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Hindi News NCR जामिया के अपदस्थ कार्यवाहक कुलपति ने नई नियुक्ति को हाईकोर्ट में दी चुनौती, क्या दी दलील?

जामिया के अपदस्थ कार्यवाहक कुलपति ने नई नियुक्ति को हाईकोर्ट में दी चुनौती, क्या दी दलील?

JMI VC Issue: जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कार्यवाहक कुलपति पद से हाल में हटाए गए प्रो. इकबाल हुसैन ने उनके स्थान पर नियुक्त प्रोफेसर मोहम्मद शकील की नियुक्ति को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

 जामिया के अपदस्थ कार्यवाहक कुलपति ने नई नियुक्ति को हाईकोर्ट में दी चुनौती, क्या दी दलील?
Krishna Singhभाषा,नई दिल्लीTue, 28 May 2024 10:13 PM
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जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कार्यवाहक कुलपति पद से हाल में हटाए गए प्रोफेसर इकबाल हुसैन ने उनके स्थान पर नियुक्त प्रोफेसर मोहम्मद शकील की नियुक्ति को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने प्रोफेसर मोहम्मद शकील की नियुक्ति को 'अवैध और मनमाना' करार देते हुए मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। विश्वविद्यालय ने प्रोफेसर शकील को 22 मई को कार्यवाहक कुलपति नियुक्त किया था। 

प्रोफेसर मोहम्मद शकील की नियुक्ति दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से प्रोफेसर इकबाल हुसैन की नियुक्ति को रद्द किए जाने के कुछ घंटे के बाद की गई थी। प्रोफेसर इकबाल हुसैन ने अपनी याचिका में कहा है कि नयी नियुक्ति हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। हाईकोर्ट ने राष्ट्रपति से कार्यवाहक कुलपति की नियुक्ति करने को कहा था। न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला ने मामले को सुनवाई के लिए 30 मई को सूचीबद्ध किया।

अदालत को सूचित किया गया कि यह मामला विजिटर के पास विचाराधीन है। न्यायमूर्ति गेडेला ने कहा कि 22 मई के उनके आदेश में स्पष्ट है कि नियुक्ति विजिटर द्वारा की जानी चाहिए। फिर विश्वविद्यालय ने कैसे नियुक्ति की। बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को प्रोफेसर इकबाल हुसैन की उस अपील को 29 मई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था। लेकिन अपील पर सुनवाई 30 मई तक टाल दी गई क्योंकि खंडपीठ की अध्यक्षता कर रहीं न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया।

बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट की एकल न्यायाधीश की पीठ ने ने 22 मई को मोहम्मद शामी अहमद अंसारी और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हुसैन को उप कुलपति बनाये जाने और बाद में विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति के तौर पर नियुक्ति को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि नियुक्तियां संबंधित कानून के अनुरूप नहीं थीं। अदालत ने जामिया विश्वविद्यालय के विजिटर (राष्ट्रपति) को एक नियमित कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश जारी करने को कहा था।