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जामिया की कुलपति नजमा अख्तर का दावा, ऐंटी CAA प्रदर्शनों के दौरान छात्रों का दिया था साथ

जामिया मिलिया इस्लामिया की निवर्तमान कुलपति नजमा अख्तर का कहना है कि वह सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान परिसर में पुलिस कार्रवाई के खिलाफ छात्रों के साथ खड़ी रहीं। पढ़ें यह रिपोर्ट...

जामिया की कुलपति नजमा अख्तर का दावा, ऐंटी CAA प्रदर्शनों के दौरान छात्रों का दिया था साथ
Krishna Singhभाषा,नई दिल्लीWed, 01 Nov 2023 11:19 PM
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जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलपति के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा करने जा रहीं नजमा अख्तर ने बुधवार को समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए साक्षात्कार में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। नजमा अख्तर ने कहा कि सीएए के खिलाफ विरोध के दौरान परिसर में पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ वह छात्रों के साथ खड़ी रहीं और सुनिश्चित किया कि उन्हें न्याय मिले। नजमा ने बताया कि मामले में हस्तक्षेप के लिए उन्होंने केंद्र को पत्र लिखा था और मांग की थी कि विश्वविद्यालय प्रशासन की अनुमति के बिना पुलिस परिसर में दाखिल नहीं हो। 

नजमा अख्तर अगले हफ्ते अपना कार्यकाल पूरा कर रही हैं। अख्तर को अप्रैल 2019 में विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया था। उसी साल दिसंबर में सीएए के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे। जामिया मिल्लिया इस्लामिया की पहली महिला कुलपति और संभवत: देश के किसी केंद्रीय विश्वविद्यालय की भी पहली महिला कुलपति होने का गौरव प्राप्त करने वाली नजमा अख्तर ने कहा कि क्या आप सोच सकते हैं कि कुलपति के पास अपने छात्रों का समर्थन करने के अलावा भी कोई विकल्प होता है?

नजमा अख्तर ने कहा यदि आप उनका समर्थन नहीं करेंगे तो फिर आप किसका समर्थन करेंगे? पद्मश्री से सम्मानित अख्तर ने कहा- मैं पूरी तरह से अपने छात्रों के साथ थी। यदि उन्हें गलत तरीके से पुलिस द्वारा पीटा गया तो मैं उसके खिलाफ थी। लेकिन हम प्रदर्शन नहीं कर सकते या इसको लेकर विलाप नहीं कर सकते हैं। मैंने अपने (शिक्षा) मंत्रालय को पत्र लिखा और कहा कि आप देखें कि मेरे छात्रों को न्याय मिले और बिना अनुमति दोबारा पुलिस का प्रवेश परिसर में नहीं होना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया सीएए विरोधी प्रदर्शन का केंद्र बन गया था। 15 दिसंबर 2019 को पुलिस विश्वविद्यालय के परिसर में दाखिल हुई थी और कथित तौर पर पुस्तकालय में पढ़ाई कर रहे छात्रों की पिटाई की थी। पुलिस के मुताबिक वह विश्वविद्यालय से महज कुछ मीटर की दूरी पर प्रदर्शन के दौरान हिंसा में संलिप्त बाहरी लोगों की तलाश में परिसर में दाखिल हुई थी। अख्तर ने कहा- उस समय ऐसी बात नहीं होनी चाहिए थी। अगर छात्रों ने कहा होता तो मैं या प्रॉक्टर उनके साथ (मंत्रालय) जाते।

नजमा अख्तर से जब पूछा गया कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या विश्वविद्यालय ने कोई एहतियाती कदम उठाया है तो कुलपति ने कहा कि ये असामान्य बातें हैं। इसलिए, यदि असामान्य परिस्थिति उत्पन्न होती है, तो हमें असामान्य समाधानों के साथ तैयार रहना होगा। यह पूछे जाने पर कोविड ​​​​-19 महामारी के दौरान विश्वविद्यालय ने इसका कैसे मुकाबला किया तो अख्तर ने कहा कि वह छात्रों को सुरक्षित रखने में कामयाब रहीं और यह सुनिश्चित किया कि वे वायरस की चपेट में आए बिना अपने घरों तक सुरक्षित पहुंचें।

उन्होंने कहा- कोरोना महामारी के दौरान एक कुलपति के रूप में 25 हजार छात्रों की देखभाल करना एक कठिन कार्य था लेकिन हम उन छात्रों को सुरक्षित रखने में कामयाब रहे जो छात्रावास में थे और उनका टीकाकरण किया। विश्वविद्यालय ने छात्रों को उनके घरों तक पहुंचाने लिए केंद्र की मदद से बसें किराए पर ली थीं। जब परिस्थितियों में थोड़ा सुधार हुआ तो हमने छात्रों को भोजन और सुरक्षा के साथ उनके घरों तक भेजने के लिए बसें किराए पर लीं, यहां तक ​​कि कश्मीर और बिहार तक बसों से छात्रों को भेजा। सरकार के सहयोग से यह सुरक्षित तरीके से किया गया।

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