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ED ने ऐसी क्या दी दलील कि हाई कोर्ट ने रोक दी अरविंद केजरीवाल की जमानत

आज हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है जिसमें उसने ट्रायल कोर्ट के फैसले को गलत बताते हुए केजरीवाल की जमानत पर रोक लगा दी। यानी केजरीवाल फिलाहल जेल में ही रहेंगे।

ED ने ऐसी क्या दी दलील कि हाई कोर्ट ने रोक दी अरविंद केजरीवाल की जमानत
Aditi Sharmaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीTue, 25 Jun 2024 05:11 PM
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दिल्ली हाई कोर्ट से केजरीवाल को बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए केजरीवाल की जमानत पर रोक लगा दी है। दरअसल ट्रायल कोर्ट की तरफ से केजरीवाल को जमानत दिए जाने के बाद ईडी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। ईडी ने कहा था कि ट्रायल कोर्ट ने जांच एंजेंसी को अपनी बात रखने का पूरा मौका नहीं दिया और केजरीवाल को जमानत देदी। हाई कोर्ट ने ईडी की याचिका स्वीकार करते हुए सुनवाई होने तक जमानत पर रोक लगा दी थी। सुनवाई होने के बाद हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया और फैसला सुनाए जाने तक जमानत पर अंतरिम रोक लगा दी। अब आज हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया जिसमें उसने ट्रायल कोर्ट के फैसले को गलत बताते हुए केजरीवाल की जमानत पर रोक लगा दी। यानी केजरीवाल अब तिहाड़ में ही रहेंगे। 

बताया जा रहा है कि ईडी ने उसी दिन हाई कोर्ट का रुख किया था जिस दिन केजरीवाल जेल से बाहर आने वाले थे। लेकिन हाई कोर्ट की तरफ से ईडी की याचिका स्वीकार किए जाने के बाद उनकी रिहाई टल गई। इसके बाद ईडी ने एक के बाद एक कई बातें कोर्ट के सामने रखीं और ट्रायल कोर्ट के फैसले को गलत साबित किया। 

ईडी ने कैसे रोकी केजरीवाल की रिहाई?

ईडी ने हाई कोर्ट में ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए कई बातें कही। ईडी ने कहा, निचली अदालत का आदेश त्रुटिपूर्ण, एकतरफा और गलत था और निष्कर्ष अप्रासंगिक तथ्यों पर आधारित थे।   ईडी ने कहा कि निचली अदालत ने अपने फैसले में  केजरीवाल के खिलाफ सबूतों पर गौर नहीं किया गया।

ईडी की ओर से कहा गया कि इस मामले में जहां धारा 45 PMLA शामिल है, ट्रायल कोर्ट के पास कोई विवेकाधिकार नहीं है। अदालत को प्रथम दृष्टया यह निष्कर्ष देना होगा कि वह अपराध का दोषी नहीं है। विशेष अदालत के आदेश का पैरा 15, धारा 45 PMLA के विपरीत है। जमानत देने में कोई विवेकाधिकार नहीं है।  हमने ये सारे सबूत दे दिए हैं। सीएम के आवास के आगंतुक रजिस्टर के रूप में पुष्टि की है कि गवाह उनसे मिला है।  वह दिखाएंगे कि आदेश कितना विकृत और असंतुलित है।

 ईडी की ओर से पेश एएसजी ने कहा कि संवैधानिक कुर्सी पर बैठना जमानत का आधार है। इसका मतलब है कि हर मंत्री को जमानत मिलेगी। आप सीएम हैं इसलिए आपको जमानत मिलेगी। इससे ज़्यादा गलत कुछ नहीं हो सकता। एएसजी ने कहा कि सुनवाई अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश पर भरोसा किया, जिसमें केजरीवाल को अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया था। उन्होंने कहा कि जबकि सुप्रीम कोर्ट ने खुद कहा है कि इस आदेश पर भरोसा नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सीएम सचिवालय नहीं जा सकते।

एएसजी ने केजरीवाल को दोहरे मामले में शामिल होने का दावा करते हुए कहा कि आप  के व्यवसाय और मामलों के संचालन के लिए जिम्मेदार हर व्यक्ति धनशाेधन के अपराध का दोषी होगा। एएसजी ने पीएमएलए की धारा 70 का हवाला देते हुए कहा कि हमारा मामला यह है कि केजरीवाल दो मामलों में धनशोधन के दोषी हैं। पहला उनकी व्यक्तिगत हैसियत का है जहां उन्होने व्यक्तिगत रुप से सौ करोड़ रुपये की रिश्वत की मांग की। दूसरा वे परोक्ष रुप से उत्तरदायी हैं क्योंकि वह आम आदमी पार्टी के संयोजक हैं और क्योंकि इस मामले में आप भी धनशोधन की आरोपी है तो ऐसे में आप के लिए इस्तेमाल अपराध के धन के लिए भी केजरीवाल दोषी हैं।

एक लाख मुचलके पर मिली थी केजरीवाल को जमानत

निचली अदालत ने 20 जून को केजरीवाल को जमानत दे दी थी और एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया था। निचली अदालत ने साथ ही कुछ शर्तें भी लगाई थीं, जिसमें यह भी शामिल था कि वह जांच में बाधा डालने या गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे।

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