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राष्ट्र विरोधी है JNU? वाइस चांसलर ने दिया जवाब; 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' पर भी बोलीं

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित ने गुरुवार को कहा कि जेएनयू कभी भी 'राष्ट्र-विरोधी' या 'टुकड़े-टुकड़े' गिरोह का हिस्सा नहीं था। आइये जानते हैं।

राष्ट्र विरोधी है JNU? वाइस चांसलर ने दिया जवाब; 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' पर भी बोलीं
Mohammad Azamपीटीआई,दिल्लीThu, 18 Apr 2024 08:15 PM
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दिल्ली में एक मशहूर केंद्रीय विश्वविद्यालय है जिसका नाम जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) है। वैसे तो अपने वर्तमान और पूर्व छात्रों की वजह से यह विश्वविद्यालय जाना जाता है लेकिन बीते सालों यह दूसरे कारणों से भी चर्चा में रहा था। जेएनयू पर आरोप लगे थे कि यहां राष्ट्र विरोधी काम भी किया जाता है। इन सभी आरोपों पर गुरुवार को जेएनयू की वाइस चांसलर ने खुलकर जवाब दिया है। आइये जानते हैं उन्होंने क्या-क्या कहा है।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित ने गुरुवार को कहा कि जेएनयू कभी भी 'राष्ट्र-विरोधी' या 'टुकड़े-टुकड़े' गिरोह का हिस्सा नहीं था। उन्होंने कहा कि जेएनयू हमेशा असहमति, बहस और लोकतंत्र को बढ़ावा देता रहेगा। गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में जेएनयू की पहली महिला कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित ने कहा कि जेएनयू का 'भगवाकरण' नहीं हुआ है और इसके दिन-प्रतिदिन के कामकाज में केंद्र सरकार का कोई दबाव नहीं है।

जेएनयू की छात्रा रहीं पंडित ने स्वीकार किया कि जब उन्होंने कुलपति का कार्यभार संभाला तो परिसर में ध्रुवीकरण हो गया था और उन्होंने इस दौर को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। कुलपति ने दावा किया कि दोनों पक्षों (छात्रों और प्रशासन) से गलतियां हुईं और नेतृत्व ने हालात को संभालने में गलती की। पंडित ने यह भी कहा कि न तो उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े होने पर कोई अफसोस है और न ही वह इसे छिपाती हैं।

गुरुवार को शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित ने रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में अपने जन्म से लेकर चेन्नई में एक मध्यम वर्गीय दक्षिण भारतीय परिवार में पलने-बढ़ने तक के अपने जीवन के बारे में विस्तार से बात की। पंडित ने कहा कि विश्वविद्यालय को क्यूएस रैंकिंग में शीर्ष स्थान दिलाने वाली 'संघी कुलपति' होने पर उन्हें गर्व है। उन्होंने कहा कि एक विश्वविद्यालय के रूप में हमें इस सब (भगवाकरण) से ऊपर उठना चाहिए। जेएनयू राष्ट्र के लिए है, किसी विशेष पहचान के लिए नहीं। जेएनयू समावेशिता और विकास के लिए है और मैं हमेशा कहती हूं कि यह सात डी- डेवलपमेंट (विकास), डेमोक्रसी (लोकतंत्र), डिसेन्ट (असहमति), डायवर्सिटी (विविधता), डिबेट (बहस) और डिस्कशन (चर्चा), डिफरेन्स (मतभेद) तथा डेलिबरेशन (विचार-विमर्श) के लिए है।’’

पंडित ने 2022 में जेएनयू के कुलपति का पद संभाला था। तब परिसर छात्रों के आंदोलन से जूझ रहा था और एक कार्यक्रम के दौरान परिसर में कथित राष्ट्र-विरोधी नारे लगाए जाने पर 2016 के विवाद में घिर गया था। नारेबाजी में शामिल छात्रों पर 'टुकड़े-टुकड़े' गिरोह का सदस्य होने का आरोप लगाया गया। विश्वविद्यालय की राष्ट्र-विरोधी छवि के बारे में एक सवाल पर उन्होंने कहा कि वह ऐसा दौर था जब दोनों पक्षों ने गलतियां कीं। मुझे लगता है कि नेतृत्व ने इसे संभालने में गलती की। किसी भी विश्वविद्यालय में 10 प्रतिशत शरारती तत्व होते हैं। ऐसा केवल जेएनयू में नहीं है। यह नेतृत्व पर निर्भर करता है कि हम उग्र विचार वाले लोगों से कैसे निपटते हैं...लेकिन मुझे नहीं लगता कि हम राष्ट्र-विरोधी या टुकड़े-टुकड़े गिरोह का हिस्सा हैं।

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