफ बढ़ रही नफरत; जमीयत ने लगाया आरोप, अलग कानून बनाने की मांग

दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महाधिवेशन में आरोप लगाया गया कि देश में मुस्लिमों के खिलाफ नफरत बढ़ रही है। सम्मेलन में कई प्रस्ताव भी पारित किए गए।

देश में मुस्लिमों के खिलाफ बढ़ रही नफरत; जमीयत ने लगाया आरोप, अलग कानून बनाने की मांग
Krishna Singhएजेंसियां,नई दिल्लीSat, 11 Feb 2023 02:27 AM

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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में शुक्रवार से मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद का महाधिवेशन शुरू हुआ। इसमें पहले दिन कई प्रस्ताव पारित किए गए। जमीयत ने देश में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया। महाधिवेशन में शामिल होने वाले नुमाइंदों ने कहा कि देश में इस्लामोफोबिया बढ़ रही है। नुमाइंदों ने इस पर चिंता जाहिर करते हुए मांग उठाई कि मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा भड़काने वालों को दंडित करने के लिए संसद के जरिए अलग से कानून बनाया जाना चाहिए। 

सरकार पर चुप्पी साधने का आरोप 
जमीयत के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी की अध्यक्षता में शुरू हुए महाधिवेशन में संगठन ने देश में तथाकथित नफरती अभियान और 'इस्लामोफोबिया' में कथित बढ़ोतरी के आरोप लगाते हुए कई प्रस्तावों को पारित किया। जमीयत ने आरोप लगाया, देश में मुसलमानों के खिलाफ नफरत और उकसावे की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। सबसे दुखद बात यह है कि यह सब सरकार की आंखों के सामने हो रहा है लेकिन वह खामोश है। 

नफरत फैलाने वाले तत्वों पर हो कार्रवाई
संगठन ने कहा कि वह इन परिस्थितियों में देश की संप्रभुता को लेकर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहता है। जमीयत की ओर से प्रस्तावित कदमों में नफरत फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है। साथ ही मीडिया संगठनों पर भी आरोप लगाए गए हैं। संगठन ने प्रस्तावों में कहा कि हिंसा के लिए उकसाने वालों को दंडित करने के लिए एक अलग कानून बनाया जाना चाहिए। महाधिवेशन का पूर्ण सत्र रविवार को आयोजित होगा।

कैसे बनाई जाए सकारात्मक छवि 
जमीयत ने आरोप लगाया कि देश में उकसावे के मामलों के अलावा इस्लामोफोबिया के स्तर में खतरनाक बढ़ोतरी हुई। जमीयत ने कहा कि वह सरकार का ध्यान इस बात की ओर आकर्षित करना चाहता है कि देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता कैसे सुनिश्चित की जाए। यही नहीं देश की सकारात्मक छवि कैसे बनाई जाए।

कई मसलों पर हो रही चर्चा
यही नहीं जमीयत ने मतदाता पंजीकरण और चुनावों में बड़ी भागीदारी सुनिश्चित करने के प्रभावी उपायों को आजमाए जाने का भी प्रस्ताव किया। राष्ट्रीय राजधानी के रामलीला मैदान में आयोजित सम्मेलन में देश भर से उलेमा समेत हजारों लोग शिरकत कर रहे हैं। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अनुसार, सम्मेलन में समान नागरिक संहिता, धार्मिक स्वतंत्रता और मुस्लिम पर्सनल लॉ और मदरसों की स्वायत्तता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है। 

पिछड़े मुसलमानों को लेकर आ सकता है प्रस्ताव
यही नहीं सम्मेलन में सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े मुसलमानों को आरक्षण देने का प्रस्ताव भी लाने की योजना है। जमीयत उलमा-ए-हिंद काफी पुराना संगठन है। जारी बयान के मुताबिक, संगठन मुसलमानों के नागरिक, धार्मिक और शैक्षिक अधिकारों के लिए काम करता है। सम्मेलन में मुसलमानों के सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक मसलों पर भी मंथन होगा। जमीयत इस्लाम की देवबंदी विचारधारा को मानता है।