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भ्रूण हटाने की इजाजत नहीं मिलेगी, 20 साल की प्रेग्नेंट अविवाहित युवती से हाई कोर्ट ने क्यों कहा

अपनी याचिका में युवती ने कहा था कि वो अपनी सहमित से एक रिलेशनशिप में थी। हाल ही में उन्हें अपनी प्रेग्नेंसी का पता चला है। महिला को 25 जनवरी को गर्भवती होने का पता चला। उस वक्त 27 हफ्ते की गर्भवती थीं

भ्रूण हटाने की इजाजत नहीं मिलेगी, 20 साल की प्रेग्नेंट अविवाहित युवती से हाई कोर्ट ने क्यों कहा
Nishant Nandanपीटीआई,नई दिल्लीThu, 01 Feb 2024 05:02 PM
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दिल्ली हाई कोर्ट ने 20 साल की एक अविवाहित युवती को गर्भपात कराने की इजाजत नहीं दी है। महिला 28 हफ्ते की प्रेग्नेंट थी। अदालत ने इस बात पर गौर किया कि भ्रूण पूरी तरह से विकसित हो चुका है और भ्रूण को नष्ट करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। आपको बता दें कि  Medical Termination of Pregnancy (MTP) Act ज्यादा से ज्यादा 27 हफ्तों के भ्रूण के ही गर्भपात की इजाजत देता है। हालांकि, किसी तरह की असामान्य परिस्थितियों में मेडिकल बोर्ड 24 हफ्तों के भ्रूण को भी टर्मिनेट करने की इजाजत नहीं नहीं दे सकती है। 

अदालत में जज ने कहा, 'यह कोर्ट 28 हफ्तों के भ्रूण को टर्मिनेट करने की इजाजत नहीं दे सकती है। मैं 28 हफ्तों के पूर्ण विकसित भ्रूण को हटाने की इजाजत नहीं दूंगा। रिपोर्ट में मुझे भ्रूण में कोई असामान्यता नजर नहीं आई है। भ्रूण को नष्ट करने की इजाजत नहीं दे सकती है।'

अपनी याचिका में युवती ने कहा था कि वो अपनी सहमित से एक रिलेशनशिप में थी। हाल ही में उन्हें अपनी प्रेग्नेंसी का पता चला है। अदालत में महिला के वकील अमित मिश्रा ने कहा कि महिला को 25 जनवरी को गर्भवती होने का पता चला था उस वक्त वो 27 हफ्ते की गर्भवती थीं। महिला ने इसके बाद चिकित्सकों से संपर्क कर कहा है कि वो गर्भपात कराना चाहती हैं क्योंकि वो बच्चे की देखभाल कर पाने की स्थिति में नहीं हैं। लेकिन चिकित्सकों ने इनकार कर दिया था। 

वकील ने कहा कि उनके परिवार में कोई भी उनकी प्रेग्नेंसी के बारे में नहीं जानता और वो अविवाहित हैं। उन्होंने अदालत से गुहार लगाई कि वो All India Institute of Medical Sciences (AIIMS)को निर्देश दें कि वो महिला का चिकित्सीय परीका्षण करें और उनकी शारीरिक तथा मानसिक हालात की जांच करें। हालांकि, अदालत ने उनकी मांगों को ठुकरा दिया है। 
 

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